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Unnao News: छह साल पहले आया भारत, पांच साल से उन्नाव में कर रहा था काम
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फोटो-10-पुलिस के हत्थे चढ़ा बांग्लादेशी सैफुल आलम। स्रोत पुलिस
- फोटो : मृतक राजेश दीक्षित।
सोनिक (उन्नाव)। एटीएस के हत्थे चढ़ा बांग्लादेशी छह साल पहले भारत आया था। पांच साल में दही थानाक्षेत्र के दो स्लॉटर हाउसों में काम कर रहा था लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी।
एटीएस लखनऊ के फील्ड यूनिट प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह ने बताया कि पूछताछ में बांग्लादेशी सैफुल आलम ने बताया कि उसने छह साल पहले बांग्लादेश से बेनापोल 24 परगना बॉर्डर से अवैध तरीके से भारत में प्रवेश किया। एक साल तक मुंबई में पंखे के रेगुलेटर बनाने का काम किया फिर वहां से उन्नाव आ गया। एक साल नूर मोहम्मद की नूर इंटरप्राइजेज में काम किया। इसके बाद जीएस मीट फैक्टरी में हेल्पर का काम कर रहा था। बताया कि बिना भारतीय आईडी के यहां काम नहीं मिलता, इसलिए दलाल से मिलकर फर्जी नाम पते का आधारकार्ड बनवाया। हालांकि दलाल का नाम उसने नहीं बताया। चर्चा यह भी कि जिस समय वह स्लॉटर हाउस आया था, वह नाबालिग था।
उठ रहे सवाल
जांच सिस्टम कैसे हो गया फेल
कैसे बनवा लिए गए फर्जी दस्तावेज, जांच में कैसे पास हो गए।
तहसील से क्या बिना जांच के ही जारी हो गया निवास प्रमाणपत्र।
पासपोर्ट वेरिफिकेशन में भी नहीं पकड़ा गया।
उन्नाव में रहकर उस समय क्या कोई नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था।
छह महीने में पकड़ा गया दूसरा बांग्लादेशी
इसी कंपनी में काम करता मिला था बांग्लादेशी नसीम
सोनिक। दही थाना क्षेत्र के स्लॉटर हाउस से एटीएस ने छह महीने में दूसरा बांग्लादेशी गिरफ्तार किया है। इसमें नूर इंटर प्राइजेज के मालिक नूर मोहम्मद की बांग्लादेशियों से नजदीकी सामने आई है। छह महीने पहले पकड़ा गया बांग्लादेशी भी इनकी कंपनी में काम कर चुका था और अब पकड़ा गया बांग्लादेशी भी पहले इन्हीं की कंपनी में काम किया, फिर स्लॉटर हाउस गया।
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लखनऊ स्थित एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन जांच में आठ सितंबर 2025 को बांग्लादेशी मोहम्मद नसीम गिरफ्तार हुआ था। जांच में उसके पास से दही थानाक्षेत्र के गढ़ी गांव का वर्ष 2017-18 का आधार कार्ड, तहसील का निवास प्रमाणपत्र और पैन कार्ड भी मिला था। नसीम का इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर साल 2019 में पासपोर्ट भी जारी हुआ था। मो. नसीम भी साल 2015 में त्रिपुरा बॉर्डर से अवैध रूप से भारत में घुसा और सीधे उन्नाव के गढ़ी इलाके में पहुंच गया। यहां पहले नूर इंटरप्राइजेज में किया था, फिर वह भी स्लॉटर हाउस पहुंच गया था। नसीम के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने टीकरगढ़ी के पूर्व प्रधान नीरज यादव और नूर इंटर प्राइजेज के मालिक नूर मोहम्मद से भी पूछताछ की थी। उन्हें जेल भेजा गया था। मौजूदा समय में जमानत पर बाहर हैं। बुधवार को पकड़ा गया बांग्लादेशी सैफुल आलम ने भी पहले नूर इंटर प्राइजेज में काम किया और फिर स्टार हाउस में काम करता मिला था।
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जिले में लगातार मिल रहे घुसपैठिए खुफिया एजेंसियों पर सवाल
बीघापुर और गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र में भी मिल चुके हैं बांग्लादेशी
