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पैसे को लेकर सशंकित रहे उपभोक्ता0
Updated Fri, 27 Apr 2018 02:28 AM IST
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वाराणसी। सात साल से भी अधिक पुराने मनी लांड्रिंग और हवाला के जरिए करोड़ों रुपये बैंकाें में जमा करने और निकालने का मामला प्रकाश में आने के बाद बनारस मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक में गुरुवार को उपभोक्ता पैसे की सुरक्षा को लेकर सशंकित दिखे। वहीं बैंक कर्मचारी उन्हें पैसे की सुरक्षा का विश्वास दिलाने में जुटे रहे। दूसरी तरफ सचिव और प्रबंधक पर मुकदमा दर्ज कर सिगरा पुलिस शांत रही।
बैंक के सचिव प्रवीण और प्रबंधक विवेकानंद पर मुकदमा दर्ज कराने वाले बैंक कर्मचारी माधव प्रसाद पर 15 दिन पहले केस दर्ज कराया गया। यह मुकदमा सचिव प्रवीण ने दर्ज कराया था। माधव पर आठ लाख की हेराफेरी का आरोप है। माधव प्रसाद का आरोप है कि सचिव प्रवीण पैसे और रसूख के बल पर साढ़े सात साल तक यह मामला दबाए रहे। बैंक प्रशासन भी उदासीन बना रहा। 15 दिन पहले मामला संज्ञान में आने के बाद भी सिगरा पुलिस कोई विशेष कार्रवाई नहीं की।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के सामने स्थित मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक में मनीलांड्रिंग का मामला बुधवार को प्रकाश में आया था। आरोप है कि प्रबंधक व सचिव ने मिलीभगत कर यमुना गोविंद भुआड़ के नाम से एक फर्जी बैंक एकाउंट खोला और इसमें 60 लाख रुपये मुंबई से चेक के जरिए जमा किए गए। तीन से चार दिन में इस राशि को अलग-अलग नाम के व्यक्तियों के हस्ताक्षर कर राशि निकाली गई। एडीजी जोन के हस्तक्षेप के बाद मामले को पुलिस ने संज्ञान में लिया।
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बैंक के सचिव प्रवीण और प्रबंधक विवेकानंद पर मुकदमा दर्ज कराने वाले बैंक कर्मचारी माधव प्रसाद पर 15 दिन पहले केस दर्ज कराया गया। यह मुकदमा सचिव प्रवीण ने दर्ज कराया था। माधव पर आठ लाख की हेराफेरी का आरोप है। माधव प्रसाद का आरोप है कि सचिव प्रवीण पैसे और रसूख के बल पर साढ़े सात साल तक यह मामला दबाए रहे। बैंक प्रशासन भी उदासीन बना रहा। 15 दिन पहले मामला संज्ञान में आने के बाद भी सिगरा पुलिस कोई विशेष कार्रवाई नहीं की।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के सामने स्थित मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक में मनीलांड्रिंग का मामला बुधवार को प्रकाश में आया था। आरोप है कि प्रबंधक व सचिव ने मिलीभगत कर यमुना गोविंद भुआड़ के नाम से एक फर्जी बैंक एकाउंट खोला और इसमें 60 लाख रुपये मुंबई से चेक के जरिए जमा किए गए। तीन से चार दिन में इस राशि को अलग-अलग नाम के व्यक्तियों के हस्ताक्षर कर राशि निकाली गई। एडीजी जोन के हस्तक्षेप के बाद मामले को पुलिस ने संज्ञान में लिया।
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