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केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री ने लिया ओलावृष्टि से नुकसान हुई खेती का जायजा
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Sun, 05 Apr 2015 11:29 PM IST
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उन्नाव। जनपद में ओलावृष्टि व बारिश से हुए नुकसान की सपा सरकार द्वारा भेजी गई रिपोर्ट को केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ. संजीव कुमार बाल्यान ने खारिज कर दी।
जिले के दौरे पर आए राज्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सर्वे के माध्यम से नुकसान का आकलन कर जो रिपोर्ट भेजी है वह गलत है। फसलों का स्थलीय निरीक्षण और मिली रिपोर्ट अलग-अलग आंकड़े दे रही है।
खेतों पर जाकर किए निरीक्षण में आंकड़ों से ज्यादा नुकसान दिखा है। ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा भेजी गई रिपोर्ट को सही नहीं कहा जा सकता है। पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से वार्ता करते हुए किसानों को मुआवजा मिलने में देरी का ठीकरा प्रदेश सरकार पर फोड़ा। कहा कि हसनगंज में उन्होंने खुद खेतों में जाकर निरीक्षण किया।
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ओलावृष्टि व असमय बारिश से तबाह हुई फसलों को देखा। कहा कि प्रदेश सरकार ने ओलावृष्टि व बारिश से नुकसान की जो रिपोर्ट भेजी है उसमें जनपद के लिए मात्र 14 करोड़ 40 लाख रुपये ही मांगे हैं। स्थलीय निरीक्षण में उन्हें इससे कहीं ज्यादा नुकसान दिखा है।
किसानों ने उन्हें किसी प्रकार का सर्वे न होने की जानकारी दी। रास्ते में उन्होंने एसडीएम से पूछा कि कहां सर्वे कराया तो वह भी सही जवाब नहीं दे सके। इसका सीधा सा अर्थ है कि राजस्वकर्मियों ने कार्यालय और घरों में बैठकर ही सर्वे कर लिया और मनमानी रिपोर्ट भेज दी। कृषि राज्यमंत्री ने कहा कि दुबारा सही सर्वे कराने के लिए प्रदेश सरकार को पत्र भेजा जाएगा।
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जिले के दौरे पर आए राज्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सर्वे के माध्यम से नुकसान का आकलन कर जो रिपोर्ट भेजी है वह गलत है। फसलों का स्थलीय निरीक्षण और मिली रिपोर्ट अलग-अलग आंकड़े दे रही है।
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खेतों पर जाकर किए निरीक्षण में आंकड़ों से ज्यादा नुकसान दिखा है। ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा भेजी गई रिपोर्ट को सही नहीं कहा जा सकता है। पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से वार्ता करते हुए किसानों को मुआवजा मिलने में देरी का ठीकरा प्रदेश सरकार पर फोड़ा। कहा कि हसनगंज में उन्होंने खुद खेतों में जाकर निरीक्षण किया।
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ओलावृष्टि व असमय बारिश से तबाह हुई फसलों को देखा। कहा कि प्रदेश सरकार ने ओलावृष्टि व बारिश से नुकसान की जो रिपोर्ट भेजी है उसमें जनपद के लिए मात्र 14 करोड़ 40 लाख रुपये ही मांगे हैं। स्थलीय निरीक्षण में उन्हें इससे कहीं ज्यादा नुकसान दिखा है।
किसानों ने उन्हें किसी प्रकार का सर्वे न होने की जानकारी दी। रास्ते में उन्होंने एसडीएम से पूछा कि कहां सर्वे कराया तो वह भी सही जवाब नहीं दे सके। इसका सीधा सा अर्थ है कि राजस्वकर्मियों ने कार्यालय और घरों में बैठकर ही सर्वे कर लिया और मनमानी रिपोर्ट भेज दी। कृषि राज्यमंत्री ने कहा कि दुबारा सही सर्वे कराने के लिए प्रदेश सरकार को पत्र भेजा जाएगा।