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15 से 25 साल के लोग भी हो रहे मनोरोगी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 10 Oct 2016 01:45 AM IST
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mental
- फोटो : boredpanda
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मनोरोगियों की संख्या ही नहीं बढ़ रही है, बल्कि इसकी चपेट में आने वालों में युवाओं की संख्या भी बढ़ती जा रही है। मनोचिकित्सक इसका कारण पारिवारिक कलह और डिप्रेशन मानते हैं। उनका कहना है कि पहले 25-30 साल से अधिक आयु के लोगों पर यह बीमारी हावी होती थी, पिछले कुछ समय से 15 से 25 साल के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है।
मनोरोगियों की बढ़ती संख्या का प्रमाण यह है कि स्थानीय मानसिक रोग अस्पताल की ओपीडी में पूर्वांचल से हर दिन कमोवेश 500 मरीज आते हैं, जिसमें 100 से अधिक युवा शामिल हैं। 330 बेड के इस अस्पताल के सभी वार्ड फुल हैं। इसमें भी 100 मरीज 30 साल से कम उम्र वाले हैं। मरीजों की तेजी से बढ़ती जा रही संख्या को देखते हुए ओपीडी में जांच के बाद चिकित्सक गंभीर मरीजों को ही भर्ती करते हैं। बीएचयू अस्पताल की ओपीडी में भी मनोरोगियों की भीड़ रहती है। यहां कुछ चिकित्सक देर शाम तक ओपीडी में मरीज देखते हैं।
वाराणसी अस्पताल में एक निदेशक समेत सात मनोचिकित्सकों के पद है लेकिन इस समय केवल तीन चिकित्सक कार्यरत हैं। यही नहीं, दीनदयाल और मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में लंबे समय से मानसिक रोग विशेषज्ञ नहीं हैं।
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मनोरोगियों की बढ़ती संख्या का प्रमाण यह है कि स्थानीय मानसिक रोग अस्पताल की ओपीडी में पूर्वांचल से हर दिन कमोवेश 500 मरीज आते हैं, जिसमें 100 से अधिक युवा शामिल हैं। 330 बेड के इस अस्पताल के सभी वार्ड फुल हैं। इसमें भी 100 मरीज 30 साल से कम उम्र वाले हैं। मरीजों की तेजी से बढ़ती जा रही संख्या को देखते हुए ओपीडी में जांच के बाद चिकित्सक गंभीर मरीजों को ही भर्ती करते हैं। बीएचयू अस्पताल की ओपीडी में भी मनोरोगियों की भीड़ रहती है। यहां कुछ चिकित्सक देर शाम तक ओपीडी में मरीज देखते हैं।
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वाराणसी अस्पताल में एक निदेशक समेत सात मनोचिकित्सकों के पद है लेकिन इस समय केवल तीन चिकित्सक कार्यरत हैं। यही नहीं, दीनदयाल और मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में लंबे समय से मानसिक रोग विशेषज्ञ नहीं हैं।
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