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राजेंद्र प्रसाद घाट पर ‘चौकीदार’ के नाम समर्पित रहा महामूर्ख मेला

Tue, 02 Apr 2019 01:59 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 02 Apr 2019 01:59 AM IST
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राजेंद्र प्रसाद घाट पर ‘चौकीदार’ के नाम समर्पित रहा महामूर्ख मेला
वाराणसी । बहना यूपी में तैयार भैया केरल हुआ फ रार, हाथी साइकिल हुई सवार होगा किस का बंटाधार चना जोर गरम, चना जोर गरम, बाबू चबाए चौकीदार चना जोर गरम... । राजेंद्र प्रसाद घाट पर यह कविता पश्चिमी चंपारण की कवयित्री शीलू पांडेय ‘उमरान’ ने सुनाई तो ठहाकों की गूंज गंगा उस पार तक पहुंची।
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शनिवार गोष्ठी संस्था की ओर से सोमवार की रात आयोजित महामूर्ख मेला की शुरुआत गर्दभ ध्वनि से हुई। मानव जीवन की सबसे बड़ी मूर्खता को मानते हुए समाजसेवी अजय पांडे को दुल्हन और पिंकी पांडे को दूल्हा बनाकर गड़बड़ वेद मंत्रों से उनका विवाह कराया गया। इसके कुछ समय बाद ही मंच पर ही छुट्टम-छुट्टा हो गया। इस अनोखी शादी में नाउन की भूमिका युवा कवि अनुराग सागर ने निभाई।
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कार्यक्रम की शुरुआत राजस्थानी लोक नृत्य घूमर की प्रस्तुति हुई। कार्यक्रम में सभी अतिथियों का स्वागत गले में लंगोट पहनाकर और हाथ में वाइपर व बच्चों का झुनझुना देकर किया गया। इस बार के कविता पाठ का पूरा केंद्र चौकीदार रहा। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति सांड बनारसी ने दी। कहा कि ‘एक नया अभियान चलाकर हर कोई यहां चौकीदारी करेगा, सारी फ सल चर जाएगा... सांड़ जो खेतों की चौकीदारी करेगा...’ सुनाकर लोगों को खूब गुदगुदाया। हाथरस से आए सरबस मूरसानी ने ‘मन का अच्छा हूं दिल का वफ ादार हूं कोई गड़बड़ी ना होगी सच्चा चौकीदार हूं...’। गाजीपुर से आए अवधेश मिश्रा की ‘बिना नियुक्ति सभी चौकीदार हो गए, नामदार कामदार के शिकार हो गए, आया खाते में अब तक नहीं 15 लाख... 72 हजार सुनकर सब बीमार हो गए...’ कविता ने लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
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दमदार बनारसी ने दमदार कविता प्रस्तुत करते हुए ‘देशभक्त गद्दार हो गए, गिरहकट्ट लाचार हो गए, जितने भी बेरोजगार बन फेसबुक पर बैठे थे ऐसी हवा चली की सभी चौकीदार हो गए...’ सुनाकर खूब तालियां बटोरी। अहरौरा से आए नरसिंह साहसी ने कहा कि ‘मूस के बिल में घुसा पानी... निकले सब मक्कार कहते चौकीदार...’ सुनाया। उस समय लोग हंस हंस कर लोटपोट हो गए जब प्रयागराज के अखिलेश द्विवेदी मंच पर पहुंचे। उन्होंने राजनीतिक उठापटक से लेकर हर चीज को कविताओं में बांधा और अंत में उन्होंने अपना समापन ‘होली खेले गुरमीत डेरा बीच होली खेले... रंग लगा लगावे हनीप्रीत डेरा बीच रंग लगावे हनीप्रीत....’ सुना कर सभी को लोटपोट कर दिया। कार्यक्रम में अध्यक्ष जगदंबा तुलस्यान, श्याम लाल यादव, मंजीत त्रिपाठी, आनंद मिश्र उपस्थित रहे। संचालन दमदार बनारसी ने और धन्यवाद ज्ञापन सचिव पंडित सुदामा तिवारी उर्फ सांड़ बनारसी ने किया।
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