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गैर इरादतन हत्या में सात साल की कैद
Updated Wed, 18 Apr 2018 01:08 AM IST
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ज्ञानपुर। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गैर इरादतन हत्या के दोषी को सात वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। तीन साल पुराने मामले की सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाया।
घटना के मुताबिक 26 अप्रैल 2015 को ज्ञानपुर कोतवाली क्षेत्र के खरगपुर गांव निवासी गुड्डू शर्मा ने आरोप लगाया था कि उसके पिता राधेश्याम शर्मा (मृतक) अमवां जीटी रोड पर एक गुमटी में सैलून का काम करते थे। वहीं पर आरोपी श्याम सुंदर शर्मा भी सैलून चलाता था। 25 अप्रैल को मेरे पिता राधेश्याम शर्मा से श्यामसुंदर शर्मा का विवाद 20 हजार के लेनदेन में हो गया था। उसी विवाद से श्याम सुंदर शर्मा ने मेरे पिता को ईंट से सिर और शरीर में मारापीटा। इस चोट से उनकी मौत हो गई। सुबह सूचना मिलने पर पहुंचा तो मेरे पिता मरे पड़े थे। मेरे पिता की मौत श्याम सुंदर शर्मा के मारने से हुई। गोपीगंज थाना ने आरोपी के विरुद्ध आईपीसी की धारा 304 के तहत आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था। जहां दोनों पक्षों के गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद न्यायाधीश मृदुल कुमार मिश्र की अदालत ने दोषी श्याम सुंदर शर्मा को सात वर्ष सश्रम कारावास और पांच हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष से बहस-पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता सुधाकर पांडेय ने की।
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घटना के मुताबिक 26 अप्रैल 2015 को ज्ञानपुर कोतवाली क्षेत्र के खरगपुर गांव निवासी गुड्डू शर्मा ने आरोप लगाया था कि उसके पिता राधेश्याम शर्मा (मृतक) अमवां जीटी रोड पर एक गुमटी में सैलून का काम करते थे। वहीं पर आरोपी श्याम सुंदर शर्मा भी सैलून चलाता था। 25 अप्रैल को मेरे पिता राधेश्याम शर्मा से श्यामसुंदर शर्मा का विवाद 20 हजार के लेनदेन में हो गया था। उसी विवाद से श्याम सुंदर शर्मा ने मेरे पिता को ईंट से सिर और शरीर में मारापीटा। इस चोट से उनकी मौत हो गई। सुबह सूचना मिलने पर पहुंचा तो मेरे पिता मरे पड़े थे। मेरे पिता की मौत श्याम सुंदर शर्मा के मारने से हुई। गोपीगंज थाना ने आरोपी के विरुद्ध आईपीसी की धारा 304 के तहत आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया था। जहां दोनों पक्षों के गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद न्यायाधीश मृदुल कुमार मिश्र की अदालत ने दोषी श्याम सुंदर शर्मा को सात वर्ष सश्रम कारावास और पांच हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष से बहस-पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता सुधाकर पांडेय ने की।
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