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डीएम ने वीडीए अधिकारियों को किया तलब
Updated Sun, 25 Jun 2017 01:51 AM IST
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वाराणसी। आईपी मॉल में आग की घटना के दौरान तमाम खामियां उजागर होने के बाबत डीएम योगेश्वर राम मिश्रा ने शनिवार को विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को तलब किया। प्राधिकरण के अधिकारियों से माल का नक्शा पास कराने से लेकर अन्य सभी पत्रावलियों की जांच करने को कहा। खासकर बेसमेंट के व्यावसायिक उपयोग पर सख्ती बरतने की हिदायत दी। कहा कि इन सभी बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट दें। वीडीए की रिपोर्ट मिलने के बाद इस मामले में कार्रवाई होगी।
मॉल के बेसमेंट का उपयोग पार्किंग के साथ ही गोदाम के रूप में किया जाता है। शुक्रवार को बेसमेंट में बने कपड़ा शोरूम ग्लोबस के गोदाम में आग लगी थी। तब मौके पर पहुंचे अग्निशमन और पुलिस के अधिकारियों ने पाया कि मॉल के अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध नहीं थे। हाईड्रेंट और अन्य उपकरण ठीक से काम नहीं कर रहे थे।
अब आईपी मॉल की घटना सबक लेते हुए पुलिस और प्रशासन शहर में अन्य सभी मॉल की भी जांच-पड़ताल करवाने की तैयारी में है। शहर में आईपी सिगरा के अलावा आईपी विजया, पीडीआर, जेएचवी माल एवं केसीएम संचालित होते हैं। प्रशासन तक शिकायत पहुंची है कि ज्यादातर माल में सुरक्षा संबंधी उपकरण दुरुस्त नहीं हैं। मॉल के कर्मचारियों को आग बुझाने और उपकरण संचालित करने का कोई मुकम्मल प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। दरअसल पुलिस, फायर बिग्रेड और प्रशासन की भी समय-समय पर माल की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। ये टीमें भी जांच नहीं करती और किसी हादसे के बाद ही जागती हैं। कुछ दिनों तक कागजी घोड़े दौड़ते हैं और फिर सब ठंडा पड़ जाता है।
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मॉल के बेसमेंट का उपयोग पार्किंग के साथ ही गोदाम के रूप में किया जाता है। शुक्रवार को बेसमेंट में बने कपड़ा शोरूम ग्लोबस के गोदाम में आग लगी थी। तब मौके पर पहुंचे अग्निशमन और पुलिस के अधिकारियों ने पाया कि मॉल के अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध नहीं थे। हाईड्रेंट और अन्य उपकरण ठीक से काम नहीं कर रहे थे।
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अब आईपी मॉल की घटना सबक लेते हुए पुलिस और प्रशासन शहर में अन्य सभी मॉल की भी जांच-पड़ताल करवाने की तैयारी में है। शहर में आईपी सिगरा के अलावा आईपी विजया, पीडीआर, जेएचवी माल एवं केसीएम संचालित होते हैं। प्रशासन तक शिकायत पहुंची है कि ज्यादातर माल में सुरक्षा संबंधी उपकरण दुरुस्त नहीं हैं। मॉल के कर्मचारियों को आग बुझाने और उपकरण संचालित करने का कोई मुकम्मल प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। दरअसल पुलिस, फायर बिग्रेड और प्रशासन की भी समय-समय पर माल की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। ये टीमें भी जांच नहीं करती और किसी हादसे के बाद ही जागती हैं। कुछ दिनों तक कागजी घोड़े दौड़ते हैं और फिर सब ठंडा पड़ जाता है।
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