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Unnao News: सात करोड़ की जांच, सात माह में भी पूरी नहीं
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उन्नाव। पंचायतीराज विभाग में करोड़ों की अनियमितता की जांच सात महीने में भी पूरी नहीं हो सकी। अगस्त में गठित की गई जांच टीम आज तक रिपोर्ट नहीं दे पाई। यही स्थिति उन्नाव खंड शारदा नहर कार्यालय में 3.50 करोड़ की वित्तीय अनियमितता की भी है। इसकी जांच भी तीन माह बाद पूरी नहीं हो सकी है।
केस-एक
प्रशासक अवधि में एडीओ पंचायत ने निकाले थे 7.54 करोड़, जांच अभी भी पूरी नहीं
उन्नाव। प्रशासक अवधि में सहायक विकास अधिकारियों (एडीओ) पंचायत द्वारा निकाले गए 7.54 करोड़ की जांच के लिए गठित सात टीमें सात माह में भी रिपोर्ट नहीं दे सकी हैं। पिछले कार्यकाल के प्रधानों का चार्ज 25 दिसंबर 2020 रात 12 बजे वापस ले लिया गया था। कार्यकाल खत्म होने के बाद रात्रि 12 बजे प्रधानों को विभागीय साइट से अनरजिस्टर्ड कर दिया गया था। इसके बाद पंचायतों में सहायक विकास अधिकारियों को प्रशासक तैनात कर दिया गया था। फिर त्रिस्तरीय चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई थी। इसी बीच पद के परिणाम जारी होने और नवनिर्वाचित प्रधानों के शपथ ग्रहण के बीच पांच मई से 25 मई 2021 के बीच प्रशासक के पद पर तैनात रहे एडीओ पंचायत ने नियम विरुद्ध 7.54 करोड़ रुपये ग्राम निधि खाते से निकाल लिए थे। प्रशासन ने अगस्त में मामले की जांच के लिए सात टीमें गठित की थीं। टीमों को निर्देश दिए थे कि एक माह में जांच पूरी करके रिपोर्ट दें। हालांकि, सात माह हो रहे हैं, लेकिन न तो जांच पूरी हो सकी और न ही रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक पहुंची।
केस-दो
तीन माह में भी नहीं दे सके उन्नाव खंड शारदा नहर कार्यालय में घोटाले की जांच रिपोर्ट
उन्नाव। भगवंतनगर विधायक आशुतोष शुक्ला ने प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन को भेजे गए पत्र में उन्नाव खंड शारदा नहर के अधिशासी अभियंता पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसमें बताया था कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में निरीक्षण भवन के लिए एक्सईएन ने 29.91 लाख रुपये से गद्दे, एसी, गीजर आदि सामान खरीदा था, लेकिन यह सामान निजी प्रयोग के लिए घर लेकर चले गए। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2023-24 में लोनी ड्रेन की सफाई के लिए आवंटित राजकीय धन का बिना कार्य कराए ही मार्च माह में फर्जी टेंडर प्रक्रिया दिखा अपने चहेतों के नाम सहायक अभियंता स्तर के अनुबंधों को अनियमित रूप से गठित करते हुए एक करोड़ से अधिक का भुगतान कराए जाने की भी जानकारी दी थी।
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चार बिंदुओं के शिकायतीपत्र में सिल्ट सफाई के नाम पर 2.45 करोड़ और वित्तीय वर्ष 2023-24 में केवल डीजल खर्च व गाड़ियों की मरम्मत में 50 लाख से अधिक का भुगतान कराने का भी आरोप लगाया था। सीडीओ ने आठ नवंबर को प्रकरण की जांच के लिए पीडब्ल्यूडी प्रांतीयखंड हरदयाल अहिरवार की अध्यक्षता में समिति गठित कर दी थी। टीम में उपायुक्त मनरेगा मुनेश चंद्र और लघु सिंचाई के सहायक अभियंता जितेंद्र बहादुर सिंह को भी शामिल किया था। अफसरों को दस दिन में रिपोर्ट देने के आदेश थे, लेकिन तीन माह के बाद भी जांच नहीं हो सकी।
