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हेल्प डेस्क शुरू, आज से ऑनलाइन सेवाएं
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मुख्यमंत्री ने शुक्रवार शाम काशी विश्वनाथ मंदिर में आने वाले दर्शनार्थियों के लिए नवनिर्मित हेल्प डेस्क का शुभारंभ किया। बांस फाटक पर बनी इस डेस्क पर दर्शन पूजन की सभी सुविधाएं मिलेंगी। मुख्यमंत्री ने विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण एवं सुंदरीकरण कार्य का निरीक्षण भी किया। अधिकारियों के साथ बैठक की और पूरे प्रोजेक्ट का प्रजेंटेशन देखा। कहा कि कॉरिडोर का कार्य गुणवत्ता के साथ तेजी से कराएं।
योगी में विजिटर बुक में लिखी काशी की महत्ता
मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी की पहचान बाबा विश्वनाथ के मंदिर और क्षेत्र का सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है। 1916 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने बाबा के दर्शन करने के दौरान गलियों और गंदगी को देखकर कटाक्ष किया था, 100 साल बाद प्रधानमंत्री उनकी मंशा के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। विस्तारीकरण में सैकड़ों वर्षों से दबे मंदिरों का पुनरुद्धार किया जा रहा है। साढे़ चार साल में काशी की तस्वीर बदल गई है।
मंदिर में किया पूजा पाठ
दर्शन पूजन के लिए हेल्प डेस्क से पैदल ही 9.40 मिनट पर मुख्यमंत्री बाबा दरबार पहुंचे। पं. टेक नरायण उपाध्याय ने मुख्यमंत्री को पूजन अर्चन कराया। मंदिर के मुख्य कार्यपालक विशाल सिंह ने अंग वस्त्र व प्रसाद भेंट किया। इसके बाद मुख्यमंत्री नीलकंठ द्वार की ओर गए। वहां कॉरिडोर के लिए चल रहा ध्वस्तीकरण कार्य देखा।
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हेल्प डेस्क पर ये सुविधाएं
- पूजा-आरती सहित किसी प्रकार की पूजा के लिए टिकट
- मंदिर का प्रसाद, दुपट्टा, धोती और शंख
- रूद्राक्ष की माला और पूजन सामग्री
- श्रद्धालुओं के लिए 300 लॉकर की सुविधा
- श्रद्धालुओं के बैठने और शौचालय की सुविधा
- पेयजल और नाश्ता और चाय कॉफी
- पूजन के लिए शास्त्री और दिव्यांगों के लिए व्हिल चेयर
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योगी में विजिटर बुक में लिखी काशी की महत्ता
मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी की पहचान बाबा विश्वनाथ के मंदिर और क्षेत्र का सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है। 1916 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने बाबा के दर्शन करने के दौरान गलियों और गंदगी को देखकर कटाक्ष किया था, 100 साल बाद प्रधानमंत्री उनकी मंशा के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। विस्तारीकरण में सैकड़ों वर्षों से दबे मंदिरों का पुनरुद्धार किया जा रहा है। साढे़ चार साल में काशी की तस्वीर बदल गई है।
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मंदिर में किया पूजा पाठ
दर्शन पूजन के लिए हेल्प डेस्क से पैदल ही 9.40 मिनट पर मुख्यमंत्री बाबा दरबार पहुंचे। पं. टेक नरायण उपाध्याय ने मुख्यमंत्री को पूजन अर्चन कराया। मंदिर के मुख्य कार्यपालक विशाल सिंह ने अंग वस्त्र व प्रसाद भेंट किया। इसके बाद मुख्यमंत्री नीलकंठ द्वार की ओर गए। वहां कॉरिडोर के लिए चल रहा ध्वस्तीकरण कार्य देखा।
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हेल्प डेस्क पर ये सुविधाएं
- पूजा-आरती सहित किसी प्रकार की पूजा के लिए टिकट
- मंदिर का प्रसाद, दुपट्टा, धोती और शंख
- रूद्राक्ष की माला और पूजन सामग्री
- श्रद्धालुओं के लिए 300 लॉकर की सुविधा
- श्रद्धालुओं के बैठने और शौचालय की सुविधा
- पेयजल और नाश्ता और चाय कॉफी
- पूजन के लिए शास्त्री और दिव्यांगों के लिए व्हिल चेयर