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Unnao News: नेताओं और उच्चाधिकारियों से संपर्क कर धीरेंद्र ने पांच साल में बनाई पहचान
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उन्नाव। फतेहपुर चौरासी के राजेपुर गांव निवासी कौशल किशोर के पास खेती के अलावा रोजगार का कोई साधन नहीं है। उन्होंने बड़े बेटे धीरेंद्र को साथी शिक्षक व प्रॉपर्टी डीलर के पास उनके काम की देखभाल के लिए लखनऊ भेजा था। सात साल तक धीरेंद्र उनके साथ रहे, फिर खुद का व्यापार शुरू कर दिया।
सात-आठ साल में विभिन्न दलों के दिग्गज नेताओं और बड़े-बड़े अधिकारियों से संपर्क बढ़ाकर अपना रसूख बनाया जो बहुत से लोगों को पसंद नहीं आ रहा था। लग्जरी गाड़ियों के शौकीन धीरेंद्र जब भी गांव आते लोगों की समस्याएं सुनते और समाधान भी कराते थे। उनके परिचित बताते हैं कि प्रदेश ही नहीं आसपास के कई प्रदेशों में कोई काम हो तो धीरेंद्र कोई न कोई संपर्क निकाल कर करा ही देते थे।
राजेपुर गांव निवासी कौशल किशोर के पास करीब 13 बीघा खेती है। तीन बेटे होने और कोई रोजगार न होने से उन्होंने वर्ष 2006 में डीसीकेएम इंटर कॉलेज के शिक्षक व प्रॉपर्टी डीलर संजीव दीक्षित से कहकर बेटे को लखनऊ भेजा था। वहां धीरेंद्र संजीव का काम देखते थे। करीब सात साल काम सीखने के बाद संजीव से भी दूरी बना ली। इसके बाद वह क्या काम कर रहे थे किसी को नहीं पता। वह कभी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर तो कभी पुरवा विधायक उदयराज यादव के साथ बैठकर लखनऊ के नेताओं, मंत्री और अधिकारियों के साथ अच्छी पकड़ बना ली थी।
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पांच साल में लखनऊ में घर, प्लॉट और कई जमीनें बनाईं। जानकारों की माने तो पहले पुरानी पजेरो कार खरीदी। फिर नई टाटा सफारी लाए। बाद में पता चला कि वह शादी में मिली है। मौजूदा समय में दो और लग्जरी गाड़ियां होने की चर्चा है। नेताओं से संपर्क में आने के बाद तहसील और थानों में काम कराने के नाम पर भी रुपये कमाते थे। रुपये आने के बाद गांव में आलीशान घर भी बनवाया, साथ ही व्यवस्थाएं भी लग्जरी कराईं। धीरेंद्र के पिता से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बेटे की क्षेत्र में किसी से कोई दुश्मनी न होने की बात बताई।
फोटो-28-धीरेंद्र प्रताप सिंह (फाइल फोटो)
फोटो-29- पीली साड़ी पहने खड़ी महिला के पास बैठी रोती पत्नी ममता सिंह। संवाद
फोटो-30- घर के बाहर लगी महिलाओं और ग्रामीणों की लगी भीड़। संवाद
फोटो-31- अंत्येष्टि स्थल पर मौजूद विधायक श्रीकांत कटियार सहित अन्य। संवाद
फोटो-32- बेटे की हत्या के लोगों के साथ गमगीन खड़े पिता कौशल किशोर सिंह। संवाद
बच्चे की किलकारी सुनने से पहले ही दुनिया से हो गए अलविदा
गर्भवती पत्नी और परिवार बेहाल, लोगों ने बंधाया ढाढ़स
विधायक, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष, पूर्व सांसद सहित सैकड़ों लोगों ने दी अंतिम विदाई
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर चौरासी/बांगरमऊ। महाराणा प्रताप चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह का शव सोमवार को घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। विधायक, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष, पूर्व सांसद सहित अन्य लोगों ने परिजनों को सांत्वना दी और नानामऊ घाट पहुंचकर अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इस दौरान दो थानों के थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।
