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प्रशिक्षण में खानापूरी और खा गए लाखों की सब्जी-पूड़ी
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Mon, 03 Apr 2017 12:12 AM IST
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सफीपुर के परियर न्याय पंचायत जूड़ापुरवाप्रबंध समिति प्रशिक्षण में सदस्य।
- फोटो : अमर उजाला
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अभिभावक समिति के सदस्यों को उनके कर्तव्यों को याद दिलाने और उन्हें दायित्व से रूबरू कराने के लिए दिए जाने वाले प्रशिक्षण में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने खानापूरी की और लाखों रुपये के बजट में घालमेल किया। जिले में संचालित बेसिक के 3137 परिषदीय स्कूल व 13 केजीबी स्कूलों में गठित एसएमसी (विद्यालय प्रबंध समिति) के तीन दिवसीय प्रशिक्षण के लिए शासन ने 56.70 लाख का बजट जारी किया था। जिले में इस बार 29 से 31 मार्च के बीच अभिभावकों को न्याय पंचायतस्तर पर प्रशिक्षण दिया गया।
न्याय पंचायत में तीन दिवसीय प्रशिक्षण के लिए मास्टर ट्रेनर्स भी नामित किए गए। छह घंटे के प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन व प्रति सदस्य 100 रुपये का खर्च भोजन व नाश्ते के लिए भेजा गया। जानकार बताते हैं कि इस बजट में शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों ने धांधली की। कुछ केंद्रों पर प्रशिक्षण की क्लास तो लगी मिली तो वहां अभिभावक सदस्यों की संख्या न के बराबर रही। यही नहीं जहां सदस्य पहुंचे वहां उनको चाय व समोसा से काम चलाया गया। यही नहीं कई समिति सदस्यों ने पूड़ी व आलू की सब्जी का साधारण लंच पैकेट मिलने की भी पुष्टि भी की है।
क्या है एसएमसी
एसएमसी समिति में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव व तीन सदस्य शामिल किए जाते हैं। अध्यक्ष विद्यालय के टॉपर बच्चे के पिता को बनाया जाता है। इसके अलावा पांच अन्य बच्चों के अभिभावकों को समिति में जगह दी जाती है। इन अभिभावकों को हर साल शासन से तीन दिवसीय प्रशिक्षण देने की व्यवस्था है। प्रशिक्षण के जरिये अभिभावकों को उनके कर्तव्यों को याद दिलाने और उनको खुद के दायित्व से रूबरू कराए जाने का प्रावधान है। बाकायदा सरकार इसके लिए बजट जारी करती है। इस बार भी शासन ने 56.70 लाख रुपये का बजट जारी किया था। यह पैसा भी निकल गया, लेकिन प्रशिक्षण में केवल कोरम पूरा किया गया।
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जूड़ापुरवा अध्यक्ष को प्रशिक्षण का पता नहीं
परियर। परियर न्याय पंचायत में 17 प्राथमिक स्कूल समेत जूनियर स्कूल संबद्ध हैं। जूड़ापुरवा जूनियर विद्यालय में काफी कम सदस्य उपस्थित थे। विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष हीरालाल ने प्रशिक्षण की जानकारी से ही इंकार कर दिया। वहीं लेखपाल वेदप्रकाश ने भी ऐसे किसी प्रशिक्षण से अनभिज्ञता जाहिर की। यही नहीं फतेहपुर चौरासी ब्लाक की नौ न्याय पंचायतों में से कहीं भी एसएमसी प्रशिक्षण मानकों पर खरा नजर नहीं आया। न्यायपंचायत कठिघरा के जूनियर स्कूल के प्रधान शिक्षक बलवंत सिंह ने प्रशिक्षण की जानकारी से इंकार किया। शंकुल प्रभारी राजेश तिवारी ने भी प्रशिक्षण से इंकार कर बजट के घालमेल पर मुहर लगा दी।
सिकंदरपुरकर्ण में भी प्रशिक्षण बना मजाक
14 न्याय पंचायत वाले सिकंदरपुर कर्ण ब्लाक में भी तीन दिवसीय एसएमसी समिति प्रशिक्षण में जमकर खेल किया गया। बेथर न्याय पंचायत स्कूल में प्रशिक्षण जैसा कुछ भी नहीं मिला। मवईया माफी में प्रशिक्षण तो हो रहा था, लेकिन 20 से 25 सदस्य ही मौजूद मिले। इनमें से कुछ स्कूल के सदस्य व अन्य स्कूलों के शिक्षक थे। समिति के सदस्यों की संख्या न के बराबर थी। खाने के पैकेट व नाश्ते के बारे में जानकारी की गई तो बस एक ही जवाब मिला कि भाई औपचारिकता पूरी की गई है।
नवाबगंज में खेला गया हस्ताक्षर का खेल
विकासखंड नवाबगंज में 10 न्याय पंचायतें हैं। न्याय पंचायत के बिचपरी प्राथमिक स्कूल प्रथम में चमरौली न्याय पंचायत के अभिभावकों का प्रशिक्षण होना था। यहां पर प्रशिक्षण की जगह केवल सन्नाटा ही मिला। यही नजारा न्याय पंचायत जंसार, अजगैन, रायपुरगढ़ी, कटेहरू व गौरा कठेरूवा में रहा। एक शिक्षक नेता ने बताया कि शायद ही किसी न्याय पंचायत में अभिभावकों को दायित्व का प्रशिक्षण दिया गया हो।
