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शाह ने संभाल ली तीन प्रांतों की चुनावी कमान
Updated Thu, 05 Jul 2018 02:24 AM IST
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वाराणसी। लोकसभा चुनाव की तैयारी के क्रम में मिर्जापुर-वाराणसी के दौरे पर आए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मछली की आंख यानी अगली बार भी एनडीए सरकार का मंतव्य स्पष्ट कर दिया है। माना जा रहा है कि इस बार 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले पर झंडा फहराने के साथ ही भाजपा पूरी तरह से चुनावी मोड में आ जाएगी।
2014 के लोकसभा चुनाव की तरह ही शाह ने इस बार भी काशी, अवध और गोरक्ष प्रांत का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। उन्होंने खुद कहा कि दिल्ली की रास्ता यूपी से होकर जाता है। इसी लिहाज से बुधवार को अपने दौरे में उन्होंने न केवल कार्यकर्ताओं बल्कि नेताओं को संगठन और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने की सख्त हिदायत दी। कहा, सहयोग के अभाव में हम लक्ष्य हासिल करने से चूक जाएंगे।
सपा-बसपा गठबंधन की तमाम तिकड़मों को पीछे छोड़ने का आह्वान करते हुए शाह ने संकेत दिए हैं कि इस बार भी चुनावी संग्राम की केंद्र काशी ही रहेगा। सोशल मीडिया के जरिए विपक्ष को करारा जवाब देने की रणनीति बना ली गई है। बूथ स्तर पर तक पैठ बनाने के लिए स्मार्टफोन वाले पार्टी वालंटियर को जिम्मेदारी दी गई कि किस प्रकार से ग्राफिक्स और कार्टून के माध्यम से जनता तक मेसेज पहुंचाना है। मोदी सरकार के चार साल के काम काज का तुलनात्मक अध्ययन विपक्षी सरकारों से करने का डेटा बेस मजबूत करने को कहा। उन्होंने आईटी सेल से जुड़े वालटियर्स को इस लड़ाई में इस्तेमाल होने वाली साइबर तकनीक बताई।
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2014 के लोकसभा चुनाव की तरह ही शाह ने इस बार भी काशी, अवध और गोरक्ष प्रांत का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। उन्होंने खुद कहा कि दिल्ली की रास्ता यूपी से होकर जाता है। इसी लिहाज से बुधवार को अपने दौरे में उन्होंने न केवल कार्यकर्ताओं बल्कि नेताओं को संगठन और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने की सख्त हिदायत दी। कहा, सहयोग के अभाव में हम लक्ष्य हासिल करने से चूक जाएंगे।
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सपा-बसपा गठबंधन की तमाम तिकड़मों को पीछे छोड़ने का आह्वान करते हुए शाह ने संकेत दिए हैं कि इस बार भी चुनावी संग्राम की केंद्र काशी ही रहेगा। सोशल मीडिया के जरिए विपक्ष को करारा जवाब देने की रणनीति बना ली गई है। बूथ स्तर पर तक पैठ बनाने के लिए स्मार्टफोन वाले पार्टी वालंटियर को जिम्मेदारी दी गई कि किस प्रकार से ग्राफिक्स और कार्टून के माध्यम से जनता तक मेसेज पहुंचाना है। मोदी सरकार के चार साल के काम काज का तुलनात्मक अध्ययन विपक्षी सरकारों से करने का डेटा बेस मजबूत करने को कहा। उन्होंने आईटी सेल से जुड़े वालटियर्स को इस लड़ाई में इस्तेमाल होने वाली साइबर तकनीक बताई।
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