धीरेंद्र प्रताप सिंह करीब 20 साल से लखनऊ के पीजीआई के पास वृंदावन कॉलोनी में रह रहे थे। रविवार को हत्या के बाद परिवार में कोहराम मच गया। वह तीन भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े थे। धीरेंद्र के पिता कौशल किशोर सिंह किसान हैं और वह गांव में ही रहते हैं। धीरेंद्र की मौत से गर्भवती पत्नी ममता सिंह बेहाल है। परिजनों ने बताया कि डॉक्टर ने ममता को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती होने के लिए आज की ही तारीख दी थी।
सोमवार को शव पैतृक आवास पहुंचने पर बांगरमऊ विधायक श्रीकांत कटियार, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष अरुण सिंह, हरदोई की पूर्व सांसद अंजू बाला, उनके पति सतीश वर्मा सहित कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के लोगों ने गांव पहुंचकर पिता व अन्य परिजनों को ढाढ़स बंधाया। भाई अवधेश ने नानामऊ घाट पर चिता को अग्नि दी। भाजपा नेता बलाराव गुप्ता, पूर्व विधायक बदलू खां, भाजपा नेता अर्जुन लाल दिवाकर, विवेक पटेल, सपा नेता मुन्ना अल्वी, अधिवक्ता संजीव त्रिवेदी कोतवाली अखिलेशचंद्र पांडेय और फतेहपुर चौरासी एसओ ज्ञानेंद्र सिंह मौजूद रहे।
सीएम को पत्र लिख की थी जमीन कब्जाने की शिकायत
महाराणा प्रताप चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह ने 13 नवंबर 2024 को तत्कालीन एसडीएम से बांगरमऊ नगर पालिका के बाहर गाटा संख्या 488 च, 488 ब रकबा करीब छह बीघा की भूमि खरीद कर बगैर धारा 80 के प्लॉटिंग करने और तहसील परिसर के दर्ज रास्ते से प्लॉटिंग के लिए रास्ता देने के आरोप लगा शिकायत की। कोई कार्रवाई न होने पर 16 नवंबर 2024 को दोबारा प्रार्थनापत्र दिया।
जांच में खानापूर्ति होने पर सीएम को पत्र भेजकर तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, सबरजिस्ट्रार, लेखपाल के खिलाफ मंडलायुक्त लखनऊ की अध्यक्षता में जांच कराकर कार्रवाई की मांग की थी। सीएम से शिकायत के बाद कई बार जांच होने के बाद भी जमीन बगैर धारा 80 के प्लॉटिंग कर दी गई। यही नहीं एसडीएम की मिलीभगत से प्लॉटिंग के लिए तहसील के रास्ते से ही रास्ता भी दे दिया गया। इस जमीन में रणंजय प्रताप सिंह उर्फ मोनू सिंह के भतीजे वर्तमान क्रय विक्रय समिति अध्यक्ष आदर्श प्रताप सिंह भी हिस्सेदार हैं। रणंजय प्रताप साल 2013 से 2023 तक क्रय विक्रय समिति अध्यक्ष रहे हैं।
चर्चा है कि बांगरमऊ निवासी आदित्य राजपूत भी प्लॉटिंग का काम करते हैं। जिन जमीनों पर विवाद होता है, उनको सुलझाने का काम रणंजय के माध्यम से किया जाता है। आकाश राजपूत अधिकतर जमीनें खरीद कर बोधेश्वर मंदिर के आसपास लतीफपुर, रबड़ी सहित अन्य स्थानों पर प्लॉटिंग की है।
दो अंगरक्षक, फिर भी अपहरण कर हत्या
पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के जेल जाने और उम्रकैद की सजा होने के बाद धीरेंद्र ने राजनीति से दूरी बना ली थी और बड़े-बड़े अधिकारियों से नजदीकी बढ़ा ली थी। अफसरों से नजदीकी और सत्ता दल से करीबी होने के कारण शासन की स्वीकृति पर 2021 में उसे दो गनर मिले थे, जिनका उन्हें रुपये भी नहीं देना था। दो अंगरक्षक होने के बाद भी अपहरण करके हत्या की घटना पर एसपी जयप्रकाश सिंह ने बताया कि दोनों गनर लखनऊ में थे, वहां से अभी रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के पर गनर की लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई अवश्य की जाएगी।
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लखनऊ एसटीएफ ने बांगरमऊ से कई को उठाया, प्रॉपर्टी डीलर भी शामिल
