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ठेकेदारों को नोटिस, ब्लैक लिस्ट करने की चेतावनी
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वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में नवरात्र के दौरान तीन दिनों से सीवर सफ ाई का काम जलकल ठेकेदारों द्वारा ठप किए जाने पर नगर आयुक्त ने नाराजगी जताई है। उन्होंने सीवर सफाई से जुड़े सभी 11 ठेकेदारों को नोटिस जारी करके ब्लैक लिस्ट करने की चेतावनी दी है। साथ ही जवाब तलब करते हुए ठेकेदारों से पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। ठेकेदारों ने भी जवाब में कहा है कि बिना भुगतान उनके लिए काम करना संभव नहीं है। दबाव बनाया जाएगा तो वह कोर्ट की शरण में जाने के लिए विवश होंगे।
शुक्रवार को नगर निगम मेयर कक्ष में शहर की सफाई व सीवर व्यवस्था के लिए बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान नगर आयुक्त ने पिछले तीन दिनों से सीवर सफाई का काम ठप करने वाले 11 ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट करने की चेतावनी नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। नगर आयुक्त आशुतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि यह पहला अवसर नहीं है जब भुगतान में देरी हुई है। इससे पहले भी भुगतान में देरी होती रही है लेकिन नवरात्रि में काम बंद करना लापरवाही व गैरजिम्मेदाराना हरकत है।
वहीं जलकल कांट्रेक्टर एसोसिएशन का कहना है कि जलकल महाप्रबंधक को आठ अप्रैल को ही मांग पत्र देते हुए सूचित किया गया था कि अगर दो दिन में भुगतान नहीं हुआ तो 10 अप्रैल से काम ठप कर देंगे। जब भुगतान नहीं हुआ तो काम बंद करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर उन पर बिना भुगतान किए काम का दबाव बनाया जाएगा तो वह न्यायालय की शरण में जाने को विवश होंगे।
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शुक्रवार को नगर निगम मेयर कक्ष में शहर की सफाई व सीवर व्यवस्था के लिए बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान नगर आयुक्त ने पिछले तीन दिनों से सीवर सफाई का काम ठप करने वाले 11 ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट करने की चेतावनी नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। नगर आयुक्त आशुतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि यह पहला अवसर नहीं है जब भुगतान में देरी हुई है। इससे पहले भी भुगतान में देरी होती रही है लेकिन नवरात्रि में काम बंद करना लापरवाही व गैरजिम्मेदाराना हरकत है।
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वहीं जलकल कांट्रेक्टर एसोसिएशन का कहना है कि जलकल महाप्रबंधक को आठ अप्रैल को ही मांग पत्र देते हुए सूचित किया गया था कि अगर दो दिन में भुगतान नहीं हुआ तो 10 अप्रैल से काम ठप कर देंगे। जब भुगतान नहीं हुआ तो काम बंद करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर उन पर बिना भुगतान किए काम का दबाव बनाया जाएगा तो वह न्यायालय की शरण में जाने को विवश होंगे।
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