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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी चार करोड़ की योजना
Updated Sun, 08 Apr 2018 01:24 AM IST
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ज्ञानपुर। कार्यदायी संस्था की लापरवाही से अभोली ब्लॉक में चार करोड़ की परियोजना अधर में लटक गई है। 10 साल से चल रहे सीएचसी भवन निर्माण में करीब दो साल से एक ईंट भी नहीं जोड़ी गई। 2008 में स्वीकृत इस परियोजना में अब तक महज 60 फीसदी काम ही हो सका है। प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए शासन को पत्र लिखा है। क्या वित्तीय अनियमितता की गई है, इसका लेखा-जोखा तैयार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस मामले में कार्यदायी संस्था के कुछ अफसरों पर कार्रवाई की गाज भी गिर सकती है।
शिक्षा, स्वास्थ्य एवं बिजली विकास की अहम कड़ी होती हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से इस पर विशेष फोकस रहता है। सरकार की ओर से तमाम योजनाएं संचालित की जाती हैं, लेकिन कार्यदायी संस्थाओं की मनमानी से वह अधूरी ही रह जाती हैं। जिले में सबसे अधिक परियोजनाएं स्वास्थ्य विभाग की लंबित हैं। करीब 15 से 16 करोड़ की लागत से बन रहे 100 शैय्या का अस्पताल जहां अब तक पूर्ण नहीं हो सका है, वहीं सीएचसी अभोली में वर्ष 2008 में चार करोड़ की शुरुआती लागत वाले सीएचसी का निर्माण भी पूर्ण नहीं हो सका। देरी के चलते परियोजना की लागत बढ़ती जा रही है। जिले के अति पिछड़े ब्लॉकों में शामिल अभोली ब्लॉक में स्वास्थ्य सुविधाओं घोर अभाव है। इसे बेहतर करने के लिए 2008 में चार करोड़ की लागत वाले सीएचसी निर्माण को स्वीकृति मिली। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। करीब एक दशक का समय गुजरने को है, लेकिन अब तक केवल 60 फीसदी काम ही पूरा हो सका है। खास बात यह है कि गत दो साल से इस पर एक ईंट भी नहीं रखी गई। अभोली गांव निवासी नन्हेलाल ने आईजीआरएस के माध्यम से मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को भेजकर शिकायत की। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सतीश सिंह ने कहा कि 100 शैय्या वाले अस्पताल की तरह अभोली सीएचसी में भी वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई है। कार्यदायी संस्था को कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन उसका निर्माण शुरू नहीं किया जा रहा है। इसकी शिकायत शासन स्तर पर की गई है।
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शिक्षा, स्वास्थ्य एवं बिजली विकास की अहम कड़ी होती हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से इस पर विशेष फोकस रहता है। सरकार की ओर से तमाम योजनाएं संचालित की जाती हैं, लेकिन कार्यदायी संस्थाओं की मनमानी से वह अधूरी ही रह जाती हैं। जिले में सबसे अधिक परियोजनाएं स्वास्थ्य विभाग की लंबित हैं। करीब 15 से 16 करोड़ की लागत से बन रहे 100 शैय्या का अस्पताल जहां अब तक पूर्ण नहीं हो सका है, वहीं सीएचसी अभोली में वर्ष 2008 में चार करोड़ की शुरुआती लागत वाले सीएचसी का निर्माण भी पूर्ण नहीं हो सका। देरी के चलते परियोजना की लागत बढ़ती जा रही है। जिले के अति पिछड़े ब्लॉकों में शामिल अभोली ब्लॉक में स्वास्थ्य सुविधाओं घोर अभाव है। इसे बेहतर करने के लिए 2008 में चार करोड़ की लागत वाले सीएचसी निर्माण को स्वीकृति मिली। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। करीब एक दशक का समय गुजरने को है, लेकिन अब तक केवल 60 फीसदी काम ही पूरा हो सका है। खास बात यह है कि गत दो साल से इस पर एक ईंट भी नहीं रखी गई। अभोली गांव निवासी नन्हेलाल ने आईजीआरएस के माध्यम से मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को भेजकर शिकायत की। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सतीश सिंह ने कहा कि 100 शैय्या वाले अस्पताल की तरह अभोली सीएचसी में भी वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई है। कार्यदायी संस्था को कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन उसका निर्माण शुरू नहीं किया जा रहा है। इसकी शिकायत शासन स्तर पर की गई है।
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