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पीबीडी की ट्रांसपोर्ट कंपनी के 50 फीसदी बिल पर रोक
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वाराणसी। प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान अतिरिक्त काम की एवज में मनमाने बिलों की कटौती का निर्णय लिया गया है। बृहस्पतिवार को विदेश मंत्रालय में हुई बैठक में ट्रांसपोर्ट कंपनी केटीसी के 50 फीसदी बिलों के भुगतान पर रोक लगा दी गई। इन बिलों का दोबारा सत्यापन किया जाएगा और गुणवत्ता की भी जांच की जाएगी। इवेंट कंपनी इनकंपास के बिलों में 20 से 50 फीसदी तक कि कटौती की गई है। इसके अलावा एनआरआई विभाग इवेंट कंपनी के बिल और काम की गुणवत्ता भी जांचेगा।
21 से 23 जनवरी तक हुए प्रवासी भारतीय सम्मेलन में तीन कंपनियों से कुछ अतिरिक्त काम कराए गए थे। इन्हीं की आड़ में कंपनियों ने मनमाने बिल शासन को दे दिए। इस पर शासन की ओर से मंडलायुक्त वाराणसी दीपक अग्रवाल की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई। बृहस्पतिवार देर शाम हुई बैठक में टेंट सिटी के बिलों के भुगतान पर सहमति बन गई। ट्रांसपोर्ट कंपनी को 50 फीसदी भुगतान किया जाएगा। बाकी के भुगतान से पहले सभी बिल की दोबारा जांच गुणवत्ता के आधार पर की जाएगी। इवेंट कंपनी को 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। बिलों में कटौती के बाद छह करोड़ रुपये के बिल भुगतान का निर्णय हुआ है।
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि ट्रांसपोर्ट कंपनी के 189 वाहनों को सत्यापित किया गया है। इवेंट कंपनी के बिलों को तीन भागों में विभाजित किया गया है। उसकी जांच एनआरआई विभाग करेगा। कंपनियों को बिल के कुछ हिस्से का भुगतान विदेश मंत्रालय से कराया जा रहा है। इस मामले में जांच के बाद अंतिम निर्णय होगा।
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21 से 23 जनवरी तक हुए प्रवासी भारतीय सम्मेलन में तीन कंपनियों से कुछ अतिरिक्त काम कराए गए थे। इन्हीं की आड़ में कंपनियों ने मनमाने बिल शासन को दे दिए। इस पर शासन की ओर से मंडलायुक्त वाराणसी दीपक अग्रवाल की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई। बृहस्पतिवार देर शाम हुई बैठक में टेंट सिटी के बिलों के भुगतान पर सहमति बन गई। ट्रांसपोर्ट कंपनी को 50 फीसदी भुगतान किया जाएगा। बाकी के भुगतान से पहले सभी बिल की दोबारा जांच गुणवत्ता के आधार पर की जाएगी। इवेंट कंपनी को 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। बिलों में कटौती के बाद छह करोड़ रुपये के बिल भुगतान का निर्णय हुआ है।
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मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि ट्रांसपोर्ट कंपनी के 189 वाहनों को सत्यापित किया गया है। इवेंट कंपनी के बिलों को तीन भागों में विभाजित किया गया है। उसकी जांच एनआरआई विभाग करेगा। कंपनियों को बिल के कुछ हिस्से का भुगतान विदेश मंत्रालय से कराया जा रहा है। इस मामले में जांच के बाद अंतिम निर्णय होगा।
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