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Unnao News: आलू किसानों की आफत, नहीं निकल रही फसल की लागत
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फोटो-6- कपूरपुर में रवी की आलू की फसल की खोदाई करते श्रमिक। संवाद
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गंजमुरादाबाद। पड़ोसी राज्यों में मांग कम होने के कारण आलू की बिक्री प्रभावित हो रही है, जिससे मंडी में इसके दाम गिरकर 500 रुपये क्विंटल तक पहुंच गए हैं। लागत मूल्य न निकल पाने के कारण किसान मायूस हैं।
क्षेत्र के किसान साल में आलू की दो फसलें तैयार करते हैं। अगेती फसल की बोआई अक्तूबर में होती है और जनवरी में खोदाई शुरू हो जाती है। वहीं पछेती फसल दिसंबर में बोई जाती है और मार्च के अंत तक तैयार होती है। इस समय अगेती फसल की खोदाई चल रही है। इस बार उत्तराखंड में भी बंपर पैदावार हुई है जिसके चलते वहां भी आलू नहीं भेजा जा रहा है।
बांगरमऊ मंडी में आलू का भाव 500 रुपये क्विंटल है। किसानों के अनुसार एक बीघा में लगभग 40 क्विंटल आलू निकलता है जिससे उन्हें 20 हजार रुपये की आमदनी होती है। वहीं इस फसल को तैयार करने में 25 से 30 हजार रुपये की लागत आती है। लागत से कम दाम मिलने के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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संजय कटियार, सुधांशु कटियार, हनी कटियार, बबलू यादव, श्याम कुमार, रामसिंह और सरोज कटियार जैसे किसानों ने बताया कि आलू की फसल में लागत भी वसूल नहीं हो पा रही है। कच्चा आलू अधिक समय तक भंडारित नहीं किया जा सकता, इसलिए किसानों को घाटे में ही फसल बेचनी पड़ रही है।
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क्षेत्र के किसान साल में आलू की दो फसलें तैयार करते हैं। अगेती फसल की बोआई अक्तूबर में होती है और जनवरी में खोदाई शुरू हो जाती है। वहीं पछेती फसल दिसंबर में बोई जाती है और मार्च के अंत तक तैयार होती है। इस समय अगेती फसल की खोदाई चल रही है। इस बार उत्तराखंड में भी बंपर पैदावार हुई है जिसके चलते वहां भी आलू नहीं भेजा जा रहा है।
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बांगरमऊ मंडी में आलू का भाव 500 रुपये क्विंटल है। किसानों के अनुसार एक बीघा में लगभग 40 क्विंटल आलू निकलता है जिससे उन्हें 20 हजार रुपये की आमदनी होती है। वहीं इस फसल को तैयार करने में 25 से 30 हजार रुपये की लागत आती है। लागत से कम दाम मिलने के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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संजय कटियार, सुधांशु कटियार, हनी कटियार, बबलू यादव, श्याम कुमार, रामसिंह और सरोज कटियार जैसे किसानों ने बताया कि आलू की फसल में लागत भी वसूल नहीं हो पा रही है। कच्चा आलू अधिक समय तक भंडारित नहीं किया जा सकता, इसलिए किसानों को घाटे में ही फसल बेचनी पड़ रही है।