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नवजात बच्चों के इलाज में बनारस फिसड्डी0
Updated Wed, 11 Apr 2018 02:16 AM IST
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वाराणसी। स्वास्थ्य विभाग लोगों की सेहत पर चाहे लाख रुपये खर्च करने का दावा कर रहा हो लेकिन इसका कितना लाभ मिल रहा है, इसका पता चल रही योजनाओं की रैकिंग से पता चलता है। पहले टीकाकरण अब नवजात बच्चों के देखरेख के मामले में हुई रैकिंग में बनारस फिसड्डी साबित हुआ। हालत यह है कि बनारस शीर्ष दस जिलों की सूची में शामिल नहीं हो पाया। झांसी मंडल 60 फीसदी लोगों को लाभ पहुंचाकर पहले नंबर पर है जबकि बनारस मंडल का 15वां स्थान है।
यूनिसेफ की ओर से हर तीन माह पर अस्पतालों में बच्चों की सेहत, आशाओं द्वार घर-घर जाकर बच्चों की देखभाल आदि सुविधाओं की राज्य स्तरीय रैकिंग कराई जाती है। जनवरी 2018 से मार्च 2018 तक कराई गई रैकिंग की रिपोर्ट आई है। इसमें आशाओं के साथ ही मंडल में यूनिसेफ की टीम द्वारा देखभाल शामिल रहता है। अब जिला स्तर पर जारी रैकिंग में सहारनपुर मंडल दूसरे, आजमगढ़ तीसरे, आगरा चौथे, फैजाबाद और लखनऊ संयुक्त रुप से दसवां, कानपुर 11वां, इलाहाबाद 12 और बनारस को 15वां स्थान मिला है। इस बारे में सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि नवजात बच्चों की देखभाल के लिए आशाओं को प्रशिक्षण दिया दिया जाता है। जिले का रैंक सुधरे इसके लिए आशाओं को निर्देशित किया जाएगा कि लापरवाही न करें।
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यूनिसेफ की ओर से हर तीन माह पर अस्पतालों में बच्चों की सेहत, आशाओं द्वार घर-घर जाकर बच्चों की देखभाल आदि सुविधाओं की राज्य स्तरीय रैकिंग कराई जाती है। जनवरी 2018 से मार्च 2018 तक कराई गई रैकिंग की रिपोर्ट आई है। इसमें आशाओं के साथ ही मंडल में यूनिसेफ की टीम द्वारा देखभाल शामिल रहता है। अब जिला स्तर पर जारी रैकिंग में सहारनपुर मंडल दूसरे, आजमगढ़ तीसरे, आगरा चौथे, फैजाबाद और लखनऊ संयुक्त रुप से दसवां, कानपुर 11वां, इलाहाबाद 12 और बनारस को 15वां स्थान मिला है। इस बारे में सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि नवजात बच्चों की देखभाल के लिए आशाओं को प्रशिक्षण दिया दिया जाता है। जिले का रैंक सुधरे इसके लिए आशाओं को निर्देशित किया जाएगा कि लापरवाही न करें।
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