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Unnao News: प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में जिला भी शामिल, साढ़े पांच लाख किसानों को होगा फायदा
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फोटो-4-फसल बोने के लिए खेत की जुताई करता किसान। संवाद
उन्नाव। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना में जिले को शामिल किया गया है। फसलों की कम पैदावार वाले 100 जिलों में शामिल जनपद में भी योजना के लागू होने से यहां के करीब साढ़े पांच लाख किसानों को फायदा पहुंचेगा। योजना के जरिए जहां फसलों की पैदावार में सुधार का प्रयास किया जाएगा। वहीं तैयार उपज के भंडारण की भी व्यवस्था होगी।
इस साल के केंद्रीय बजट 2025-26 में केंद्र सरकार ने छह वर्षों के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना से सौ जिलों के कृषि क्षेत्र में विकसित करने को बजट की व्यवस्था की थी। इसके बाद सांसद डॉ. हरि साक्षी महाराज ने केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर जिले को योजना में शामिल कराने का अनुरोध किया था।
इसी पत्र के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सांसद को पत्र भेजकर सौ जिले में उन्नाव को भी शामिल किए जाने की जानकारी दी है। योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता को बढ़ाना है। इसके लिए किसानों को फसल विविधीकरण यानि विभिन्न प्रकार की फसलों को उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पंचायत और ब्लॉकस्तर पर फसलों के भंडारण की व्यवस्था होगी। सिंचाई सुविधाओं में सुधार और साधन बढ़ाए जाएंगे। किसानों को दीर्घ व अल्पकालिक ऋण की भी सुविधा दी जाएगी। योजना के धरातल पर लागू होने के बाद से जिले के किसानों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है।
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इंसेट-1
पारंपरिक खेती पर ज्यादा निर्भर हैं जिले के किसान
जिले में कुल किसानों की संख्या करीब 5.50 लाख है। अधिकांश किसान पारंपरिक खेती जैसे गेहूं, धान व आलू को ही प्राथमिकता देते हैं। हालांकि कभी मौसम की मार तो कभी सिंचाई, रोग आदि कारणों से फसलों की जो पैदावार होनी चाहिए, वह नहीं हो पाती है। अमूमन गेहूं की औसत पैदावार एक बीघे में करीब 13 से 14 क्विंटल है लेकिन यहां के किसान 11 से 12 क्विंटल प्रति बीघा ही पैदा कर पाते हैं।
कमोबेश यही स्थिति धान की भी है। इसी कारण जिले में फसलों की उत्पादकता काफी कम है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति भी अपेक्षाकृत सुदृढ़ नहीं है। अब योजना के लागू होने के बाद किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए जागरुक किया जाएगा। इससे पैदावार बढ़ेगी। साथ ही किसानों को औद्यानिक यानि फल, सब्जी, मत्स्य, मधुमक्खी, मुर्गी व पशुपालन भी कराया जाएगा। योजना की प्रगति की निगरानी के लिए एक किसान एप भी जारी होगा।
बॉक्स
जिले में भूमि की स्थिति (लगभग में)
जिले में कुल जमीन-454676 हेक्टेयर
खेतिहर भूमि-291298 हेक्टेयर
किसानों की संख्या-करीब 5.50 लाख
नहरों से सिंचाई-62433 हेक्टेयर
नलकूप से सिंचाई का क्षेत्रफल-17500 हेक्टेयर
शेष निजी ट्यूवबेल और पंपों के जरिए।
वर्जन...
योजना में जनपद को शामिल किए जाने से यहां के किसानों को फायदा होगा। फसलों की उत्पादकता में जहां सुधार पर काम होगा, वहीं किसानों को अन्य बागवानी, पशुपालन के लिए भी जागरुक किया जाएगा। अगले माह से योजना के शुरू होने की संभावना है। शशांक कुमार, जिला कृषि अधिकारी।
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इस साल के केंद्रीय बजट 2025-26 में केंद्र सरकार ने छह वर्षों के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना से सौ जिलों के कृषि क्षेत्र में विकसित करने को बजट की व्यवस्था की थी। इसके बाद सांसद डॉ. हरि साक्षी महाराज ने केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर जिले को योजना में शामिल कराने का अनुरोध किया था।
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इसी पत्र के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सांसद को पत्र भेजकर सौ जिले में उन्नाव को भी शामिल किए जाने की जानकारी दी है। योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता को बढ़ाना है। इसके लिए किसानों को फसल विविधीकरण यानि विभिन्न प्रकार की फसलों को उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पंचायत और ब्लॉकस्तर पर फसलों के भंडारण की व्यवस्था होगी। सिंचाई सुविधाओं में सुधार और साधन बढ़ाए जाएंगे। किसानों को दीर्घ व अल्पकालिक ऋण की भी सुविधा दी जाएगी। योजना के धरातल पर लागू होने के बाद से जिले के किसानों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है।
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इंसेट-1
पारंपरिक खेती पर ज्यादा निर्भर हैं जिले के किसान
जिले में कुल किसानों की संख्या करीब 5.50 लाख है। अधिकांश किसान पारंपरिक खेती जैसे गेहूं, धान व आलू को ही प्राथमिकता देते हैं। हालांकि कभी मौसम की मार तो कभी सिंचाई, रोग आदि कारणों से फसलों की जो पैदावार होनी चाहिए, वह नहीं हो पाती है। अमूमन गेहूं की औसत पैदावार एक बीघे में करीब 13 से 14 क्विंटल है लेकिन यहां के किसान 11 से 12 क्विंटल प्रति बीघा ही पैदा कर पाते हैं।
कमोबेश यही स्थिति धान की भी है। इसी कारण जिले में फसलों की उत्पादकता काफी कम है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति भी अपेक्षाकृत सुदृढ़ नहीं है। अब योजना के लागू होने के बाद किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए जागरुक किया जाएगा। इससे पैदावार बढ़ेगी। साथ ही किसानों को औद्यानिक यानि फल, सब्जी, मत्स्य, मधुमक्खी, मुर्गी व पशुपालन भी कराया जाएगा। योजना की प्रगति की निगरानी के लिए एक किसान एप भी जारी होगा।
बॉक्स
जिले में भूमि की स्थिति (लगभग में)
जिले में कुल जमीन-454676 हेक्टेयर
खेतिहर भूमि-291298 हेक्टेयर
किसानों की संख्या-करीब 5.50 लाख
नहरों से सिंचाई-62433 हेक्टेयर
नलकूप से सिंचाई का क्षेत्रफल-17500 हेक्टेयर
शेष निजी ट्यूवबेल और पंपों के जरिए।
वर्जन...
योजना में जनपद को शामिल किए जाने से यहां के किसानों को फायदा होगा। फसलों की उत्पादकता में जहां सुधार पर काम होगा, वहीं किसानों को अन्य बागवानी, पशुपालन के लिए भी जागरुक किया जाएगा। अगले माह से योजना के शुरू होने की संभावना है। शशांक कुमार, जिला कृषि अधिकारी।