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सावधान, घी-तेल में भी मिलावट
Updated Sun, 25 Feb 2018 01:16 AM IST
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ज्ञानपुर। रंगों का पर्व होली नजदीक आते ही मिलावटी घी और तेल का कारोबार बढ़ गया है। देसी घी में वनस्पति घी और तरह-तरह के केमिकल मिलाए जा रहे है, ताकि उसकी पहचान आसानी से न की जा सके। खतरनाक रसायनों की मिलावट से लोगों की सेहत बिगड़ रही है।
जिले में प्रतिदिन लगभग 1000 किलो ग्राम देसी घी खपत है। होली पर यह खपत बढ़कर दुगुनी हो जाती है। जिले में प्रतिदिन सवा लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। उसी से देशी घी भी बनाया जाता है लेकिन पर्वों पर हर घर में गुझिया और अन्य पकवान बनने से इसकी मांग बढ़ जाती है। पकवानों के लिए खोआ, पनीर और देसी घी की मांग काफी बढ़ जाती है। होली नजदीक आने पर प्रतिदिन जिले में 2000 किलो ग्राम देसी घी की खपत होती है। मिलावटखोर मुनाफे के चक्कर में होली के 10 पहले ही मिलावटी घी बनाने जुट गए हैं। होली पर बेचने के लिए मिलावटी घी को बनाकर स्टाक कर रहे हैं। जैसे-जैसे होली नजदीक आएगी देसी घी की खपत और बढ़ जाएगी। आगे मिलावटखोरी का धंधा और जोर पकड़ेगा। नागरिक संतोष कुमार, विजय कुमार ने कहा कि मिलावटी घी सेहत के लिए नुकसानदायक है। इस पर रोकथाम लगाने की जरूरत है। नागरिक सर्वेश कुमार ने कहा कि जिले में खपत के सापेक्ष देसी घी का उत्पादन नहीं होता, फिर भी बाजार में देसी घी की कोेई कमी नहीं है। विजय कुमार ने कहा कि होली पर पर देसी घी से कई पकवान बनते हैं। घी खरीदना जरूरी है। घी शुद्ध है या मिलावटी इसकी पहचान आम नागरिक नहीं कर सकते।
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जिले में प्रतिदिन लगभग 1000 किलो ग्राम देसी घी खपत है। होली पर यह खपत बढ़कर दुगुनी हो जाती है। जिले में प्रतिदिन सवा लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। उसी से देशी घी भी बनाया जाता है लेकिन पर्वों पर हर घर में गुझिया और अन्य पकवान बनने से इसकी मांग बढ़ जाती है। पकवानों के लिए खोआ, पनीर और देसी घी की मांग काफी बढ़ जाती है। होली नजदीक आने पर प्रतिदिन जिले में 2000 किलो ग्राम देसी घी की खपत होती है। मिलावटखोर मुनाफे के चक्कर में होली के 10 पहले ही मिलावटी घी बनाने जुट गए हैं। होली पर बेचने के लिए मिलावटी घी को बनाकर स्टाक कर रहे हैं। जैसे-जैसे होली नजदीक आएगी देसी घी की खपत और बढ़ जाएगी। आगे मिलावटखोरी का धंधा और जोर पकड़ेगा। नागरिक संतोष कुमार, विजय कुमार ने कहा कि मिलावटी घी सेहत के लिए नुकसानदायक है। इस पर रोकथाम लगाने की जरूरत है। नागरिक सर्वेश कुमार ने कहा कि जिले में खपत के सापेक्ष देसी घी का उत्पादन नहीं होता, फिर भी बाजार में देसी घी की कोेई कमी नहीं है। विजय कुमार ने कहा कि होली पर पर देसी घी से कई पकवान बनते हैं। घी खरीदना जरूरी है। घी शुद्ध है या मिलावटी इसकी पहचान आम नागरिक नहीं कर सकते।
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