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शहर की हवा में 17 गुना अधिक घुला जहर
Updated Sat, 10 Nov 2018 01:44 AM IST
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वाराणसी। दीवाली की रात पटाखों से शहर की हवा में 17 गुना अधिक जहर घुल गया। शाम से शुरू हुई आतिशबाजी पूरी रात चली। शहर का सर्वाधिक हरियाली वाला इलाका डीएलडब्ल्यू और लंका की हवा दिवाली की रात सबसे अधिक प्रदूषित रही। सांस, दमा व हृदय रोगियों को परेशानियों का सामना अलग से करना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराने में भी प्रशासन विफल रहा। क्लाइमेट एजेंडा की ओर से दीपावाली पर शहर में 20 अलग अलग इलाकों में वायु गुणवत्ता की निगरानी की गई। दीपावली की रात शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 628 रहा, जो कि पिछले साल से करीब करीब दोगुना बदतर स्थिति का संकेत था। पिछले साल एक्यूआई 338 दर्ज किया गया था। इसबार पीएम 10 का स्तर 628 और पीएम 2.5 का स्तर दीपावली की रात 443 तक पहुंच गया।
क्लाइमेट एजेंडा की मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर ने बताया कि वायु प्रदूषण की वर्तमान स्थिति की आशंका पहले से होते हुए भी विभाग की ओर से कोई निर्देश जारी नहीं किए गए। वायु प्रदूषण के गंभीर खतरों से बचने के लिए प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
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सीओपीडी विशेषज्ञ व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आरएन वाजपेयी के अनुसार बारूद, कोयला, डीजल, पेट्रोल व कूड़ा जलने से पीएम 2.5 कणों का निर्माण होता है। इनका मानव स्वास्थ्य पर खतरनाक असर पड़ता है। पीएम 2.5 के कण सीधा हमारी फेफड़े पर हमला करते हैं और हृदयाघात, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक का खतरा होता है। पीएम 10 के कणों से त्वचा की बीमारियां, एलर्जी आदि के केस बढ़ते हैं।
सर्वर के चलते हुई समस्या
दीपावली के दिन प्रदूषण नियंत्रण इकाई की ओर से शहर के पांच क्षेत्राें में लगाई गई मशीनों ने तो काम किया लेकिन वेबसाइट पर इसका कोई अपडेट नहीं मिला। सीपीसीबी की वेबसाइट पर देश के कई शहराें के एक्यूआई अपडेट रहा लेकिन अपने शहर का एक्यूआई नहीं मिला। इस बारे में प्रदूषण नियंत्रण इकाई के क्षेत्रीय अधिकारी के आनंद का कहना था कि सर्वर की वजह से यह समस्या आई।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराने में भी प्रशासन विफल रहा। क्लाइमेट एजेंडा की ओर से दीपावाली पर शहर में 20 अलग अलग इलाकों में वायु गुणवत्ता की निगरानी की गई। दीपावली की रात शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 628 रहा, जो कि पिछले साल से करीब करीब दोगुना बदतर स्थिति का संकेत था। पिछले साल एक्यूआई 338 दर्ज किया गया था। इसबार पीएम 10 का स्तर 628 और पीएम 2.5 का स्तर दीपावली की रात 443 तक पहुंच गया।
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क्लाइमेट एजेंडा की मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर ने बताया कि वायु प्रदूषण की वर्तमान स्थिति की आशंका पहले से होते हुए भी विभाग की ओर से कोई निर्देश जारी नहीं किए गए। वायु प्रदूषण के गंभीर खतरों से बचने के लिए प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
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सीओपीडी विशेषज्ञ व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आरएन वाजपेयी के अनुसार बारूद, कोयला, डीजल, पेट्रोल व कूड़ा जलने से पीएम 2.5 कणों का निर्माण होता है। इनका मानव स्वास्थ्य पर खतरनाक असर पड़ता है। पीएम 2.5 के कण सीधा हमारी फेफड़े पर हमला करते हैं और हृदयाघात, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक का खतरा होता है। पीएम 10 के कणों से त्वचा की बीमारियां, एलर्जी आदि के केस बढ़ते हैं।
सर्वर के चलते हुई समस्या
दीपावली के दिन प्रदूषण नियंत्रण इकाई की ओर से शहर के पांच क्षेत्राें में लगाई गई मशीनों ने तो काम किया लेकिन वेबसाइट पर इसका कोई अपडेट नहीं मिला। सीपीसीबी की वेबसाइट पर देश के कई शहराें के एक्यूआई अपडेट रहा लेकिन अपने शहर का एक्यूआई नहीं मिला। इस बारे में प्रदूषण नियंत्रण इकाई के क्षेत्रीय अधिकारी के आनंद का कहना था कि सर्वर की वजह से यह समस्या आई।