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किसान एकजुट हों तो हर सरकार झुकेगी : वीएन सिंह
Updated Wed, 04 Oct 2017 11:59 PM IST
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गाजीपुर। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की ओर से चंपारण जिले से निकाली गई ‘किसान मुक्ति यात्रा’ बुधवार को जिले में पहुंची। नगर के सरजू पांडेय पार्क में आयोजित सभा में संघर्ष समन्वय समिति के राष्ट्रीय संयोजक सरदार वीएन सिंह ने कहा कि देश के किसान एकजुट हो गए तो हर सरकार को उनके आगे झुकना होगा।
उन्होंने कहा पूरे देश के किसानों को एकजुट करने के लिए वे इस यात्रा पर निकले हैं। देश के 180 किसान संगठन केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ लड़ने के लिए समन्वय समिति से जुड़ चुके हैं। केंद्र पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि कर्जमाफी और लागत मूल्य देने के नाम पर मोदी सरकार ने किसानों के साथ विश्वासघात किया है।
अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव राजाराम सिंह ने कहा कि किसानों पर नहीं, देश पर किसानों का कर्ज है, इसलिए किसानों को संपूर्ण कर्ज से मुक्ति देनी होगी। उनकी उपज के लागत मूल्य में 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर मूल्य तय करना होगा। उन्होंने 20 नवंबर को दिल्ली में आयोजित किसान संसद में भाग लेकर केंद्र की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया।
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महासभा के राष्ट्रीय सचिव ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि देश में अफीम उत्पादन की एकमात्र फैक्ट्री गाजीपुर में है, लेकिन पोस्ता की खेती का लाइसेंस यहां के किसानों को देने के बजाय राजस्थान में दिया जा रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार के पशु वध अधिनियम ने किसानों की कमर तोड़ने का काम किया है। देश में पूंजीपति और कारपोरेट घरानों का अरबों रुपये के कर्ज केंद्र ने माफ कर दिए हैं, लेकिन किसानों की कर्जमाफी का बोझ राज्य सरकारों पर डालने से उसका किसान विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। सभा में विजयबहादुर सिंह, कमलाकर राम, रामप्रवेश, आजाद यादव, मोती प्रधान तथा अमरनाथ यादव ने विचार व्यक्त किया। इसके अलावा जयशंकर सिंह, रामाश्रय यादव, शिवजी सिंह आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता डा. सलाउद्दीन ने की।
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उन्होंने कहा पूरे देश के किसानों को एकजुट करने के लिए वे इस यात्रा पर निकले हैं। देश के 180 किसान संगठन केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ लड़ने के लिए समन्वय समिति से जुड़ चुके हैं। केंद्र पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि कर्जमाफी और लागत मूल्य देने के नाम पर मोदी सरकार ने किसानों के साथ विश्वासघात किया है।
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अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव राजाराम सिंह ने कहा कि किसानों पर नहीं, देश पर किसानों का कर्ज है, इसलिए किसानों को संपूर्ण कर्ज से मुक्ति देनी होगी। उनकी उपज के लागत मूल्य में 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर मूल्य तय करना होगा। उन्होंने 20 नवंबर को दिल्ली में आयोजित किसान संसद में भाग लेकर केंद्र की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया।
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महासभा के राष्ट्रीय सचिव ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि देश में अफीम उत्पादन की एकमात्र फैक्ट्री गाजीपुर में है, लेकिन पोस्ता की खेती का लाइसेंस यहां के किसानों को देने के बजाय राजस्थान में दिया जा रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार के पशु वध अधिनियम ने किसानों की कमर तोड़ने का काम किया है। देश में पूंजीपति और कारपोरेट घरानों का अरबों रुपये के कर्ज केंद्र ने माफ कर दिए हैं, लेकिन किसानों की कर्जमाफी का बोझ राज्य सरकारों पर डालने से उसका किसान विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। सभा में विजयबहादुर सिंह, कमलाकर राम, रामप्रवेश, आजाद यादव, मोती प्रधान तथा अमरनाथ यादव ने विचार व्यक्त किया। इसके अलावा जयशंकर सिंह, रामाश्रय यादव, शिवजी सिंह आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता डा. सलाउद्दीन ने की।