हत्या की जांच में लखनऊ से आई एसटीएफ टीम बांगरमऊ के कई लोगों से पूछताछ कर रही है। पुलिस के अनुसार मृतक के चालक रवि ने पूछताछ में बांगरमऊ निवासी एक युवक का नाम लिया था। इसके बाद एसटीएफ ने उससे पूछताछ की थी और बाद में उन्हें घर भेज दिया था। सोमवार को भी उनसे दोबारा पूछताछ किए जाने की चर्चा रही। सहदानी गांव निवासी और प्लॉटिंग के काम से जुड़े युवक से भी एसटीएफ के पूछताछ किए जाने की चर्चा है।
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सात-आठ साल में विभिन्न दलों के दिग्गज नेताओं और बड़े-बड़े अधिकारियों से संपर्क बढ़ाकर अपना रसूख बनाया जो बहुत से लोगों को पसंद नहीं आ रहा था। लग्जरी गाड़ियों के शौकीन धीरेंद्र जब भी गांव आते लोगों की समस्याएं सुनते और समाधान भी कराते थे। उनके परिचित बताते हैं कि प्रदेश ही नहीं आसपास के कई प्रदेशों में कोई काम हो तो धीरेंद्र कोई न कोई संपर्क निकाल कर करा ही देते थे।
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राजेपुर गांव निवासी कौशल किशोर के पास करीब 13 बीघा खेती है। तीन बेटे होने और कोई रोजगार न होने से उन्होंने वर्ष 2006 में डीसीकेएम इंटर कॉलेज के शिक्षक व प्रॉपर्टी डीलर संजीव दीक्षित से कहकर बेटे को लखनऊ भेजा था। वहां धीरेंद्र संजीव का काम देखते थे। करीब सात साल काम सीखने के बाद संजीव से भी दूरी बना ली। इसके बाद वह क्या काम कर रहे थे किसी को नहीं पता। वह कभी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर तो कभी पुरवा विधायक उदयराज यादव के साथ बैठकर लखनऊ के नेताओं, मंत्री और अधिकारियों के साथ अच्छी पकड़ बना ली थी।
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पांच साल में लखनऊ में घर, प्लॉट और कई जमीनें बनाईं। जानकारों की माने तो पहले पुरानी पजेरो कार खरीदी। फिर नई टाटा सफारी लाए। बाद में पता चला कि वह शादी में मिली है। मौजूदा समय में दो और लग्जरी गाड़ियां होने की चर्चा है। नेताओं से संपर्क में आने के बाद तहसील और थानों में काम कराने के नाम पर भी रुपये कमाते थे। रुपये आने के बाद गांव में आलीशान घर भी बनवाया, साथ ही व्यवस्थाएं भी लग्जरी कराईं। धीरेंद्र के पिता से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बेटे की क्षेत्र में किसी से कोई दुश्मनी न होने की बात बताई।
फोटो-28-धीरेंद्र प्रताप सिंह (फाइल फोटो)
फोटो-29- पीली साड़ी पहने खड़ी महिला के पास बैठी रोती पत्नी ममता सिंह। संवाद
फोटो-30- घर के बाहर लगी महिलाओं और ग्रामीणों की लगी भीड़। संवाद
फोटो-31- अंत्येष्टि स्थल पर मौजूद विधायक श्रीकांत कटियार सहित अन्य। संवाद
फोटो-32- बेटे की हत्या के लोगों के साथ गमगीन खड़े पिता कौशल किशोर सिंह। संवाद
बच्चे की किलकारी सुनने से पहले ही दुनिया से हो गए अलविदा
गर्भवती पत्नी और परिवार बेहाल, लोगों ने बंधाया ढाढ़स
विधायक, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष, पूर्व सांसद सहित सैकड़ों लोगों ने दी अंतिम विदाई
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर चौरासी/बांगरमऊ। महाराणा प्रताप चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह का शव सोमवार को घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। विधायक, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष, पूर्व सांसद सहित अन्य लोगों ने परिजनों को सांत्वना दी और नानामऊ घाट पहुंचकर अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इस दौरान दो थानों के थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।
धीरेंद्र प्रताप सिंह करीब 20 साल से लखनऊ के पीजीआई के पास वृंदावन कॉलोनी में रह रहे थे। रविवार को हत्या के बाद परिवार में कोहराम मच गया। वह तीन भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े थे। धीरेंद्र के पिता कौशल किशोर सिंह किसान हैं और वह गांव में ही रहते हैं। धीरेंद्र की मौत से गर्भवती पत्नी ममता सिंह बेहाल है। परिजनों ने बताया कि डॉक्टर ने ममता को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती होने के लिए आज की ही तारीख दी थी।
