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खटारा हैं रोडवेज की बसें
Updated Fri, 16 Jun 2017 01:07 AM IST
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जौनपुर। यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रोडवेज प्रशासन सजग नहीं है। खटारा बसों से यात्री यात्रा करने को मजबूर है। ऐसी बसों में यात्रा के दौरान उनकी जान जोखिम में पड़ी रहती है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो तकरीबन 325 बसों से 20 से 25 हजार यात्री रोजाना यात्रा करते है। यात्रियों के लिए जौनपुर बस अड्डे में न तो खड़े होने की जगह हैं और न ही बाथरूम एवं पानी पीने का ही कोई इंतजाम है।
प्रदेश में हर रोज तकरीबन एक करोड़ की आय परिवहन निगम की बसों से होती है। बावजूद इसके यात्रियों के लिए न तो सुरक्षा का कोई इंतजाम है और न ही उनके बैठने एवं पानी पीने की कोई व्यवस्था है। किराये में बढ़ोत्तरी हाल में हुई जरूर लेकिन सुविधाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। बसें ऐसी है जिसमें फंसकर लोगों के कपड़े फट जाते, कई लोगों तो चोटें भी आ जाती है। लेकिन किसी भी बस में मेडिकल बाक्स तक नहीं है। जिसमें है भी उसमें कोई दवा नहीं है।
विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो गोरखपुर, आजमगढ़ से जौनपुर होते इलाहाबाद तक 125 बसें, लखनऊ, सुल्तानपुर से जौनपुर होते वाराणसी तक 180 बसें एवं अन्य रूटों सोनभद्र, मिर्जापुर पर 20 से अधिक बसें संचालित की जाती है। जिसमें 20 से 25 हजार लोग आते जाते है। इनके लिए सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। मूलभूत सुविधाएं भी नहीं है। बस चालकों पर स्पीड नियंत्रण का भी कोई अंकुश नहीं है।
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एआरएम केशरी नंदन चौधरी ने बताया कि यात्रियों की सुविधा का पूरा ख्याल किया जा रहा है। डिपो में निर्माण कार्य की वजह से फिलहाल कुछ दिक्कत है इसे ठीक कर लिया जाएगा।
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प्रदेश में हर रोज तकरीबन एक करोड़ की आय परिवहन निगम की बसों से होती है। बावजूद इसके यात्रियों के लिए न तो सुरक्षा का कोई इंतजाम है और न ही उनके बैठने एवं पानी पीने की कोई व्यवस्था है। किराये में बढ़ोत्तरी हाल में हुई जरूर लेकिन सुविधाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। बसें ऐसी है जिसमें फंसकर लोगों के कपड़े फट जाते, कई लोगों तो चोटें भी आ जाती है। लेकिन किसी भी बस में मेडिकल बाक्स तक नहीं है। जिसमें है भी उसमें कोई दवा नहीं है।
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विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो गोरखपुर, आजमगढ़ से जौनपुर होते इलाहाबाद तक 125 बसें, लखनऊ, सुल्तानपुर से जौनपुर होते वाराणसी तक 180 बसें एवं अन्य रूटों सोनभद्र, मिर्जापुर पर 20 से अधिक बसें संचालित की जाती है। जिसमें 20 से 25 हजार लोग आते जाते है। इनके लिए सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। मूलभूत सुविधाएं भी नहीं है। बस चालकों पर स्पीड नियंत्रण का भी कोई अंकुश नहीं है।
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एआरएम केशरी नंदन चौधरी ने बताया कि यात्रियों की सुविधा का पूरा ख्याल किया जा रहा है। डिपो में निर्माण कार्य की वजह से फिलहाल कुछ दिक्कत है इसे ठीक कर लिया जाएगा।