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ग्रामीण बैंकों में नोटों का संकट

Sat, 12 Nov 2016 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 12 Nov 2016 12:44 AM IST
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Notes rural banks crisis
बैंक के सामने लगी भीड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

 लोगों को मायूस लौटना पड़ा। ग्रामीण बैंक में करीब डेढ़ सैकड़ा लोगों को कल बुलाया गया। इनायतपुर बर्रा की इलाहाबाद बैंक में तीन सौ लोगों को यह कहकर लौटा दिया गया कि सौ या उससे कम के नोट खत्म हैं। पुरवा की मिर्री स्थित ग्रामीण बैंक में तीन बजे के बाद कैश खत्म होने की बात कहकर करीब दो सैकड़ा लोगों को लौटा दिया गया। बांगरमऊ में बैंक आफ इंडिया शाखा में नोट बदलने के लिए एक ही काउंटर होने से पूरे दिन खचाखच भीड़ रही। जिले के सभी ग्रामीण क्षेत्रों का लगभग यही हाल है। एलडीएम एसपी शाह ने बताया कि ऐसी शिकायत नहीं मिली है फिर भी दिखवाया जाएगा और जहां भी गड़बड़ी होगी उसे दूर किया जाएगा।

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बोले किसान, खाद-बीज के लिए कहां से लाएं पैसा
औरास/असोहा (उन्नाव)। बड़े नोट के झंझट ने फिलहाल किसानों व मजदूरों को भी हलाकान कर रखा है। छोटे नोट न होने से खाद-बीज के साथ ही फसल की सिंचाई के लिए रुपयों का इंतजाम करने को किसान भटक रहे हैं। क्षेत्र के बैंकों में कैश न पहुंचने से किसान व मजदूर वर्ग परेशान है। उसे रोजी-रोटी के साथ परिवार के पेट भी पालना है। औरास के मैनी भावाखेड़ा निवासी बुजुर्ग किसान रामलाल कस्बे की पीएनबी पहुंचे। सुबह 9 बजे लाइन में लगने के बाद 12 बजे नोट बदलने वाले काउंटर पर पहुंचे तो पता चला कि करेंसी न होने से नोट नहीं बदले जा सकते। किसान रामस्वरूप, रामकुमार, सोनेलाल, श्रमिक हिम्मत सिंह, मेड़ीलाल, संदीप, अर्जुन को भी जब दोपहर बाद नकदी नहीं मिली तो व्यवस्था को कोसते नहीं थके। चकलवंशी क्षेत्र की बैंकों में कतार में खड़े रजनू, पियारा, रामरती, रमेश,रामगोपाल, रघुवीर, कैलाश, पुत्तन ने बताया कि हम लोग रोज कमाने खाने वाले हैं । इन हालातों में घर के राशन के साथ ही अन्य आवश्यकताओं को कैसे पूरा किया जाए समझ में नहीं आ रहा है।
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क्षेत्र के कांथा निवासी राजकुमार शुक्रवार की सुबह एजीबी बैंक में एक लाख के  पांच सौ व हजार की नोटों को छोटे नोट में बदलने आए थे। मैनेजर ने केवल चार हजार रुपये ही बदलकर देने की बात कही तो वो परेशान होकर बैंक से निकल आए। राजकुमार ने बातचीत में बताया कि 15 नवंबर को पुत्री की शादी होनी है। जिसमें खर्च के लिए नकदी जोड़ कर रखी थी। बड़े नोट बंद हो जान से कोई भी स्वीकार नहीं कर रहा है। जिससे तैयारियां अधर में लटक गई है। लाचार पिता व्यवस्था को कोसने को साथ ही एक ही बात कह रहा था कि कैसे करूं बेटी की शादी की तैयारी।
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असोहा में नहीं मिले नोट, बोले प्रबंधक, शनिवार को कैश आएगा
औरास। ब्लाक क्षेत्र में संचालित पंजाब नैशनल बैंक, ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त, इलाहाबाद बैंक में सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ जमा हो चुकी थी। भीड़ को उस समय तगड़ा झटका लगा जब जिम्मेदारों ने कैश न होने से बडे़ नोट बदले जाने से इंकार कर दिया। इस दौरान नकदी जमा होने का ही काम हो सका। आर्यावर्त बैंक मैनेजर पुनीत, पीएनबी औरास के मैनेजर श्याम गोपाल ने बताया कि शनिवार को कैश आएगा। जिसके बाद नकदी का वितरण किया जाएगा।
नोट के बदले हुई नोकझोंक