सोमवार को शव पैतृक आवास पहुंचने पर बांगरमऊ विधायक श्रीकांत कटियार, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष अरुण सिंह, हरदोई की पूर्व सांसद अंजू बाला, उनके पति सतीश वर्मा सहित कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के लोगों ने गांव पहुंचकर पिता व अन्य परिजनों को ढाढ़स बंधाया। भाई अवधेश ने नानामऊ घाट पर चिता को अग्नि दी। भाजपा नेता बलाराव गुप्ता, पूर्व विधायक बदलू खां, भाजपा नेता अर्जुन लाल दिवाकर, विवेक पटेल, सपा नेता मुन्ना अल्वी, अधिवक्ता संजीव त्रिवेदी कोतवाली अखिलेशचंद्र पांडेय और फतेहपुर चौरासी एसओ ज्ञानेंद्र सिंह मौजूद रहे।
सीएम को पत्र लिख की थी जमीन कब्जाने की शिकायत
महाराणा प्रताप चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह ने 13 नवंबर 2024 को तत्कालीन एसडीएम से बांगरमऊ नगर पालिका के बाहर गाटा संख्या 488 च, 488 ब रकबा करीब छह बीघा की भूमि खरीद कर बगैर धारा 80 के प्लॉटिंग करने और तहसील परिसर के दर्ज रास्ते से प्लॉटिंग के लिए रास्ता देने के आरोप लगा शिकायत की। कोई कार्रवाई न होने पर 16 नवंबर 2024 को दोबारा प्रार्थनापत्र दिया।
जांच में खानापूर्ति होने पर सीएम को पत्र भेजकर तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, सबरजिस्ट्रार, लेखपाल के खिलाफ मंडलायुक्त लखनऊ की अध्यक्षता में जांच कराकर कार्रवाई की मांग की थी। सीएम से शिकायत के बाद कई बार जांच होने के बाद भी जमीन बगैर धारा 80 के प्लॉटिंग कर दी गई। यही नहीं एसडीएम की मिलीभगत से प्लॉटिंग के लिए तहसील के रास्ते से ही रास्ता भी दे दिया गया। इस जमीन में रणंजय प्रताप सिंह उर्फ मोनू सिंह के भतीजे वर्तमान क्रय विक्रय समिति अध्यक्ष आदर्श प्रताप सिंह भी हिस्सेदार हैं। रणंजय प्रताप साल 2013 से 2023 तक क्रय विक्रय समिति अध्यक्ष रहे हैं।
चर्चा है कि बांगरमऊ निवासी आदित्य राजपूत भी प्लॉटिंग का काम करते हैं। जिन जमीनों पर विवाद होता है, उनको सुलझाने का काम रणंजय के माध्यम से किया जाता है। आकाश राजपूत अधिकतर जमीनें खरीद कर बोधेश्वर मंदिर के आसपास लतीफपुर, रबड़ी सहित अन्य स्थानों पर प्लॉटिंग की है।
दो अंगरक्षक, फिर भी अपहरण कर हत्या
पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के जेल जाने और उम्रकैद की सजा होने के बाद धीरेंद्र ने राजनीति से दूरी बना ली थी और बड़े-बड़े अधिकारियों से नजदीकी बढ़ा ली थी। अफसरों से नजदीकी और सत्ता दल से करीबी होने के कारण शासन की स्वीकृति पर 2021 में उसे दो गनर मिले थे, जिनका उन्हें रुपये भी नहीं देना था। दो अंगरक्षक होने के बाद भी अपहरण करके हत्या की घटना पर एसपी जयप्रकाश सिंह ने बताया कि दोनों गनर लखनऊ में थे, वहां से अभी रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के पर गनर की लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई अवश्य की जाएगी।
लखनऊ एसटीएफ ने बांगरमऊ से कई को उठाया, प्रॉपर्टी डीलर भी शामिल
हत्या की जांच में लखनऊ से आई एसटीएफ टीम बांगरमऊ के कई लोगों से पूछताछ कर रही है। पुलिस के अनुसार मृतक के चालक रवि ने पूछताछ में बांगरमऊ निवासी एक युवक का नाम लिया था। इसके बाद एसटीएफ ने उससे पूछताछ की थी और बाद में उन्हें घर भेज दिया था। सोमवार को भी उनसे दोबारा पूछताछ किए जाने की चर्चा रही। सहदानी गांव निवासी और प्लॉटिंग के काम से जुड़े युवक से भी एसटीएफ के पूछताछ किए जाने की चर्चा है।