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। जिले में लगातार बांग्लादेशी मिलने से खुफिया एजेंसियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। दही थानाक्षेत्र के स्लॉटर हाउस में बांग्लादेशी युवक के काम करने का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले गंगाघाट और बीघापुर कोतवाली क्षेत्र में भी बांग्लादेशी मिल चुके हैं। यही नहीं बीघापुर क्षेत्र में मिले बांग्लादेशियों ने पकड़े जाने के बाद जमानत के लिए फर्जी अभिलेख तक लगाए हैं, इससे उनकी जमानत भी खारिज हुई है।
रायबरेली जिले के थाना लालगंज के नवरंग का पुरवा निवासी मानू सोनी ने बीघापुर कोतवाली में 21 फरवरी 2025 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सऊदी मुद्रा रियाल का लालच देकर उनके साथ महिला सहित दो युवकों ने 1.55 लाख की ठगी कर ली। जांच में पुलिस ने मथुरा जिले के थाना लोहवन के रघुवीर बिहार कॉलोनी जमुना निवासी अब्दुल हुसैन, पश्चिम बंगाल के जिला उत्तर के थाना जीवनतला के काली कतला गांव निवासी मासूम मुल्ला, मथुरा के कोदवन गांव निवासी मिंटू, उसकी पत्नी हमीदा और मथुरा के रघुवीर बिहार कॉलोनी निवासी अफरोजा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में पुलिस जांच में यह भी सामने आया था कि मिंटू और उसकी पत्नी हमीदा बांग्लादेशी हैं। यहां पर फर्जी तरीके दस्तावेज बनवाकर रह रहे थे। हमीदा ने अपनी जमानत के लिए दो अप्रैल को जिला जज कोर्ट से अर्जी डाली। नौ अप्रैल को एसीजेएम तृतीय के यहां से जमानत मंजूर हुई। लेकिन विवेचक सूरज सिंह ने सत्यापन में लगाए गए अभिलेख फर्जी पाए थे।
वहीं गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र के मनोहर नगर में भी विदेशी नागरिकों के फर्जी आधार कार्ड और अन्य प्रपत्र बनवाने में सहयोग करने वाले पूर्व सभासद शहजादे को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस ने जांच में पाया था कि इस मोहल्ले में रहने वाले मो. साहिल उसकी पत्नी अजीदा, उसका भाई अनवर, उसकी पत्नी नूरकायदा, हवीबुल्ला और असमत, उनकी मां रोहिमा, पिता याहियां, जुनैद, उसकी पत्नी सिनवारा बेगम सभी मो0 सिद्दरफारा मोगंडो सिटी जिला बुसीडोंग म्यांमार के रहने वाले हैं। इन सभी के बच्चे भी मिले थे।
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एटीएस लखनऊ के फील्ड यूनिट प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह ने बताया कि पूछताछ में बांग्लादेशी सैफुल आलम ने बताया कि उसने छह साल पहले बांग्लादेश से बेनापोल 24 परगना बॉर्डर से अवैध तरीके से भारत में प्रवेश किया। एक साल तक मुंबई में पंखे के रेगुलेटर बनाने का काम किया फिर वहां से उन्नाव आ गया। एक साल नूर मोहम्मद की नूर इंटरप्राइजेज में काम किया। इसके बाद जीएस मीट फैक्टरी में हेल्पर का काम कर रहा था। बताया कि बिना भारतीय आईडी के यहां काम नहीं मिलता, इसलिए दलाल से मिलकर फर्जी नाम पते का आधारकार्ड बनवाया। हालांकि दलाल का नाम उसने नहीं बताया। चर्चा यह भी कि जिस समय वह स्लॉटर हाउस आया था, वह नाबालिग था।
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उठ रहे सवाल
जांच सिस्टम कैसे हो गया फेल
कैसे बनवा लिए गए फर्जी दस्तावेज, जांच में कैसे पास हो गए।
तहसील से क्या बिना जांच के ही जारी हो गया निवास प्रमाणपत्र।
पासपोर्ट वेरिफिकेशन में भी नहीं पकड़ा गया।
उन्नाव में रहकर उस समय क्या कोई नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था।
छह महीने में पकड़ा गया दूसरा बांग्लादेशी
इसी कंपनी में काम करता मिला था बांग्लादेशी नसीम
सोनिक। दही थाना क्षेत्र के स्लॉटर हाउस से एटीएस ने छह महीने में दूसरा बांग्लादेशी गिरफ्तार किया है। इसमें नूर इंटर प्राइजेज के मालिक नूर मोहम्मद की बांग्लादेशियों से नजदीकी सामने आई है। छह महीने पहले पकड़ा गया बांग्लादेशी भी इनकी कंपनी में काम कर चुका था और अब पकड़ा गया बांग्लादेशी भी पहले इन्हीं की कंपनी में काम किया, फिर स्लॉटर हाउस गया।
