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उलमा ने कहा, शरई कानून ही ऊपर
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वाराणसी। तीन तलाक बिल भले ही लोकसभा में पास कर दिया गया हो, लेकिन शहर के उलमा इस बिल से इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि ये शरीयत में दखल है। हमारे लिए शरई कानून ही सर्वोपरि है। इससे इतर जो बिल पास किया गया है, उसमें अब भी कई संशोधन की जरूरत है। इसके लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों व इस्लाम के जानकारों का मशविरा लिया जाना अहम है।
मुगलिया मस्जिद बादशाहबाग के इमाम मौलाना हसीन का कहना है कि लोकसभा में जो बिल पहले पास किया गया और जो अब पास हुआ, दोनों ही देश के संविधान विरुद्ध है। मजहबी मसलों पर जानकारों की राय ली जानी चाहिए। उलमा की राय बेहद जरूरी है। कानून ऐसा हो जो किसी एक पर बोझ न बने।
शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता फरमान हैदर ने कहा कि इस्लाम में तीन तलाक पहले भी मान्य नहीं था। रही बात बिल की तो एक अहम सवाल ये खड़ा होता है कि अगर शौहर को तीन साल की सजा हो जाती है तो वह पत्नी को गुजारा भत्ता कहां से देगा।
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तीन तलाक के मुद्दे पर काली महल की शबाना यासमीन का कहना है कि तीन तलाक खत्म होना चाहिए। पति के जायदाद में हिस्सा, मुआवजा से तलाकशुदा पत्नी को कुछ तो संबल मिलेगा।
बड़ी बाजार की रूबीना का कहना है कि तीन तलाक पर बिल पास हुआ ये खुशी की बात है, लेकिन ये शरीयत से जुड़ा मामला है। बेहतर होता इस मसले में उलमा की राय शुमारी को शामिल किया जाता।
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मुगलिया मस्जिद बादशाहबाग के इमाम मौलाना हसीन का कहना है कि लोकसभा में जो बिल पहले पास किया गया और जो अब पास हुआ, दोनों ही देश के संविधान विरुद्ध है। मजहबी मसलों पर जानकारों की राय ली जानी चाहिए। उलमा की राय बेहद जरूरी है। कानून ऐसा हो जो किसी एक पर बोझ न बने।
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शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता फरमान हैदर ने कहा कि इस्लाम में तीन तलाक पहले भी मान्य नहीं था। रही बात बिल की तो एक अहम सवाल ये खड़ा होता है कि अगर शौहर को तीन साल की सजा हो जाती है तो वह पत्नी को गुजारा भत्ता कहां से देगा।
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तीन तलाक के मुद्दे पर काली महल की शबाना यासमीन का कहना है कि तीन तलाक खत्म होना चाहिए। पति के जायदाद में हिस्सा, मुआवजा से तलाकशुदा पत्नी को कुछ तो संबल मिलेगा।
बड़ी बाजार की रूबीना का कहना है कि तीन तलाक पर बिल पास हुआ ये खुशी की बात है, लेकिन ये शरीयत से जुड़ा मामला है। बेहतर होता इस मसले में उलमा की राय शुमारी को शामिल किया जाता।