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छात्र जीवन एक तपस्या का जीवन : राम नाईक
Updated Sat, 20 Jan 2018 02:12 AM IST
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बड़ागांव (वाराणसी)। क्षेत्र के बलदेव पीजी कॉलेज में शुक्रवार को वैदिक शिक्षा परिषद के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर तीन दिवसीय शत वार्षिक समारोह का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन करते हुए राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि छात्र जीवन एक तपस्या का जीवन है। उन्होंने अपने गुरुजी के बताए चार मंत्र का जिक्र करते हुए छात्रों को इसे अमल में लाने की सलाह दी।
राज्यपाल ने पहला मंत्र बताया कि सभी को मुस्कुराते रहना चाहिए। इससे आत्म संतुष्टि मिलती है और अच्छा वातावरण मिलता है। दूसरे मंत्र में कहा कि कोई अच्छा करे तो उसे प्रोत्साहित करें। इससे वह आगे और अच्छा करेगा। तीसरे मंत्र में कहा कि कमजोर या कम अंक पाने वाले की अवहेलना न करें। चौथे मंत्र में कहा कि बेहतर करने की कोशिश करेें। राज्यपाल ने पढ़ाई के साथ खेलने की सलाह दी। साथ ही कहा कि किताबी कीड़ा न बनें।
खुद को भाग्यशाली मानता हूं की बड़ागांव बलदेव वैद्य जी की मातृभूमि पर आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बलदेव वैद्य जी ने लगभग सौ वर्ष पूर्व वैदिक शिक्षा परिषद का गठन कर अपनी दूरदर्शिता को साबित किया था। जिस समय इस परिषद का गठन हुआ उस वक्त यह परिषद पौधे के रूप में था आज विशाल वट वृक्ष के रूप में है। उन्होंने इसके लिए परिषद के सचिव व कालेज के प्रबंधक डॉ एस डी अग्रवाल को धन्यवाद दिया।
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कॉलेज के प्रबंधक डॉ. एस डी अग्रवाल व सचिव वैदिक शिक्षा परिषद ने कहा कि राज्यपाल के आगमन से खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। इसके लिए कॉलेज परिवार आजीवन ऋणी रहेगा। काशी विद्यापीठ के कुलपति डॉ पी नाग ने समागम में आगंतुकों का आभार जताया। इसके पहले महामहिम ने कॉलेज के संस्थापक बलदेव वैध जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। एनसीसी कैडेट्स ने महामहिम को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। कृष्ण कुमार मिश्रा के सानिध्य में 21 बटुकों ने वैदिक मंत्रों से राज्यपाल का अभिवादन किया। कॉलेज के प्रबंधक डॉ. एस डी अग्रवाल ने राज्यपाल, विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पी नाग, जन नायक विश्वविद्यालय बलिया के कुलपति डॉ. योगेंद्र सिंह, विधायक डॉ. अवधेश सिंह को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
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राज्यपाल ने पहला मंत्र बताया कि सभी को मुस्कुराते रहना चाहिए। इससे आत्म संतुष्टि मिलती है और अच्छा वातावरण मिलता है। दूसरे मंत्र में कहा कि कोई अच्छा करे तो उसे प्रोत्साहित करें। इससे वह आगे और अच्छा करेगा। तीसरे मंत्र में कहा कि कमजोर या कम अंक पाने वाले की अवहेलना न करें। चौथे मंत्र में कहा कि बेहतर करने की कोशिश करेें। राज्यपाल ने पढ़ाई के साथ खेलने की सलाह दी। साथ ही कहा कि किताबी कीड़ा न बनें।
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खुद को भाग्यशाली मानता हूं की बड़ागांव बलदेव वैद्य जी की मातृभूमि पर आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बलदेव वैद्य जी ने लगभग सौ वर्ष पूर्व वैदिक शिक्षा परिषद का गठन कर अपनी दूरदर्शिता को साबित किया था। जिस समय इस परिषद का गठन हुआ उस वक्त यह परिषद पौधे के रूप में था आज विशाल वट वृक्ष के रूप में है। उन्होंने इसके लिए परिषद के सचिव व कालेज के प्रबंधक डॉ एस डी अग्रवाल को धन्यवाद दिया।
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कॉलेज के प्रबंधक डॉ. एस डी अग्रवाल व सचिव वैदिक शिक्षा परिषद ने कहा कि राज्यपाल के आगमन से खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। इसके लिए कॉलेज परिवार आजीवन ऋणी रहेगा। काशी विद्यापीठ के कुलपति डॉ पी नाग ने समागम में आगंतुकों का आभार जताया। इसके पहले महामहिम ने कॉलेज के संस्थापक बलदेव वैध जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। एनसीसी कैडेट्स ने महामहिम को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। कृष्ण कुमार मिश्रा के सानिध्य में 21 बटुकों ने वैदिक मंत्रों से राज्यपाल का अभिवादन किया। कॉलेज के प्रबंधक डॉ. एस डी अग्रवाल ने राज्यपाल, विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पी नाग, जन नायक विश्वविद्यालय बलिया के कुलपति डॉ. योगेंद्र सिंह, विधायक डॉ. अवधेश सिंह को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।