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कार्य की व्यस्तता के चलते दोनों मामलों पर ध्यान नहीं दे पाए। दोनों वित्तीय अनियमितता के गंभीर मामले हैं। सोमवार को अंतिम रिमाइंडर जारी कर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगेंगे। यदि इस समयावधि में रिपोर्ट नहीं मिली तो जांच टीम में शामिल अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। -प्रेम प्रकाश मीणा, सीडीओ
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केस-एक
प्रशासक अवधि में एडीओ पंचायत ने निकाले थे 7.54 करोड़, जांच अभी भी पूरी नहीं
उन्नाव। प्रशासक अवधि में सहायक विकास अधिकारियों (एडीओ) पंचायत द्वारा निकाले गए 7.54 करोड़ की जांच के लिए गठित सात टीमें सात माह में भी रिपोर्ट नहीं दे सकी हैं। पिछले कार्यकाल के प्रधानों का चार्ज 25 दिसंबर 2020 रात 12 बजे वापस ले लिया गया था। कार्यकाल खत्म होने के बाद रात्रि 12 बजे प्रधानों को विभागीय साइट से अनरजिस्टर्ड कर दिया गया था। इसके बाद पंचायतों में सहायक विकास अधिकारियों को प्रशासक तैनात कर दिया गया था। फिर त्रिस्तरीय चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई थी। इसी बीच पद के परिणाम जारी होने और नवनिर्वाचित प्रधानों के शपथ ग्रहण के बीच पांच मई से 25 मई 2021 के बीच प्रशासक के पद पर तैनात रहे एडीओ पंचायत ने नियम विरुद्ध 7.54 करोड़ रुपये ग्राम निधि खाते से निकाल लिए थे। प्रशासन ने अगस्त में मामले की जांच के लिए सात टीमें गठित की थीं। टीमों को निर्देश दिए थे कि एक माह में जांच पूरी करके रिपोर्ट दें। हालांकि, सात माह हो रहे हैं, लेकिन न तो जांच पूरी हो सकी और न ही रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक पहुंची।
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केस-दो
तीन माह में भी नहीं दे सके उन्नाव खंड शारदा नहर कार्यालय में घोटाले की जांच रिपोर्ट
उन्नाव। भगवंतनगर विधायक आशुतोष शुक्ला ने प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन को भेजे गए पत्र में उन्नाव खंड शारदा नहर के अधिशासी अभियंता पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसमें बताया था कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में निरीक्षण भवन के लिए एक्सईएन ने 29.91 लाख रुपये से गद्दे, एसी, गीजर आदि सामान खरीदा था, लेकिन यह सामान निजी प्रयोग के लिए घर लेकर चले गए। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2023-24 में लोनी ड्रेन की सफाई के लिए आवंटित राजकीय धन का बिना कार्य कराए ही मार्च माह में फर्जी टेंडर प्रक्रिया दिखा अपने चहेतों के नाम सहायक अभियंता स्तर के अनुबंधों को अनियमित रूप से गठित करते हुए एक करोड़ से अधिक का भुगतान कराए जाने की भी जानकारी दी थी।
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चार बिंदुओं के शिकायतीपत्र में सिल्ट सफाई के नाम पर 2.45 करोड़ और वित्तीय वर्ष 2023-24 में केवल डीजल खर्च व गाड़ियों की मरम्मत में 50 लाख से अधिक का भुगतान कराने का भी आरोप लगाया था। सीडीओ ने आठ नवंबर को प्रकरण की जांच के लिए पीडब्ल्यूडी प्रांतीयखंड हरदयाल अहिरवार की अध्यक्षता में समिति गठित कर दी थी। टीम में उपायुक्त मनरेगा मुनेश चंद्र और लघु सिंचाई के सहायक अभियंता जितेंद्र बहादुर सिंह को भी शामिल किया था। अफसरों को दस दिन में रिपोर्ट देने के आदेश थे, लेकिन तीन माह के बाद भी जांच नहीं हो सकी।
कार्य की व्यस्तता के चलते दोनों मामलों पर ध्यान नहीं दे पाए। दोनों वित्तीय अनियमितता के गंभीर मामले हैं। सोमवार को अंतिम रिमाइंडर जारी कर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगेंगे। यदि इस समयावधि में रिपोर्ट नहीं मिली तो जांच टीम में शामिल अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। -प्रेम प्रकाश मीणा, सीडीओ