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मां के ‘परिश्रम’ से बेटियों ने छुआ ‘आसमान’

Mon, 09 May 2022 12:15 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 09 May 2022 12:15 AM IST
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मां कृष्णा यादव के साथ बेटी सीमा। संवाद - फोटो : UNNAO
हसनगंज। तहसील क्षेत्र की कई माताओं ने परिवार के विरोध और खराब आर्थिक स्थिति के बाद भी अपनी मेहनत व परिश्रम से बेटियों को आगे बढ़ाया। मां के कठिन परिश्रम की बदौलत आज उनकी बेटियां आसमान छू रही हैं। इन बेटियों के लिए उनकी माताओं किसी रोल मॉडल से कम नहीं हैं।
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मोहान निवासी कृष्णा यादव के पांच बेटियां हैं। परिवार बड़ा और आय का साधन मात्र खेती। पति अकेले खेती करते थे। इससे परिवार का पेट बमुश्किल भर पाता था। वहीं, कृष्णा यादव अपनी बेटियों को पढ़ा लिखाकर सरकारी नौकरी में देखना चाहती थीं। अपने इस सपने को साकार करने के लिए कृष्णा ने पति के साथ खेती करना शुरू किया। कड़ी मेहनत से बेटियों को खूब पढ़ाया। बेटियों में भी मां की उम्मीदों पर खरा उतरने का जुनून था। आखिर इसका परिणाम भी आया और बड़ी बेटी सीमा का पुलिस कांस्टेबिल पद पर चयन हो गया। छोटी बेटी ज्योति की भी आयकर विभाग में नौकरी लग गई। शेष तीन बेटियां भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। सीमा का कहना है कि मां ही उनकी रोल मॉडल हैं। उनकी मेहनत से आज बेटियां ऊंचे मुकाम पर पहुंची हैं।
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इसी प्रकार कायमपुर निबरवारा की रहने वाली मंजू वर्मा ने भी आर्थिक स्थिति सही नहीं थी। इसके बाद भी अपनी तीन बेटियों को खूब पढ़ाया। उन्हें किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी। अब उनकी बड़ी बेटी ज्योति वर्मा व प्रीती सरकारी अध्यापक बन चुकी हैं। मंजू वर्मा गांव में हर गरीब बेटी की शादी में नकदी व गृहस्थी का सामान देकर मदद कर रही हैं। इसी प्रकार सुरौली निवासी मीना देवी की दो बेटियों ने उनकी कड़ी मेहनत के दम पर अच्छा मुकाम हासिल किया है। एक बेटी रचना वर्मा सहायक अध्यापक बन गई है। दूसरी बेटी कंचन वर्मा सहारनपुर मेडिकल कालेज में स्टाफ नर्स के पद पर तैनात है। मीना की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसके बाद भी बेटियों को पढ़ाने के लिए खुद मेहनत की। कुर्ता की कढ़ाई करके जो पैसा मिलता था उससे ही बचाकर बेटियों की फीस जमा करती थीं। आज उनकी बेटियां सरकारी नौकरी में पहुंच गई हैं। मां के परिश्रम से बेटियां सरकारी नौकरी पाकर खुद को गौरवांवित महसूस कर रही हैं।
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