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Unnao News: स्वाइन फ्लू का एक और मरीज मिला
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उन्नाव। जिले में हर दिन स्वाइन फ्लू के मरीज मिल रहे हैं। बुधवार को आई जांच रिपोर्ट में वृद्धा में संक्रमण की पुष्टि हुई है। जिले में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़कर छह पहुंच गई है।
नवाबगंज ब्लॉक के देवीपुरवा जगदीशपुर गांव निवासी 71 वर्षीय वृद्धा को सांस लेने में तकलीफ थी। दवा देने के बाद भी हालत में सुधार न होने पर परिजन उन्हें लेकर कानपुर के निजी अस्पताल में पहुंचे। डॉक्टरों ने स्वाइन फ्लू के संभावित लक्षण देखकर उनकी जांच कराई। रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है।
फिजीशियन डॉ. कौशलेंद्र प्रकाश ने बताया कि स्वाइन फ्लू या एचवनएनवन एक संक्रामक बीमारी है जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलती है। बारिश के मौसम में हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है। इससे संक्रमित व्यक्ति के छींकने, खांसने से निकले एयर ड्रापलेट में मौजूद एच1एन1 वायरस हवा और सतहों पर लंबे समय तक जिंदा रहता है। इसके कारण बारिश में बीमारी के मरीज तेजी से बढ़ते हैं। अधिकांश लोगों में पांच से सात दिनों में यह बीमारी ठीक हो जाती है। हालांकि पांच साल से छोटे बच्चे, बुजुर्ग व गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए बीमारी घातक साबित हो सकती है। ऐसे में मरीजों को मास्क, सैनेटाइजर का प्रयोग करना चाहिए। भीड़भाड़ में जाने से बचना चाहिए और बीमारी के संभावित लक्षण होने पर जांच करानी चाहिए।
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नवाबगंज ब्लॉक के देवीपुरवा जगदीशपुर गांव निवासी 71 वर्षीय वृद्धा को सांस लेने में तकलीफ थी। दवा देने के बाद भी हालत में सुधार न होने पर परिजन उन्हें लेकर कानपुर के निजी अस्पताल में पहुंचे। डॉक्टरों ने स्वाइन फ्लू के संभावित लक्षण देखकर उनकी जांच कराई। रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है।
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फिजीशियन डॉ. कौशलेंद्र प्रकाश ने बताया कि स्वाइन फ्लू या एचवनएनवन एक संक्रामक बीमारी है जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलती है। बारिश के मौसम में हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है। इससे संक्रमित व्यक्ति के छींकने, खांसने से निकले एयर ड्रापलेट में मौजूद एच1एन1 वायरस हवा और सतहों पर लंबे समय तक जिंदा रहता है। इसके कारण बारिश में बीमारी के मरीज तेजी से बढ़ते हैं। अधिकांश लोगों में पांच से सात दिनों में यह बीमारी ठीक हो जाती है। हालांकि पांच साल से छोटे बच्चे, बुजुर्ग व गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए बीमारी घातक साबित हो सकती है। ऐसे में मरीजों को मास्क, सैनेटाइजर का प्रयोग करना चाहिए। भीड़भाड़ में जाने से बचना चाहिए और बीमारी के संभावित लक्षण होने पर जांच करानी चाहिए।
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