बांगरमऊ। बड़े नोट बंद होने से क्षेत्र में अफरा तफरी का माहौल बना हुआ है। किसान से लेकर व्यापारी तक नकदी को लेकर परेशान है। बैंकों में भीड़ से जूझ रहे लोगों ने एटीएम की तरफ रुख किया तो यहां भी मायूसी हाथ लगी। पीएनबी व एसबीआई के एटीएम तीसरे दिन भी बंद रहे। चकलवंशी। माखी में संचालित आर्यावर्त ग्रामीण बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक में पुराने नोट जमा और बदलवाने की भारी भीड़ रही। जहां पहले काउंटर तक पहुंचने को लेकर पूरा दिन खाताधारकों में तीखी नोंक झोंक होती रही। पुलिस बल की मौजूदगी के चलते भीड़ उग्र नहीं हो सकी। कमोबेस यही हाल बैंक आफ  इंडिया रऊकरना, एसबीआई परेंदा, आर्यावर्त ग्रामीण बैंक थाना में भी रहा। गंजमुरादाबाद। कस्बा स्थित बैंक आफ इंडिया व यूकों बैंक में भी नोट बदलने व नकदी जमा करने को लेकर भीड़ की मारामारी रही। बैंकों में भीड़ होने से लोगों ने एटीएम को चुना तो यहां कैश न होने से बैरंग लौटना पड़ा।
दोपहर बाद आरबीआई की मेल ने बढ़ाई दिक्कतें
बैंक खाताधारकों में जितनी चिंता बड़े नोट बदलने की दिखी। उतनी ही बैंक में जमा नकदी को निकालने में भी नजर आई। दोपहर बाद अधिकतर बैंक कैश की कमी से जूझने लगे थे। दोपहर करीब 1 बजे आरबीआई से एक मेल बैंकों को भेजी गई। जिसमें निर्देश दिया गया कि खाताधारकों को दस हजार के बजाए पांच हजार की नकदी जी जाए। तो वहीं चार हजार के स्थान पर बड़े नोट से बदलकर दो हजार की नकदी देने की बात शामिल थी। जिसके बाद बैंक प्रबंधकों ने नए नियम के तहत लेन-देन शुरू किया तो काफी दिक्कतों से भी जूझना पड़ा। एसबीआई मुख्य शाखा प्रबंधक दीपेंद्र यादव शाखा परिसर में बार-बार अनाउंसमेंट कर नए निर्देश का पालन करते हुए लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील कर रहे थे। आरबीआई की नई गाइड लाइन ने लोगों की मुसीबतों को और बढ़ा दिया।
काम नहीं आ रहे नोट, कैसे कराएं बेेटे का इलाज
आदर्शनगर स्थित बैंक आफ इंडिया में बड़े नोट बदलने आईं इंद्रानगर निवासी सपना सिंंह व करोवन निवासी माया सिंह को उस समय झटका लगा। जब घंटो लाइन में लगने के बाद बैंक खाताधारक न होने की बात कहते हुए काउंटर से लौटा दिया गया। पसीने से जूझते हुए बैंक से बाहर निकली सपना सिंह ने बातचीत में कहा कि पांच सौ व हजार के नोट के चलते मुसीबत में फंस गए हैं। बेटे की तबियत खराब है और छोटे नोट न होने के चलते डॉक्टर के पास नहीं जा पा रहे हैं। सपना ने बताया कि मैनेजर से दुखड़ा भी रोया लेकिन बात नहीं बनी।
बोले लोग, शार्टटाइम दिक्कत है, आने वाला समय अच्छा है
परेशानियां झेलने के बाद भी ज्यादातर लोग प्रधानमंत्री के कदम को साहसिक व भ्रष्टाचार खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं। पीडी नगर की शीलू सिंह का कहना है कि मोदी का फैसला स्वागत योग्य है। शार्ट टाइम की दिक्कत जरूर है, लेकिन आने वाला समय बेहतर नजर आ रहा है। लोकनगर की शिवानी दीक्षित का कहना है कि फिलहाल अभी तो घंटो लाइन में लगने के बाद पांच हजार की नकदी मिली है। फिलहाल इस बात का दर्द नहीं बल्कि मोदी की सोच पर नाज है। ईदगाह निवासी हुरुन निशां बोलीं, पांच सौ व हजार का नोट बंद करने का फैसला ठीक है। हां थोड़ा सा बदलाव करते हुए दस हजार के बजाए पचास हजार की नकदी व एटीएम से निकासी की सीमा पूर्वरत रखा जाए। सिरौसी निवासी अंबुज मिश्र का कहना है कि मोदी के इस फैसले से वह काफी खुश हूं। आतंकवाद के साथ ही बड़ी रकम दबाए बैठे लोगों को करारा झटका है।


ज्यादातर एटीएम दो से तीन घंटे में ही शोपीस बने
हर किसी के जेब में पैसे तो हैं लेकिन उनमें से अधिकतर पांच सौ व हजार के नोट शामिल हैं। दो दिन एटीएम बंद होने के बाद शुक्रवार की सुबह 10 बजे जैसे ही चालू हुए, लोगों में सौ-सौ के नोट निकालने की हायतौबा मच गई। बैंकों के साथ ही एटीएम भी भीड़ से पट गए। दोपहर के एक बजने तक अधिकतर एटीएम का कैश खत्म हो चुका था। जिनमें से जिला पंचायत कार्यालय के बगल में एसबीआई का एटीएम, एसपी बंगला के सामने का एटीएम, सब्जी मंडी स्थित पीएनबी व आईसीसीआई का एटीएम, बैंक आफ बड़ौदा, देना बैंक, एक्सिस बैंक आदि के एटीएम घंटो शोपीस बने रहे।

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