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रोड शो को मेगा शो में नहीं बदल पाई कांग्रेस
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शशांक मिश्र
वाराणसी। महामना की प्रतिमा से गंगा का किनारा बुधवार को काशी की सियासत का साक्षी बनने को तैयार था। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राह पर चलकर ही उन्हें चुनौती देने भी निकली थीं। नामांकन से पहले 25 अप्रैल को लंका से गोदौलिया तक हुए रोड शो की तर्ज पर ही कांग्रेस ने भी ताकत दिखाने की पुरजोर कोशिश की। बावजूद इसके कांग्रेस कार्यक्रम को मेगा शो में नहीं बदल पाई।
प्रधानमंत्री मोदी को उनकी संसदीय सीट पर घेरने की कवायद में कांग्रेस ने उन्हीं की राह चुनी। पीएम के रोड शो के रुट पर ही प्रियंका ने लगभग उसी समय महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर गोदौलिया के लिए निकलीं। दो घंटे में पूरे हुए पांच किमी के रोड शो के दौरान जगह-जगह प्रियंका का स्वागत भी किया गया। मगर, 25 अप्रैल को मोदी का मेगा शो देख चुके काशीवासियों पर रोड शो असर नहीं छोड़ पाया। रोड शो के दौरान सड़कों पर भीड़ कम नहीं थी मगर उत्साह नहीं दिखा।
माना जा रहा है कि रोड शो के लिए कांग्रेस स्थानीय स्तर पर रणनीति नहीं बना पाई। समय और रूट के अलावा इसमें स्थानीय विविधताओं के रंग मुकम्मल ढंग से नहीं दिखे। मोदी के रोड शो को योजनाबद्ध ढंग से भव्य रूप दिया गया था। यही कारण था कि अलग-अलग वेशभूषा में मौजूद लोग और उत्साह से लबरेज भीड़ ने देश भर में छाप छोड़ी थी।
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वाराणसी। महामना की प्रतिमा से गंगा का किनारा बुधवार को काशी की सियासत का साक्षी बनने को तैयार था। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राह पर चलकर ही उन्हें चुनौती देने भी निकली थीं। नामांकन से पहले 25 अप्रैल को लंका से गोदौलिया तक हुए रोड शो की तर्ज पर ही कांग्रेस ने भी ताकत दिखाने की पुरजोर कोशिश की। बावजूद इसके कांग्रेस कार्यक्रम को मेगा शो में नहीं बदल पाई।
प्रधानमंत्री मोदी को उनकी संसदीय सीट पर घेरने की कवायद में कांग्रेस ने उन्हीं की राह चुनी। पीएम के रोड शो के रुट पर ही प्रियंका ने लगभग उसी समय महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर गोदौलिया के लिए निकलीं। दो घंटे में पूरे हुए पांच किमी के रोड शो के दौरान जगह-जगह प्रियंका का स्वागत भी किया गया। मगर, 25 अप्रैल को मोदी का मेगा शो देख चुके काशीवासियों पर रोड शो असर नहीं छोड़ पाया। रोड शो के दौरान सड़कों पर भीड़ कम नहीं थी मगर उत्साह नहीं दिखा।
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माना जा रहा है कि रोड शो के लिए कांग्रेस स्थानीय स्तर पर रणनीति नहीं बना पाई। समय और रूट के अलावा इसमें स्थानीय विविधताओं के रंग मुकम्मल ढंग से नहीं दिखे। मोदी के रोड शो को योजनाबद्ध ढंग से भव्य रूप दिया गया था। यही कारण था कि अलग-अलग वेशभूषा में मौजूद लोग और उत्साह से लबरेज भीड़ ने देश भर में छाप छोड़ी थी।
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