फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Unnao News ›   Unique school making poor girls skilled in farming

गरीब बच्चियों को खेती में हुनरमंद बना रहा अनोखा स्कूल

Sat, 12 Oct 2019 01:21 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 12 Oct 2019 01:21 AM IST
विज्ञापन
Unique school making poor girls skilled in farming
असोहा के गुड हारवेस्ट स्कूल में मशरूम की खेती का प्रशिक्षण लेतीं बेटियां। - फोटो : UNNAO
उन्नाव। असोहा विकासखंड के जबरेला गांव में इन दिनों एक अनोखे स्कूल की खूब चर्चा है। इस स्कूल को लाखों का पैकेज छोड़कर आए लखनऊ के दंपति ने खोला है। खास यह कि इसमें सिर्फ लड़कियों को प्रवेश मिलता है। दंपति ने इन्हें सामान्य पढ़ाई के साथ उन्नत खेती की शिक्षा में पारंगत बनाने का बीड़ा उठाया है। पति-पत्नी दोनों, इन लड़कियों को पारंपरिक खेती के अलावा सब्जी व दूसरे प्रदेशों में होने वाली फसलों को तैयार करने में दक्ष बनाने में लगे हैं।
विज्ञापन

स्कूल का नाम है ‘द गुड हारवेस्ट’। इसे अनीश नाथ और उनकी पत्नी अतिशा नाथ चलाती हैं। अनीश नाथ बताते हैं कि उनके पिता शैलेंद्र नाथ मूलरूप से मध्यप्रदेश के छतरपुर के रहने वाले थे। लखनऊ पीजीआई में पिता की नौकरी लगने के बाद 1988 में वे परिवार के साथ लखनऊ के तेलीबाग में रहने लगे थे। यहां बीकॉम के बाद अनीश ने मास कम्युनिकेशन किया। फिर दिल्ली की मार्केटिंग कंपनी में 7 लाख सालाना पैकेज पर नौकरी शुरू की। इस बीच उनका विवाह गोंडा जिले में उतरौला निवासी अतिशा के साथ हुआ। एमएससी व बीएड पास अतिशा ने दिल्ली में एक एनजीओ में काम करने के साथ ही एक स्कूल में सालाना पांच लाख के पैकेज पर नौकरी की। लेकिन कुछ ही दिनों में पति-पत्नी का नौकरी से मन उचट गया। 2013 में दोनों लखनऊ आ गए।
विज्ञापन

अनीश ने बताया कि मन में कुछ नया करने का विचार आया तो कुछ दोस्तों के साथ घूमने असोहा आए। यहां खेतों में लहलहाती फसलें देख उनका मन भी खेती की ओर आकर्षित हो गया। अतिशा ने उनका साथ दिया। फिर परिजनों व कुछ दोस्तों की मदद से गांव में दो एकड़ जमीन खरीदी। पौधरोपण करके फार्म हाउस बनाया। धीरे-धीरे पारंपरिक (गेहूं, धान) खेती के अलावा सब्जी व दलहनी, तिलहनी फसलों की पैदावार शुरू की। कुछ सफलता मिली तो अब से तीन साल पहले वर्ष 2016 में उन दोनों ने गरीब बच्चियों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

गरीब बच्चियों को देख मन द्रवित हो जाता था
गांधीवादी विचारधारा के अनीश का मन गरीब बच्चियों को देख द्रवित हो जाता था। उन्होंने ऐसी लड़कियों को शिक्षित करना शुरू किया जो स्कूल नहीं जा रही थीं। उन्हें अपने पास से कापी किताबें देकर शिक्षित करने के साथ ही खेती किसानी में पारंगत करने के लिए फार्म हाउस में ही द गुड हारवेस्ट नाम से स्कूल की आधारशिला रखी। स्कूल में केवल बेटियों को ही निशुल्क पढ़ाई की सुविधा है। अनीश इन्हें स्वावलंबी बनाना चाहते हैं ताकि उन्हें किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े।
4 से 12 साल की बेटियां सीख रही खेती के गुर
स्कूल में 4 से 12 साल की उम्र की बेटियां कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई के साथ पारंपरिक खेती के अलावा सब्जियाें व मशरूम की पैदावार करने के गुर सीख रही हैं। तीन साल में 45 बच्चियाें ने दाखिला लिया है। इसके लिए अनीश और अतिशा को बच्चियों के अभिभावकों को खूब समझाना पड़ा। पति-पत्नी पांच दिन स्कूल में बिताते हैं। शनिवार-रविवार लखनऊ में रहते हैं। उनकी भी अपनी दो बेटियां सारा (4) और सायरा (2) हैं। दोनों को साथ ही रखते हैं। सारा भी अन्य बच्चियों के साथ उनकी कक्षा में जाकर बैठती है और खेती के गुर सीखती है। उन्होंने स्कूल में एक हाईटेक पुस्तकालय भी बनाया है।

ऑन लाइन चलाते हैं कैंपेन
अनीश आर्थिक जरूरत पूरी करने के लिए ऑन लाइन कैंपेन चलाते हैं। उसके जरिए विदेशी उनके फार्म हाउस आते हैं। यहां ठहरते हैं। खेती किसानी देखते हैं। विदेशी मेहमानों के जरिए आर्थिक मदद भी मिल जाती है। जबकि खाने की व्यवस्था खेती के माध्यम से जुटा लेते हैं।

असोहा के जबरेला गांव स्थित अपने द गुड हारवेस्ट स्कूल परिसर स्थित मिर्च के खेत में अनीश नाथ व अतिश?

असोहा के जबरेला गांव स्थित अपने द गुड हारवेस्ट स्कूल परिसर स्थित मिर्च के खेत में अनीश नाथ व अतिश?- फोटो : UNNAO

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed