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चिकित्सकों की हड़ताल से भटकते रहे मरीज
Updated Wed, 03 Jan 2018 01:29 AM IST
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भदोही। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) को खत्म कर उसके स्थान पर नेशनल इंडियन कमीशन के गठन का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने विरोध जताते हुए मंगलवार को सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक कार्य बहिष्कार किया।
कई चिकित्सक छुट्टी पर चले गए। इससे जिले की चिकित्सा सेवा प्रभावित हो गई। कई निजी चिकित्सकों ने केवल अपने अस्पतालों में भर्ती मरीजों को देखा। हड़ताल में दवा दूकानों के खुले रहने के बाद भी चिकित्सा व्यवस्था पंगु रही। चिकित्सकों ने कहा कि सरकार चिकित्सा क्षेत्र का कारपोरेटाईजेशन कर रही है।
निजी चिकित्सकों की हड़ताल का मंगलवार को जिले में व्यापक असर रहा। हड़ताल का आह्वान कर आईएमए के चिकित्सकों ने इंदिरा मिल स्थित एक निजी अस्पताल में बैठक की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि एमसीआई को खत्म कर सरकार की कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने की साजिश है। एमसीआई में 20 प्रतिशत निर्वाचित और 80 प्रतिशत नामित सदस्य होंगे। ऐसे में स्पष्ट है कि सरकार की मंशा कारपोरेट सेक्टर को लाभ पहुंचाना चाहती है। आईएमए के अध्यक्ष, डॉ. एके गुप्ता ने कहा कि एमसीआई भंग कर कमीशन बनाना कहीं से भी सही कदम नहीं है। बैठक में विरोध के छह
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बिंदुओं की चर्चा की गई। डॉ. आरके पटेल ने कहा कि निजी कॉलेजों में 60 प्रतिशत सीटें मैनेजमेंट को देकर गरीबों को चिकित्सा शिक्षा से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है।
सुबह 6 बजे से ही हड़ताल शुरू हो गई थी। कई निजी अस्पतालों के गेट पर हड़ताल लिख कर बंदी की सूचना चस्पा कर दी गई थी। इससे चिकित्सा सेवा पंगु हो गई। हड़ताल में दवा की दूकानें शामिल नहीं रहीं। हड़ताल का सर्वाधिक असर चौरी रोड, इंदिरा मिल चौराहे बाईपास मार्ग पर दिखा। हड़ताल में शामिल चिकित्सकों में डॉ. अजहर, डॉ. केपी जायसवाल, डॉ. आरके मिश्र, डॉ. चिन्मय हर्ष, डॉ. अरशद महमूद, डॉ. गुलाम ख्वाजा, डॉ. एसएन शुक्ला, डॉ. मुमताज, डॉ. आनंद विनय, डॉ. बृजेश, डॉ. प्रीति मिश्र आदि शामिल थीं।
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कई चिकित्सक छुट्टी पर चले गए। इससे जिले की चिकित्सा सेवा प्रभावित हो गई। कई निजी चिकित्सकों ने केवल अपने अस्पतालों में भर्ती मरीजों को देखा। हड़ताल में दवा दूकानों के खुले रहने के बाद भी चिकित्सा व्यवस्था पंगु रही। चिकित्सकों ने कहा कि सरकार चिकित्सा क्षेत्र का कारपोरेटाईजेशन कर रही है।
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निजी चिकित्सकों की हड़ताल का मंगलवार को जिले में व्यापक असर रहा। हड़ताल का आह्वान कर आईएमए के चिकित्सकों ने इंदिरा मिल स्थित एक निजी अस्पताल में बैठक की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि एमसीआई को खत्म कर सरकार की कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने की साजिश है। एमसीआई में 20 प्रतिशत निर्वाचित और 80 प्रतिशत नामित सदस्य होंगे। ऐसे में स्पष्ट है कि सरकार की मंशा कारपोरेट सेक्टर को लाभ पहुंचाना चाहती है। आईएमए के अध्यक्ष, डॉ. एके गुप्ता ने कहा कि एमसीआई भंग कर कमीशन बनाना कहीं से भी सही कदम नहीं है। बैठक में विरोध के छह
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बिंदुओं की चर्चा की गई। डॉ. आरके पटेल ने कहा कि निजी कॉलेजों में 60 प्रतिशत सीटें मैनेजमेंट को देकर गरीबों को चिकित्सा शिक्षा से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है।
सुबह 6 बजे से ही हड़ताल शुरू हो गई थी। कई निजी अस्पतालों के गेट पर हड़ताल लिख कर बंदी की सूचना चस्पा कर दी गई थी। इससे चिकित्सा सेवा पंगु हो गई। हड़ताल में दवा की दूकानें शामिल नहीं रहीं। हड़ताल का सर्वाधिक असर चौरी रोड, इंदिरा मिल चौराहे बाईपास मार्ग पर दिखा। हड़ताल में शामिल चिकित्सकों में डॉ. अजहर, डॉ. केपी जायसवाल, डॉ. आरके मिश्र, डॉ. चिन्मय हर्ष, डॉ. अरशद महमूद, डॉ. गुलाम ख्वाजा, डॉ. एसएन शुक्ला, डॉ. मुमताज, डॉ. आनंद विनय, डॉ. बृजेश, डॉ. प्रीति मिश्र आदि शामिल थीं।