{"_id":"5ce30c3bbdec22076c4ed626","slug":"155838372720-varanasi-news174","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुरान की आयतें सुनकर रोजेदारों ने उठाया फैज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुरान की आयतें सुनकर रोजेदारों ने उठाया फैज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। मुकद्दस रमजान के महीने में इफ्तार दावत के साथ ही शबीने का दौर भी शुरू हो गया है। शहर भर में शबीने में पाक कुरान की आयतें गूंजी और कुरान की आयतें सुनकर रोजेदारों ने फैज उठाया। शाम को जैसे ही इफ्तारी का समय हुआ और अजान की सदाएं गूंजी तो रोजेदारों ने दस्तरखान पर इफ्तारी की। शहर में कई स्थानों पर इफ्तारी के दौरान गंगा जमुनी तहजीब का नजारा देखने को मिला।
हाफिज नसीम अहमद बशीरी की कयादत में शहर भर में शबीने में कुरान की आयतें गूंजी। कुंदन शहीद में हाजी मो. हनीफ, चौहट्टालाल खान में राजू कुरैशी, मुश्ताक अहमद, अनार का बाग में शमीम बिल्टीवाले, हुकुलगंज में मो. अलीम, पड़ाव में मौलाना हाशिम, पठानी टोला में गूड्डू, दालमंडी में शानू, मकबूल आलम रोड स्थित हाजी अब्दुल रशीद के दौलतखाने व अनारबाग में हाजी अब्दुल अजीम के यहां शबीना हुआ।
20 रमजान से ईद का चांद होने तक मोमिनीन मस्जिद में खुद को अल्लाह के लिए वक्फ कर देते हैं जिसका नाम एतेकाफ है। एतेकाफ सुन्नते कैफ ाया है यानी मुहल्ले का कोई एक भी बैठ गया तो पूरा मोहल्ला बरी, अगर किसी ने नहीं रखा तो पूरा मोहल्ला गुनहगार होगा और पूरे मोहल्ले पर अजाब नाजिल होगा। हाजी इमरान अहमद कहते हैं कि रमजान में एतेकाफ रखना जरूरी है। एतेकाफ नबी की सुन्नतों में से एक है। एतेकाफ का लफ्जी मायने, अल्लाह की इबादत में बैठना या खुद को अल्लाह की इबादत के लिए वक्फ कर देना है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाफिज नसीम अहमद बशीरी की कयादत में शहर भर में शबीने में कुरान की आयतें गूंजी। कुंदन शहीद में हाजी मो. हनीफ, चौहट्टालाल खान में राजू कुरैशी, मुश्ताक अहमद, अनार का बाग में शमीम बिल्टीवाले, हुकुलगंज में मो. अलीम, पड़ाव में मौलाना हाशिम, पठानी टोला में गूड्डू, दालमंडी में शानू, मकबूल आलम रोड स्थित हाजी अब्दुल रशीद के दौलतखाने व अनारबाग में हाजी अब्दुल अजीम के यहां शबीना हुआ।
विज्ञापन
20 रमजान से ईद का चांद होने तक मोमिनीन मस्जिद में खुद को अल्लाह के लिए वक्फ कर देते हैं जिसका नाम एतेकाफ है। एतेकाफ सुन्नते कैफ ाया है यानी मुहल्ले का कोई एक भी बैठ गया तो पूरा मोहल्ला बरी, अगर किसी ने नहीं रखा तो पूरा मोहल्ला गुनहगार होगा और पूरे मोहल्ले पर अजाब नाजिल होगा। हाजी इमरान अहमद कहते हैं कि रमजान में एतेकाफ रखना जरूरी है। एतेकाफ नबी की सुन्नतों में से एक है। एतेकाफ का लफ्जी मायने, अल्लाह की इबादत में बैठना या खुद को अल्लाह की इबादत के लिए वक्फ कर देना है।
विज्ञापन