क्या बोले अधिकारी
विद्यालय प्रबंध समिति के तीन दिवसीय प्रशिक्षण को बेहतर व सकुशल कराने के सख्त निर्देश बीईओ को दिए गए थे। अगर हीलाहवाली की गई है तो जांच कराकर जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -दीवान सिंह यादव, बीएसए
न्याय पंचायत में तीन दिवसीय प्रशिक्षण के लिए मास्टर ट्रेनर्स भी नामित किए गए। छह घंटे के प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन व प्रति सदस्य 100 रुपये का खर्च भोजन व नाश्ते के लिए भेजा गया। जानकार बताते हैं कि इस बजट में शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों ने धांधली की। कुछ केंद्रों पर प्रशिक्षण की क्लास तो लगी मिली तो वहां अभिभावक सदस्यों की संख्या न के बराबर रही। यही नहीं जहां सदस्य पहुंचे वहां उनको चाय व समोसा से काम चलाया गया। यही नहीं कई समिति सदस्यों ने पूड़ी व आलू की सब्जी का साधारण लंच पैकेट मिलने की भी पुष्टि भी की है।
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क्या है एसएमसी
एसएमसी समिति में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव व तीन सदस्य शामिल किए जाते हैं। अध्यक्ष विद्यालय के टॉपर बच्चे के पिता को बनाया जाता है। इसके अलावा पांच अन्य बच्चों के अभिभावकों को समिति में जगह दी जाती है। इन अभिभावकों को हर साल शासन से तीन दिवसीय प्रशिक्षण देने की व्यवस्था है। प्रशिक्षण के जरिये अभिभावकों को उनके कर्तव्यों को याद दिलाने और उनको खुद के दायित्व से रूबरू कराए जाने का प्रावधान है। बाकायदा सरकार इसके लिए बजट जारी करती है। इस बार भी शासन ने 56.70 लाख रुपये का बजट जारी किया था। यह पैसा भी निकल गया, लेकिन प्रशिक्षण में केवल कोरम पूरा किया गया।
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जूड़ापुरवा अध्यक्ष को प्रशिक्षण का पता नहीं
परियर। परियर न्याय पंचायत में 17 प्राथमिक स्कूल समेत जूनियर स्कूल संबद्ध हैं। जूड़ापुरवा जूनियर विद्यालय में काफी कम सदस्य उपस्थित थे। विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष हीरालाल ने प्रशिक्षण की जानकारी से ही इंकार कर दिया। वहीं लेखपाल वेदप्रकाश ने भी ऐसे किसी प्रशिक्षण से अनभिज्ञता जाहिर की। यही नहीं फतेहपुर चौरासी ब्लाक की नौ न्याय पंचायतों में से कहीं भी एसएमसी प्रशिक्षण मानकों पर खरा नजर नहीं आया। न्यायपंचायत कठिघरा के जूनियर स्कूल के प्रधान शिक्षक बलवंत सिंह ने प्रशिक्षण की जानकारी से इंकार किया। शंकुल प्रभारी राजेश तिवारी ने भी प्रशिक्षण से इंकार कर बजट के घालमेल पर मुहर लगा दी।
सिकंदरपुरकर्ण में भी प्रशिक्षण बना मजाक
14 न्याय पंचायत वाले सिकंदरपुर कर्ण ब्लाक में भी तीन दिवसीय एसएमसी समिति प्रशिक्षण में जमकर खेल किया गया। बेथर न्याय पंचायत स्कूल में प्रशिक्षण जैसा कुछ भी नहीं मिला। मवईया माफी में प्रशिक्षण तो हो रहा था, लेकिन 20 से 25 सदस्य ही मौजूद मिले। इनमें से कुछ स्कूल के सदस्य व अन्य स्कूलों के शिक्षक थे। समिति के सदस्यों की संख्या न के बराबर थी। खाने के पैकेट व नाश्ते के बारे में जानकारी की गई तो बस एक ही जवाब मिला कि भाई औपचारिकता पूरी की गई है।
नवाबगंज में खेला गया हस्ताक्षर का खेल
विकासखंड नवाबगंज में 10 न्याय पंचायतें हैं। न्याय पंचायत के बिचपरी प्राथमिक स्कूल प्रथम में चमरौली न्याय पंचायत के अभिभावकों का प्रशिक्षण होना था। यहां पर प्रशिक्षण की जगह केवल सन्नाटा ही मिला। यही नजारा न्याय पंचायत जंसार, अजगैन, रायपुरगढ़ी, कटेहरू व गौरा कठेरूवा में रहा। एक शिक्षक नेता ने बताया कि शायद ही किसी न्याय पंचायत में अभिभावकों को दायित्व का प्रशिक्षण दिया गया हो।
क्या बोले अधिकारी
विद्यालय प्रबंध समिति के तीन दिवसीय प्रशिक्षण को बेहतर व सकुशल कराने के सख्त निर्देश बीईओ को दिए गए थे। अगर हीलाहवाली की गई है तो जांच कराकर जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -दीवान सिंह यादव, बीएसए