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2800 किसानों को घोषित कर दिया अपात्र
Updated Tue, 10 Apr 2018 01:16 AM IST
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ज्ञानपुर। प्रदेश सरकार की ऋणमाफी योजना के क्रियान्वयन में लेखपालों ने खूब मनमानी की है, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। तीनों चरणों में हुए सर्वे में लेखपालों गलत रिपोर्ट के कारण जिले के ढाई हजार से अधिक किसान ऋणमाफी के लाभ से वंचित हो गए हैं। ऐसे किसानों ने जब कृषि विभाग के पोर्टल में अपनी शिकायतें दर्ज कराने के साथ ऋणमाफी के लिए आवेदन किया तो सच्चाई सामने आई है।
प्रदेश में सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों का एक-एक लाख तक का ऋण माफ करने का एलान किया था। इसके लिए जिले के करीब 22 हजार किसान चिह्नित किए गए थे। लेखपालों ने सत्यापन किया तो 50 फीसदी से अधिक यानी 12 हजार किसान पात्रता से बाहर हो गए। इसके बाद तीन चरणों में करीब 10 हजार किसानों को योजना का लाभ मिल पाया। पात्र होने के बाद भी बड़ी संख्या में किसान जब लाभ से वंचित रह गए तो इसका विरोध प्रदेश स्तर पर होने लगा। शासन ने ऐसे किसानों से दोबारा कृषि विभाग के पोर्टल पर आवेदन मांगे। 15 अप्रैल तक किसानों को आवेदन करना है। अब पोर्टल पर आ रहीं शिकायतों और आवेदनों से लेखपालों के सत्यापन की पोल खुल रही है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार तीनों चरणों में हुए सत्यापन में लेखपालों ने जिले के 2800 किसानों को यह कहकर बाहर कर दिया था कि संबंधित किसान मिले नहीं या है हीं नहीं। सूत्रों का कहना है कि जिन किसानों से लेखपालों को सुविधा शुल्क नहीं मिली, उन्हें ऋणमाफी की फेहरिस्त से उन्होंने गायब कर दिया। दूसरी बार आवेदन के बाद ऐसे लोगों को लाभान्वित करने की कवायद चल रही है। यही नहीं, बैंकों की लापरवाही से भी बहुत से किसान योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं। अब वे भी पोर्टल पर आवेदन कर रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि 15 अप्रैल तक आवेदन आने के बाद ऋणमाफी के लिए शासन से बजट मांगा जाएगा।
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प्रदेश में सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों का एक-एक लाख तक का ऋण माफ करने का एलान किया था। इसके लिए जिले के करीब 22 हजार किसान चिह्नित किए गए थे। लेखपालों ने सत्यापन किया तो 50 फीसदी से अधिक यानी 12 हजार किसान पात्रता से बाहर हो गए। इसके बाद तीन चरणों में करीब 10 हजार किसानों को योजना का लाभ मिल पाया। पात्र होने के बाद भी बड़ी संख्या में किसान जब लाभ से वंचित रह गए तो इसका विरोध प्रदेश स्तर पर होने लगा। शासन ने ऐसे किसानों से दोबारा कृषि विभाग के पोर्टल पर आवेदन मांगे। 15 अप्रैल तक किसानों को आवेदन करना है। अब पोर्टल पर आ रहीं शिकायतों और आवेदनों से लेखपालों के सत्यापन की पोल खुल रही है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार तीनों चरणों में हुए सत्यापन में लेखपालों ने जिले के 2800 किसानों को यह कहकर बाहर कर दिया था कि संबंधित किसान मिले नहीं या है हीं नहीं। सूत्रों का कहना है कि जिन किसानों से लेखपालों को सुविधा शुल्क नहीं मिली, उन्हें ऋणमाफी की फेहरिस्त से उन्होंने गायब कर दिया। दूसरी बार आवेदन के बाद ऐसे लोगों को लाभान्वित करने की कवायद चल रही है। यही नहीं, बैंकों की लापरवाही से भी बहुत से किसान योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं। अब वे भी पोर्टल पर आवेदन कर रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि 15 अप्रैल तक आवेदन आने के बाद ऋणमाफी के लिए शासन से बजट मांगा जाएगा।
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