{"_id":"5a8b35c44f1c1b91268bb398","slug":"191519072708-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्सी पर हुआ रंगे बनारस का शुभारंभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्सी पर हुआ रंगे बनारस का शुभारंभ
Updated Tue, 20 Feb 2018 02:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अस्सी घाट पर जीवंत हुआ मिनी भारत का नजारा
पारंपरिक लोक और आदिवासी नृत्य महोत्सव शुरू
हस्तशिल्प एवं पारंपरिक खाद्य महोत्सव में लगे 40 स्टाल
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। अस्सी घाट पर मिनी भारत का नजारा जीवंत हो गया। देश भर की संस्कृति, कला, शिल्प और खानपान के विविधताओं से भरा रस बनारस मेला सोमवार को अस्सी घाट पर शुरू हो गया। मेले में पारंपरिक, लोक और आदिवासी नृत्य महोत्सव के अलावा हस्तकला, हस्तशिल्प एवं पारंपरिक खाद्य महोत्सव का आयोजन संस्कृति मंत्रालय और उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से किया गया है। महोत्सव में 40 से अधिक स्टाल लगाए गए हैं। 22 फरवरी तक चलने वाले मेले में आने वाले दर्शकों के मनोरंजन के लिए सांस्कृतिक आयोजनों को प्रस्तुत किया जाएगा।
हरियाणा का बीन वादन, मणिपुर का लाईहरोबा, यूपी का लोकनृत्य, मिजोरम का चेरांव, झारखंड का छऊ और राजस्थान का कच्ची घोड़ी सभी के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। मेला प्रभारी एमएम मणि तिवारी ने बताया कि मेले में देश के सभी प्रांतों की कला और संस्कृति का समन्वय किया गया है। मेले में मणिपुर, राजस्थान, दीमापुर, यूपी, उत्तराखंड, कोलकाता, राजस्थान, हरियाणा आदि प्रदेशों के शिल्पकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। सोमवार को मेले का उद्घाटन आधुनिक कला संग्रहालय नई दिल्ली के अद्वैत गण नायक ने किया।
इनसेट
सजेगी संगीत की संध्या
वाराणसी। संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम रस बनारस में 21 और 22 को सांस्कृतिक संध्या भी आयोजित की जाएगी। इसके तहत 21 को मानमंदिर घाट पर अवंतिका मिश्र का तबला, पं. नरेंद्र मिश्र का सितार व पूरण महाराज का तबला, सौरव-गौरव का कथक और संजीव एवं अश्विनी शंकर का शहनाई वादन पेश किया जाएगा। 22 फरवरी को आयोजित दूसरी सांस्कृतिक संध्या में मालिनी अवस्थी की ठुमरी, विशाल कृष्णा एवं समूह का कथक और श्रुति सड़ोलीकर का शास्त्रीय गायन होगा। इस दौरान केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री डॉ. महेश शर्मा और महापौर मृदुला जायसवाल उपस्थित रहेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पारंपरिक लोक और आदिवासी नृत्य महोत्सव शुरू
हस्तशिल्प एवं पारंपरिक खाद्य महोत्सव में लगे 40 स्टाल
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। अस्सी घाट पर मिनी भारत का नजारा जीवंत हो गया। देश भर की संस्कृति, कला, शिल्प और खानपान के विविधताओं से भरा रस बनारस मेला सोमवार को अस्सी घाट पर शुरू हो गया। मेले में पारंपरिक, लोक और आदिवासी नृत्य महोत्सव के अलावा हस्तकला, हस्तशिल्प एवं पारंपरिक खाद्य महोत्सव का आयोजन संस्कृति मंत्रालय और उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से किया गया है। महोत्सव में 40 से अधिक स्टाल लगाए गए हैं। 22 फरवरी तक चलने वाले मेले में आने वाले दर्शकों के मनोरंजन के लिए सांस्कृतिक आयोजनों को प्रस्तुत किया जाएगा।
हरियाणा का बीन वादन, मणिपुर का लाईहरोबा, यूपी का लोकनृत्य, मिजोरम का चेरांव, झारखंड का छऊ और राजस्थान का कच्ची घोड़ी सभी के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। मेला प्रभारी एमएम मणि तिवारी ने बताया कि मेले में देश के सभी प्रांतों की कला और संस्कृति का समन्वय किया गया है। मेले में मणिपुर, राजस्थान, दीमापुर, यूपी, उत्तराखंड, कोलकाता, राजस्थान, हरियाणा आदि प्रदेशों के शिल्पकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। सोमवार को मेले का उद्घाटन आधुनिक कला संग्रहालय नई दिल्ली के अद्वैत गण नायक ने किया।
विज्ञापन
इनसेट
सजेगी संगीत की संध्या
वाराणसी। संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम रस बनारस में 21 और 22 को सांस्कृतिक संध्या भी आयोजित की जाएगी। इसके तहत 21 को मानमंदिर घाट पर अवंतिका मिश्र का तबला, पं. नरेंद्र मिश्र का सितार व पूरण महाराज का तबला, सौरव-गौरव का कथक और संजीव एवं अश्विनी शंकर का शहनाई वादन पेश किया जाएगा। 22 फरवरी को आयोजित दूसरी सांस्कृतिक संध्या में मालिनी अवस्थी की ठुमरी, विशाल कृष्णा एवं समूह का कथक और श्रुति सड़ोलीकर का शास्त्रीय गायन होगा। इस दौरान केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री डॉ. महेश शर्मा और महापौर मृदुला जायसवाल उपस्थित रहेंगी।
विज्ञापन