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कलाकारों ने बताईं कलात्मक लेखन की बारीकियां
Updated Fri, 10 Nov 2017 01:46 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू के दृश्य कला विभाग में डिजाइन इनोवेशन सेंटर की ओर से गुरुवार को आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला ‘कलाक्षर’ का उद्घाटन हुआ। इसमें देश के विभिन्न शहरों से आए वरिष्ठ कलाकारों ने कला के क्षेत्र में डिजाइन और नवप्रवर्तन पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही युवा कलाकारों को लिखावट में कला के योगदान की जानकारी देते हुए कलात्मक लेखन की बारीकियां भी बताई।
कार्यशाला में पहले दिन भाषा, कला एवं तकनीकी के सन्दर्भ में भारतीय संस्कृति में डिजाइन और नवप्रवर्तन विषयक संगोष्ठी हुई, जिसका उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि जेजे कॉलेज आफ अप्लायड आर्ट मुंबई के संकाय प्रमुख प्रो. संतोष क्षीर सागर ने किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि भारत एक लिपि समृद्ध देश है और वास्तव में लिपि मानव जाति को दृश्य कला द्वारा प्रदत्त सबसे बड़ा दान है। अक्षर इस बात का साक्ष्य है कि दृश्य कला के माध्यम से ही लिपि का जन्म हुआ। अक्षर ज्ञान का प्रतीक है। विशिष्ट अतिथि आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. राजीव संगल ने कहा कि मानव मूल्य को संवर्धित करना ही कला है। कला ऐसा माध्यम है, जिसमें तकनीक का उपयोग कर मानव से मानव को जोड़ने के साथ आजीविका का प्रबंध भी किया जा सकता है। अध्यक्षता करते हुए संकाय प्रमुख की प्रो. दीप्ती प्रकाश मोहंती ने कैलीग्राफी के महत्व को बताया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. मनीष अरोरा ने कहा कि कला में आधुनिक तकनीक का मिश्रण जरूरी है। इस अवसर पर कलाकारों ने कैनवास पर अलग-अलग डिजाइन में अक्षरों के लेखन से अपनी कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में डॉ. विजय सिंह, पलास दास, डॉ. शांति स्वरूप सिन्हा, विशाल सेंगर आदि मौजूद थे।
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कार्यशाला में पहले दिन भाषा, कला एवं तकनीकी के सन्दर्भ में भारतीय संस्कृति में डिजाइन और नवप्रवर्तन विषयक संगोष्ठी हुई, जिसका उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि जेजे कॉलेज आफ अप्लायड आर्ट मुंबई के संकाय प्रमुख प्रो. संतोष क्षीर सागर ने किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि भारत एक लिपि समृद्ध देश है और वास्तव में लिपि मानव जाति को दृश्य कला द्वारा प्रदत्त सबसे बड़ा दान है। अक्षर इस बात का साक्ष्य है कि दृश्य कला के माध्यम से ही लिपि का जन्म हुआ। अक्षर ज्ञान का प्रतीक है। विशिष्ट अतिथि आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. राजीव संगल ने कहा कि मानव मूल्य को संवर्धित करना ही कला है। कला ऐसा माध्यम है, जिसमें तकनीक का उपयोग कर मानव से मानव को जोड़ने के साथ आजीविका का प्रबंध भी किया जा सकता है। अध्यक्षता करते हुए संकाय प्रमुख की प्रो. दीप्ती प्रकाश मोहंती ने कैलीग्राफी के महत्व को बताया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. मनीष अरोरा ने कहा कि कला में आधुनिक तकनीक का मिश्रण जरूरी है। इस अवसर पर कलाकारों ने कैनवास पर अलग-अलग डिजाइन में अक्षरों के लेखन से अपनी कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में डॉ. विजय सिंह, पलास दास, डॉ. शांति स्वरूप सिन्हा, विशाल सेंगर आदि मौजूद थे।
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