{"_id":"5a8de4094f1c1bf07b8b89d1","slug":"111519248393-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्मार्ट सिटी के नौ प्रोजेक्ट लटके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्मार्ट सिटी के नौ प्रोजेक्ट लटके
Updated Thu, 22 Feb 2018 03:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। स्मार्ट सिटी योजना को परवान चढ़ाने की कोशिशों को शुरुआती दौर में ही बड़ा झटका लगा है। योजना के तहत पक्के महाल यानी पुराने बनारस में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए दस बिंदुओं पर कार्ययोजना तैयार की गई है लेकिन अब तक सिर्फ एक पर ही काम शुरू हो पाया है। बाकी नौ प्रोजेक्ट तीन महीने से लटके हैं। उनका ही टेंडर ही अब तक फाइनल नहीं हो पाया है।
जबकि, दिसंबर 2017 में ही स्मार्ट सिटी के 379 करोड़ के सभी दस प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया पूरी कराई जानी थी। 154 करोड़ की लागत से बनने वाले इंटीग्रेटेड सिटी कमांड कंट्रोल को छोड़ बाकी नौ प्रोजेक्ट का अब तक टेंडर नहीं हो पाया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक करसड़ा कूड़ा प्लांट, रोड्स जंक्शन, कान्हा उपवन, घाटों पर फोकस लाइटिंग, कुंड का सुंदरीकरण सहित नौ प्रोजेक्ट की लागत 80 लाख रुपये से 98 करोड़ रुपये तक है। प्रोजेक्ट कास्ट कम होने के चलते बड़ी कंपनियां आ नहीं रही हैं। वहीं, छोटी और स्थानीय कंपनियां इसलिए शामिल नहीं हो पा रही हैं कि उनके पास मानक के अनुरूप संसाधन और तकनीक नहीं है। नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल का कहना है कि टेंडर में आ रहीें दिक्कतें जल्द दूर होंगी। उम्मीद है कि इसी महीने के अंत तक टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और मार्च से काम शुरू करा दिया जाएगा।
विज्ञापन
जबकि, दिसंबर 2017 में ही स्मार्ट सिटी के 379 करोड़ के सभी दस प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया पूरी कराई जानी थी। 154 करोड़ की लागत से बनने वाले इंटीग्रेटेड सिटी कमांड कंट्रोल को छोड़ बाकी नौ प्रोजेक्ट का अब तक टेंडर नहीं हो पाया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक करसड़ा कूड़ा प्लांट, रोड्स जंक्शन, कान्हा उपवन, घाटों पर फोकस लाइटिंग, कुंड का सुंदरीकरण सहित नौ प्रोजेक्ट की लागत 80 लाख रुपये से 98 करोड़ रुपये तक है। प्रोजेक्ट कास्ट कम होने के चलते बड़ी कंपनियां आ नहीं रही हैं। वहीं, छोटी और स्थानीय कंपनियां इसलिए शामिल नहीं हो पा रही हैं कि उनके पास मानक के अनुरूप संसाधन और तकनीक नहीं है। नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल का कहना है कि टेंडर में आ रहीें दिक्कतें जल्द दूर होंगी। उम्मीद है कि इसी महीने के अंत तक टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और मार्च से काम शुरू करा दिया जाएगा।
विज्ञापन