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Unnao News: कनेक्शन और रीडिंग के नाम पर भी होती है वसूली
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उन्नाव। बिजली विभाग में नए कनेक्शन लेने में भी लोगों को ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ती है। विभागीय कर्मी सरकारी रसीद से ज्यादा की वसूली करते हैं। एक से दो किलोवाट तक के कनेक्शन के लिए पांच से 10 हजार रुपये तक वसूले जाते हैं।
जनपद में बिजली विभाग के पांच कार्यालय संचालित हैं। आम लोगों को बिजली कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी गई है लेकिन आवेदन के बाद कनेक्शन लेना आसान नहीं होता। विभाग में एक किलोवाट के घरेलू कनेक्शन के लिए पांच हजार रुपये तक वसूले जाते हैं। जबकि रसीद लगभग 1800 रुपये की ही कटती है। यही हाल दो किलोवाट तक के बिजली कनेक्शन पर होता है।
इसकी सरकारी फीस तो करीब 2200 रुपये है लेकिन आवेदनकर्ताओं से 10 हजार रुपये तक की वसूली की जाती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, लाइनमैन से लेकर जेई व अन्य अधिकारियों का हिस्सा तय होता है। जो अतिरिक्त रुपये नहीं देते उनका घर से पोल दूर होने या ट्रांसफार्मर कम क्षमता का होने का बहाना कर कनेक्शन देने से मना कर दिया जाता है।
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बताया जाता है कि पोल विभाग के पास नहीं हैं। जो पैसा दे देते हैं उन्हें बांस बल्लियों से भी तार खींचकर बिजली जलाने की आजादी दे दी जाती है। सूत्रों का कहना है कि विभाग में रीडिंग कम-ज्यादा करने के नाम पर भी अवैध वसूली की जाती है। बिजली कर्मचारियों व फ्रेंचाइजी की सांठगांठ से अवैध वसूली का धंधा खूब जोरों के साथ चल रहा है।
कामर्शियल कनेक्शन धारकों से रीडिंग के नाम पर वसूली की जाती है। पहले भारी-भरकम बिल दिया जाता है, फिर सेटलमेंट के जरिए सौदेबाजी की जाती है। दुकानदारों के सहमति जताने पर मीटर जलने की 1912 नंबर पर शिकायत कराते हैं। इसके बाद मीटर बदलकर बिल संशोधित थमाकर वसूली की जाती है। इसके अलावा यदि उपभोक्ता के घर या दुकान का तार टूट जाता है या पोल से समस्या आती है तो शिकायत करने के बाद भी लाइनमैन पैसे लिए बिना तार नहीं जोड़ता। जो शिकायत करता है उसके यहां विजिलेंस या विभागीय टीम को जांच के लिए भेज दिया जाता है। इसके बाद चोरी की एफआईआर तक दर्ज करा दी जाती है। इसी कारण अधिकांश लोग डर के कारण शिकायत करने सामने नहीं आते हैं।
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जनपद में बिजली विभाग के पांच कार्यालय संचालित हैं। आम लोगों को बिजली कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी गई है लेकिन आवेदन के बाद कनेक्शन लेना आसान नहीं होता। विभाग में एक किलोवाट के घरेलू कनेक्शन के लिए पांच हजार रुपये तक वसूले जाते हैं। जबकि रसीद लगभग 1800 रुपये की ही कटती है। यही हाल दो किलोवाट तक के बिजली कनेक्शन पर होता है।
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इसकी सरकारी फीस तो करीब 2200 रुपये है लेकिन आवेदनकर्ताओं से 10 हजार रुपये तक की वसूली की जाती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, लाइनमैन से लेकर जेई व अन्य अधिकारियों का हिस्सा तय होता है। जो अतिरिक्त रुपये नहीं देते उनका घर से पोल दूर होने या ट्रांसफार्मर कम क्षमता का होने का बहाना कर कनेक्शन देने से मना कर दिया जाता है।
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बताया जाता है कि पोल विभाग के पास नहीं हैं। जो पैसा दे देते हैं उन्हें बांस बल्लियों से भी तार खींचकर बिजली जलाने की आजादी दे दी जाती है। सूत्रों का कहना है कि विभाग में रीडिंग कम-ज्यादा करने के नाम पर भी अवैध वसूली की जाती है। बिजली कर्मचारियों व फ्रेंचाइजी की सांठगांठ से अवैध वसूली का धंधा खूब जोरों के साथ चल रहा है।
कामर्शियल कनेक्शन धारकों से रीडिंग के नाम पर वसूली की जाती है। पहले भारी-भरकम बिल दिया जाता है, फिर सेटलमेंट के जरिए सौदेबाजी की जाती है। दुकानदारों के सहमति जताने पर मीटर जलने की 1912 नंबर पर शिकायत कराते हैं। इसके बाद मीटर बदलकर बिल संशोधित थमाकर वसूली की जाती है। इसके अलावा यदि उपभोक्ता के घर या दुकान का तार टूट जाता है या पोल से समस्या आती है तो शिकायत करने के बाद भी लाइनमैन पैसे लिए बिना तार नहीं जोड़ता। जो शिकायत करता है उसके यहां विजिलेंस या विभागीय टीम को जांच के लिए भेज दिया जाता है। इसके बाद चोरी की एफआईआर तक दर्ज करा दी जाती है। इसी कारण अधिकांश लोग डर के कारण शिकायत करने सामने नहीं आते हैं।