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गेहूं हल्का, किसानों का दर्द छलका

Tue, 05 Apr 2016 12:48 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव Updated Tue, 05 Apr 2016 12:48 AM IST
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wheat farmaers are in trouble
गेहूं किसान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
प्रकृति की मार का असर रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं पर साफ नजर आने लगा है। थ्रेसिंग के दौरान गेहूं का उत्पादन काफी कम होने से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं। किसान यह सोचकर परेशान नजर आ रहा है कि अब साल भर परिवार का पेट कैसे पलेगा। जनपद में इस बार ढाई लाख हेक्टेअर क्षेत्रफल में गेहूं बोया गया है। कृषि विभाग ने 900 मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा है लेकिन समय से पहले भीषण गर्मी पड़ने और तेज धूप निकलने से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल झुलसने लगी है। इससे गेहूं की फसल समय से पहले पक तो गई लेकिन दाना कमजोर और उत्पादन घटने की समस्याएं सामने आने लगी हैं।
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असोहा प्रतिनिधि के अनुसार, विकासखंड के किसानों पर पिछले दो वर्षों से कुदरत और शासन की मार पड़ रही है। इसके चलते किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। इस बार भी कमोबेश किसानों के लिए स्थितियां विपरीत हो गई हैं। समय पर नहरों में पानी न मिलने से किसानों ने किसी तरह से कर्ज आदि लेकर सिंचाई करके गेहूं की फसल तैयार की थी लेकिन अब कुदरत के कहर ने फिर से उन्हें रोने पर विवश कर दिया है। तेज धूप के चलते समय से पहले गेहूं की फसल पकने के कारण किसानों ने कटाई और मढ़ाई का काम शुरू कर दिया। जब थ्रेसरिंग हुई तो उत्पादन देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अमूमन प्रति बीघे 10 से 12 क्विंटल होने वाला गेहूं का उत्पादन इस बार घटकर 7 से 8 क्विंटल के बीच ही रह गई। औरास प्रतिनिधि के अनुसार, इस बार फागुन माह में ही गर्मी पड़ने लगी थी। अमूमन चैत्र माह के अंतिम दिनों में गेहूं की कटाई शुरु होती थी लेकिन इस बार समय से पहले तेज धूप से फसल पक जाने से कटाई पहले ही शुरू कर दी गई। इसका परिणाम कम उत्पादन और दाना कमजोर होने के रूप में सामने आ रहा है। कमोबेश यही स्थिति अन्य विकासखंडों की भी हैं। मौरावां व पुरवा प्रतिनिधि की मानें तो क्षेत्र के किसान गेहूं का कम उत्पादन देख परेशान नजर आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल पर ही साल भर परिवार का पेट पालने की व्यवस्था रहती है। इस बार स्थितियां खराब नजर आ रही हैं। अब परिवार का पेट पालने के साथ ही अन्य कार्यक्रम कैसे होंगे।
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इंसेट-1
किसानों की कहानी, उनकी जुबानी
फोटो नंबर-04 यूएनओपी 18
परिचय-कल्लू प्रसाद
इस बार गेहूं की पैदावार कम हो रही है। जबकि लागत बहुत ज्यादा आई है। ऐसे में उनके सामने मुश्किलें नजर आ रही हैं।
फोटो नंबर-04 यूएनओपी 17
परिचय-देवीदीन यादव
इस बार फिर प्रकृति की मार से उन लोगों को खासी चोट लगी है। सामान्य मौसम में गेहूं का उत्पादन जहां प्रति बीघे 10 से 12 क्विंटल होता था इस बार घटकर लगभग आधा रह गया है।
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फोटो नंबर-04 यूएनओपी 16
परिचय-रामभगत
मझखोरिया निवासी रामभगत ने बताया कि गेहूं की एक बीघा फसल तैयार करने में लगभग 7 से 8 हजार रुपये की लागत आई है। पैदावार जहां 9-10 क्विंटल होती थी वह इस बार घटकर 5-7 क्विंटल ही रह गई है।
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परिचय-सतीशचंद्र अवस्थी
अतरसई निवासी सतीशचंद्र अवस्थी का कहना है कि हम लोग बैंकों से ऋण लेकर फसल तैयार करते हैं लेकिन पिछले दो वर्षों से जहां पैदावार में भारी कमी आयी है वहीं लागत में दो गुना से अधिक की बढ़ोत्तरी हुई है। ऐसे में किसान के सामने परिवार के पालन पोषण की समस्या खड़ी हो गयी है।


हफ्तेभर में साफ होगी तस्वीर
जिला कृषि अधिकारी  यतींद्र सिंह ने बताया कि धूप तेज होने से खेतों में नमी कम होने से कुछ ब्लॉकों से गेहूं का उत्पादन कम होने की सूचना मिली है। उन्होंने बताया कि क्रॉप कटिंग कराई जा रही है। एक सप्ताह में जिले की स्थिति साफ होगी कि गेहूं उत्पादन पर मौसम का कितना प्रभाव रहा।
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