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लखनऊ स्थित एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन जांच में आठ सितंबर 2025 को बांग्लादेशी मोहम्मद नसीम गिरफ्तार हुआ था। जांच में उसके पास से दही थानाक्षेत्र के गढ़ी गांव का वर्ष 2017-18 का आधार कार्ड, तहसील का निवास प्रमाणपत्र और पैन कार्ड भी मिला था। नसीम का इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर साल 2019 में पासपोर्ट भी जारी हुआ था। मो. नसीम भी साल 2015 में त्रिपुरा बॉर्डर से अवैध रूप से भारत में घुसा और सीधे उन्नाव के गढ़ी इलाके में पहुंच गया। यहां पहले नूर इंटरप्राइजेज में किया था, फिर वह भी स्लॉटर हाउस पहुंच गया था। नसीम के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने टीकरगढ़ी के पूर्व प्रधान नीरज यादव और नूर इंटर प्राइजेज के मालिक नूर मोहम्मद से भी पूछताछ की थी। उन्हें जेल भेजा गया था। मौजूदा समय में जमानत पर बाहर हैं। बुधवार को पकड़ा गया बांग्लादेशी सैफुल आलम ने भी पहले नूर इंटर प्राइजेज में काम किया और फिर स्टार हाउस में काम करता मिला था।
जिले में लगातार मिल रहे घुसपैठिए खुफिया एजेंसियों पर सवाल
बीघापुर और गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र में भी मिल चुके हैं बांग्लादेशी
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। जिले में लगातार बांग्लादेशी मिलने से खुफिया एजेंसियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। दही थानाक्षेत्र के स्लॉटर हाउस में बांग्लादेशी युवक के काम करने का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले गंगाघाट और बीघापुर कोतवाली क्षेत्र में भी बांग्लादेशी मिल चुके हैं। यही नहीं बीघापुर क्षेत्र में मिले बांग्लादेशियों ने पकड़े जाने के बाद जमानत के लिए फर्जी अभिलेख तक लगाए हैं, इससे उनकी जमानत भी खारिज हुई है।
रायबरेली जिले के थाना लालगंज के नवरंग का पुरवा निवासी मानू सोनी ने बीघापुर कोतवाली में 21 फरवरी 2025 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सऊदी मुद्रा रियाल का लालच देकर उनके साथ महिला सहित दो युवकों ने 1.55 लाख की ठगी कर ली। जांच में पुलिस ने मथुरा जिले के थाना लोहवन के रघुवीर बिहार कॉलोनी जमुना निवासी अब्दुल हुसैन, पश्चिम बंगाल के जिला उत्तर के थाना जीवनतला के काली कतला गांव निवासी मासूम मुल्ला, मथुरा के कोदवन गांव निवासी मिंटू, उसकी पत्नी हमीदा और मथुरा के रघुवीर बिहार कॉलोनी निवासी अफरोजा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में पुलिस जांच में यह भी सामने आया था कि मिंटू और उसकी पत्नी हमीदा बांग्लादेशी हैं। यहां पर फर्जी तरीके दस्तावेज बनवाकर रह रहे थे। हमीदा ने अपनी जमानत के लिए दो अप्रैल को जिला जज कोर्ट से अर्जी डाली। नौ अप्रैल को एसीजेएम तृतीय के यहां से जमानत मंजूर हुई। लेकिन विवेचक सूरज सिंह ने सत्यापन में लगाए गए अभिलेख फर्जी पाए थे।
वहीं गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र के मनोहर नगर में भी विदेशी नागरिकों के फर्जी आधार कार्ड और अन्य प्रपत्र बनवाने में सहयोग करने वाले पूर्व सभासद शहजादे को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस ने जांच में पाया था कि इस मोहल्ले में रहने वाले मो. साहिल उसकी पत्नी अजीदा, उसका भाई अनवर, उसकी पत्नी नूरकायदा, हवीबुल्ला और असमत, उनकी मां रोहिमा, पिता याहियां, जुनैद, उसकी पत्नी सिनवारा बेगम सभी मो0 सिद्दरफारा मोगंडो सिटी जिला बुसीडोंग म्यांमार के रहने वाले हैं। इन सभी के बच्चे भी मिले थे।