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तथागत के पवित्र अस्थि अवशेषों के दर्शन होंगे श्रीलंका में 0
Updated Sun, 29 Apr 2018 02:36 AM IST
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वाराणसी। बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष श्रीलंका में बौद्ध मतावलंबियों के लिए उपलब्ध रहेंगे। पहली बार श्रीलंका में तथागत के अस्थि अवशेषों को तीन मई तक राष्ट्रपति आवास पर आम दर्शनार्थियों के लिए रखा जाएगा। श्रीलंका सरकार के विशेष आग्रह पर शनिवार को महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया के महासचिव के निर्देशन में बौद्ध भिक्षु तथागत के पवित्र अवशेष को लेकर श्रीलंका के लिए रवाना हो गए। विशेष सुरक्षा दस्ते के साथ काशी से इंडिगो विमान से दिल्ली और फिर वहां से विशेष विमान से श्रीलंका के लिए प्रस्थान कर गए।
शनिवार को महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के महासचिव पी सिबली थेरो, मूलगंध कुटी विहाराधिपति के मेधंकर थेरा सहित बौद्ध भिक्षुओं के संयोजन में प्रात: 5 बजे मूलगंध कुटी विहार में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके बाद बौद्ध भिक्षु भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष लेकर श्रीलंका के लिए रवाना हो गए। श्रीलंका के लाखों अनुयायी भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष कलश का दर्शन तीन मई तक राष्ट्रपति आवास पर कर सकेंगे।
महाबोधि सोसायटी के उपाध्यक्ष प्रो. राममोहन पाठक ने बताया कि इस पवित्र अस्थि के लिए श्री लंका सरकार तथा वहां के बौद्ध संगठनों द्वारा काफी समय से आग्रह किया जा रहा था। इस पर महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया ने भारत सरकार व पुरातत्व विभाग से निवेदन किया। अनुमति मिलने पर उसे आज एक विशेष आयोजन के दौरान श्रीलंका के लिए भेजा गया। इस अवसर पर भन्ते आर. सुमितानन्द थेरो, भन्ते इ. उपरत्न थेरो, बोधगया केन्द्र सहित सारनाथ केन्द्र के अन्य सहायक भिक्षुगण तथा डॉ. एस. के. महापत्रा, दीपक चौधरी समेत पुरातत्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
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कार्तिक पूर्णिम पर मिलता है दर्शन
गौरतलब है कि भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थि को सारनाथ स्थित महाबोधि सोसाइटी के देखरेख में मूलगंध कुटी विहार मंदिर में विशेष सुरक्षा के तहत रखा गया है। जिसे कार्तिक पूर्णिमा पर तीन दिन के लिए मंदिर में दर्शन के लिए रखा जाता है। इस दौरान श्रीलंका सहित विभिन्न बौद्ध देशों के लाखों लोग पवित्र अस्थि कलश का दर्शन पूजन कर अपने को भाग्यशाली मानते हैं। इस दौरान पवित्र अस्थि कलश को लेकर भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाती है।
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शनिवार को महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के महासचिव पी सिबली थेरो, मूलगंध कुटी विहाराधिपति के मेधंकर थेरा सहित बौद्ध भिक्षुओं के संयोजन में प्रात: 5 बजे मूलगंध कुटी विहार में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके बाद बौद्ध भिक्षु भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष लेकर श्रीलंका के लिए रवाना हो गए। श्रीलंका के लाखों अनुयायी भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष कलश का दर्शन तीन मई तक राष्ट्रपति आवास पर कर सकेंगे।
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महाबोधि सोसायटी के उपाध्यक्ष प्रो. राममोहन पाठक ने बताया कि इस पवित्र अस्थि के लिए श्री लंका सरकार तथा वहां के बौद्ध संगठनों द्वारा काफी समय से आग्रह किया जा रहा था। इस पर महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया ने भारत सरकार व पुरातत्व विभाग से निवेदन किया। अनुमति मिलने पर उसे आज एक विशेष आयोजन के दौरान श्रीलंका के लिए भेजा गया। इस अवसर पर भन्ते आर. सुमितानन्द थेरो, भन्ते इ. उपरत्न थेरो, बोधगया केन्द्र सहित सारनाथ केन्द्र के अन्य सहायक भिक्षुगण तथा डॉ. एस. के. महापत्रा, दीपक चौधरी समेत पुरातत्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
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कार्तिक पूर्णिम पर मिलता है दर्शन
गौरतलब है कि भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थि को सारनाथ स्थित महाबोधि सोसाइटी के देखरेख में मूलगंध कुटी विहार मंदिर में विशेष सुरक्षा के तहत रखा गया है। जिसे कार्तिक पूर्णिमा पर तीन दिन के लिए मंदिर में दर्शन के लिए रखा जाता है। इस दौरान श्रीलंका सहित विभिन्न बौद्ध देशों के लाखों लोग पवित्र अस्थि कलश का दर्शन पूजन कर अपने को भाग्यशाली मानते हैं। इस दौरान पवित्र अस्थि कलश को लेकर भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाती है।