उपज आधी देख सदमें में किसान

ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव Updated Thu, 14 Apr 2016 12:45 AM IST
खेतीबाड़ी
खेतीबाड़ी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कृषि विभाग के फार्म हाउसों में बोई गई गेहूं की फसल की थ्रेसरिंग होने के बाद उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत की गिरावट होने की पुष्टि हुई है। ऐसे में किसानों को अब लागत तक निकालनी मुश्किल हो रही है। उनके सामने साल भर परिवार का पालन-पोषण करने की समस्या खड़ी नजर आ रही है। हाल यह है कि कई परेशान कई किसान खेतीबाड़ी से तौबा कर मजदूरी की बात कह रहे हैं।
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इस बार जिले में ढाई लाख हेक्टेअर क्षेत्रफल में गेहूं बोया गया है। कृषि विभाग ने 900 मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा है, लेकिन समय से पहले भीषण गर्मी पड़ने से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल झुलस गई है। जिले में कृषि विभाग के छह फार्म हाउस हैं। इनमें शहर, सरोसी, फतेहपुर चौरासी के ऊगू, बांगरमऊ के उत्मानपुर, सफीपुर के कुसैला और पुरवा के कसेरू में बड़े फार्म हाउस हैं। इन फार्म हाउसों में कृषि विभाग सीजन के हिसाब से फसलों की बुआई कराता है। सबसे बड़ा फार्म हाउस शहर में है। यह फार्म हाउस करीब 13.15 हेक्टेअर में फैला हुआ है। इस क्षेत्रफल में विभाग ने गेहूं की फसल बोई थी। जब इसकी थ्रेसरिंग हुई तो उत्पादन देख कृषि विभाग के अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। जांच पड़ताल के बाद पता चला कि 13 हेक्टेअर में मात्र 365 क्विंटल का ही उत्पादन हुआ है। जबकि विभाग को लगभग पांच सौ क्विंटल गेहूं के उत्पादन का अनुमान था। यही हाल अन्य फार्म हाउसों में बोई गई गेहूं की फसल के उत्पादन का रहा। सभी जगह गेहूं हल्का और उसकी पैदावार कम होने की जानकारी मिली है। कृषि विभाग के जानकारों की मानें तो उत्पादन गिरने से किसानों को तगड़ा नुकसान हुआ है। अमूमन प्रति बीघा 9 से 10 क्विंटल होने वाला गेहूं का उत्पादन इस बार घटकर चार से पांच क्विंटल के बीच ही रह गया है। उनकी उम्मीदें धूमिल हुई हैं। अब किसानों के सामने परिवार का भरण-पोषण करने की मुश्किल खड़ी हो गई है।


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लागत निकालना भी हुआ मुश्किल
बीघापुर (उन्नाव)। मौसम की मार से इस बार गेहूं का उत्पादन प्रति बीघा चार से पांच क्विंटल ही रह गया है। अन्नदाता को 4000 से 5000 रुपये प्रति बीघे का नुकसान उठाना पड़ रहा है बीघापुर तहसील क्षेत्र के बेहटा भवानी से लेकर बक्सर तक और लालकुआं से लेकर बिहार तक के किसान मौसम की बेरुखी के चलते खेती की लागत न निकाल पाने से परेशान हैं। कृषकों को इस बार गेहूं की फसल तैयार करने में प्रति बीघा आठ से नौ हजार रुपये का खर्च आया है। इसमें जोताई में खर्च 1500 रुपये, नया बीज 800 रुपये, चार से पांच बार गेहूं की सिंचाई में 2200 से 2500 रुपये, फसल में कीटनाशक 400 रुपये, फसल की मजदूरी में एक बीघा कटाई का खर्च लगभग एक क्विंटल गेहूं या 1500 रुपया, थ्रेसरिंग का खर्चा 1500 रुपया, ऊपर से लेबर चार्ज हजार रुपये खर्च करना पड़ा है। प्रति बीघे उत्पादन 4 से 5 क्विंटल होने से किसानों को लागत निकालनी मुश्किल हो रही है।
से 25 प्रतिशत की कमी आई है। यतींद्र सिंह, जिला कृषि अधिकारी।

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