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Unnao News: रोगी कल्याण समिति के 19.98 लाख रुपये गबन में वरिष्ठ लिपिक निलंबित
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उन्नाव। रोगी कल्याण समिति के खाते से 19.98 लाख रुपये गबन के मामले में वरिष्ठ सहायक लिपिक को निलंबित कर दिया है। मंडल अपर निदेशक कार्यालय की टीम ने जांच में वार्डबॉय से ट्रेजरी और मेडिकोलीगल का काम कराने का दोषी पाया। मार्च में गबन के खुलासे के बाद से वार्डबॉय लापता है। जांच पूरी होने तक लिपिक को कानपुर मंडल के अपर निदेशक कार्यालय में संबद्ध कर दिया है।
जिला अस्पताल में वार्डबॉय के पद पर तैनात शहर के मोहल्ला जुराखन खेड़ा निवासी विनय यादव ट्रेजरी संबंधी सभी कार्य और मेडिकोलीगल का काम देख रहा था। वह 18 मार्च से अनुपस्थित चल रहा था। तत्कालीन सीएमएस डॉ. आरए मिर्जा ने रोगी कल्याण समिति के बैंक खाते की डिटेल निकलवाई तो अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 19,98,606 रुपये रुपये बैंक खाते में जमा न करने की पुष्टि हुई थी।
मामला उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तक पहुंचा तो उन्होंने अपर निदेशक स्वास्थ्य को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएमएस ने तीन सदस्यीय कमेटी से जांच कराई थी और सारा दोष लापता वार्डबॉय पर मढ़ते हुए उसके खिलाफ गबन की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वार्डबॉय और पटल प्रभारी का बैंक खाता भी सीज करा दिया था। जांच की औपचारिकता पूरी कर निदेशालय रिपोर्ट भेज दी गई थी। गबन के इस गंभीर प्रकरण में लीपापोती पर उच्चाधिकारियों ने नाराजगी जताई।
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इसके बाद अपर निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने जांच टीम गठित कर दोबारा जांच कराई। जांच टीम ने सीएमएस कार्यालय में तैनात वरिष्ठ लिपिक निशांत कुमार की लापरवाही पाई। बैंक में जमा और निकासी जिम्मेदारी वरिष्ठ लिपिक के पास थी लेकिन वह अपना काम वार्डबॉय से करा रहा था। सूत्रों के अनुसार लिपिक की ओर से गबन की साजिश के लिए भी ऐसा करने की आशंका जताई गई है। टीम ने दोषी करार देते हुए निलंबन की कार्रवाई की है। इसके अलावा उन्हें कानपुर मंडल अपर निदेशक कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया है।
कानपुर अपर निदेशक करेंगे जांच
लखनऊ मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. जीपी गुप्ता ने बताया कि मामले की बिंदुवार जांच कराई गई। इसमें वरिष्ठ लिपिक की लापरवाही पाई गई है। इसलिए उन्हें निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा कानपुर मंडल के अपर निदेशक कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया है। जांच की भी जिम्मेदारी कानपुर अपर निदेशक को दी गई है।
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जिला अस्पताल में वार्डबॉय के पद पर तैनात शहर के मोहल्ला जुराखन खेड़ा निवासी विनय यादव ट्रेजरी संबंधी सभी कार्य और मेडिकोलीगल का काम देख रहा था। वह 18 मार्च से अनुपस्थित चल रहा था। तत्कालीन सीएमएस डॉ. आरए मिर्जा ने रोगी कल्याण समिति के बैंक खाते की डिटेल निकलवाई तो अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 19,98,606 रुपये रुपये बैंक खाते में जमा न करने की पुष्टि हुई थी।
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मामला उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तक पहुंचा तो उन्होंने अपर निदेशक स्वास्थ्य को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएमएस ने तीन सदस्यीय कमेटी से जांच कराई थी और सारा दोष लापता वार्डबॉय पर मढ़ते हुए उसके खिलाफ गबन की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वार्डबॉय और पटल प्रभारी का बैंक खाता भी सीज करा दिया था। जांच की औपचारिकता पूरी कर निदेशालय रिपोर्ट भेज दी गई थी। गबन के इस गंभीर प्रकरण में लीपापोती पर उच्चाधिकारियों ने नाराजगी जताई।
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इसके बाद अपर निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने जांच टीम गठित कर दोबारा जांच कराई। जांच टीम ने सीएमएस कार्यालय में तैनात वरिष्ठ लिपिक निशांत कुमार की लापरवाही पाई। बैंक में जमा और निकासी जिम्मेदारी वरिष्ठ लिपिक के पास थी लेकिन वह अपना काम वार्डबॉय से करा रहा था। सूत्रों के अनुसार लिपिक की ओर से गबन की साजिश के लिए भी ऐसा करने की आशंका जताई गई है। टीम ने दोषी करार देते हुए निलंबन की कार्रवाई की है। इसके अलावा उन्हें कानपुर मंडल अपर निदेशक कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया है।
कानपुर अपर निदेशक करेंगे जांच
लखनऊ मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. जीपी गुप्ता ने बताया कि मामले की बिंदुवार जांच कराई गई। इसमें वरिष्ठ लिपिक की लापरवाही पाई गई है। इसलिए उन्हें निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा कानपुर मंडल के अपर निदेशक कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया है। जांच की भी जिम्मेदारी कानपुर अपर निदेशक को दी गई है।