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ढाई महीने बाद भी पूरी नहीं हो पाई प्रशासन की मजिस्ट्रियल जांच
Updated Sun, 29 Jul 2018 02:12 AM IST
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वाराणसी। फ्लाईओवर हादसे में क्राइम ब्रांच की कार्रवाई के बाद प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लहरतारा चौकाघाट फ्लाईओवर हादसे के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे। तीन दिन में पूरी होने वाली जांच ढाई महीने बाद भी पूरी नहीं हो पाई। आलम यह है कि मजिस्ट्रियल जांच को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
15 मई को लहरतारा फ्लाईओवर की बीम गिरने से हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अलग अलग जांच कमेटी गठित की। तत्कालीन जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने भी मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे और अपर जिलाधिकारी वित्त मनोज कुमार राय को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। अस्पताल में घायलों और सेतु निगम के अधिकारियों का बयान लेने के बाद जांच को रोक दिया गया। एडीएम ने जांच को पूरा करने के लिए 15 दिन का समय मांगा। इसके बाद जांच में आगे कुछ नही ंकिया गया। यही कारण है कि ढाई महीने बाद भी जांच ना सिर्फ अधूरी है, बल्कि उसमें कुछ किया भी नहीं जा रहा है। उधर, जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह का कहना है कि जांच के संबन्ध में जानकारी की जाएगी।
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15 मई को लहरतारा फ्लाईओवर की बीम गिरने से हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अलग अलग जांच कमेटी गठित की। तत्कालीन जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने भी मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे और अपर जिलाधिकारी वित्त मनोज कुमार राय को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। अस्पताल में घायलों और सेतु निगम के अधिकारियों का बयान लेने के बाद जांच को रोक दिया गया। एडीएम ने जांच को पूरा करने के लिए 15 दिन का समय मांगा। इसके बाद जांच में आगे कुछ नही ंकिया गया। यही कारण है कि ढाई महीने बाद भी जांच ना सिर्फ अधूरी है, बल्कि उसमें कुछ किया भी नहीं जा रहा है। उधर, जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह का कहना है कि जांच के संबन्ध में जानकारी की जाएगी।
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