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हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह से तलब किया स्पष्टीकरण
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गंजमुरादाबाद। बांगरमऊ तहसील क्षेत्र के ग्राम बेहटा मुजावर में स्थित पुलिस चौकी को थाना बनाए जाने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह से स्पष्टीकरण तलब किया है।
ग्राम इस्माइलपुर आंबापारा निवासी उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और यश भारती सम्मान से सम्मानित फ ारुक अहमद ने आठ फ रवरी 2014 को मुख्यमंत्री को एक प्रार्थनापत्र देकर तहसील क्षेत्र के ग्राम बेहटा मुजावर में पुलिस चौकी को उच्चीकृत कर थाना बनाए जाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने पुलिस उप महानिरीक्षक लखनऊ से प्रस्ताव मांगा था। चार जून 2014 को उप महानिरीक्षक ने थाना बनाए जाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा। इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 15 सितंबर 2014 को फ ारुक अहमद ने एक जनहित याचिका दायर कर दी। 14 मार्च 2016 को निस्तारित करते हुए उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देशित किया था कि दो महीने में पुलिस उप महानिरीक्षक द्वारा दिए गए प्रस्ताव के आधार पर बेहटा मुजावर की पुलिस चौकी को उच्चीकृत कर थाना बनाने के संबंध में निर्णय लें। कोई कार्रवाई न होने पर 28 मई 2016 को फ ारुक अहमद ने एक अवमानना याचिका दायर कर दी। कोर्ट से अवमानना नोटिस प्रमुख सचिव गृह को जारी हुआ था। 13 सितंबर 2017 को मुख्यमंत्री ने चौकी बेहटा मुजावर को उच्चीकृत कर थाना बनाए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर 20 लाख रुपये बजट का आवंटन भी कर दिया। 25 सितंबर 2017 को पुलिस मुख्यालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भी भेज दिया। कोर्ट ने सरकार के निर्णय के आधार पर आठ दिसंबर 2017 को अवमानना याचिका को निस्तारित कर दिया था। हालांकि फिर इस पर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई तो फारुक अहमद ने 21 मार्च 2018 को पुन: दूसरी जनहित याचिका दायर कर दी। इसके बाद तत्कालीन सीओ बांगरमऊ अंबरीष सिंह भदौरिया ने अपना जवाबी हलफ नामा उच्च न्यायालय में दाखिल किया। इसमें यह स्वीकार किया कि चौकी को थाना बनाए जाने का निर्णय लिया जा चुका है। जल्द कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। 11 नवंबर को जनहित याचिका पर सुनाई करते हुए न्यायधीश गोविंद माथुर व न्यायमूर्ति आलोक माथुर ने प्रमुख सचिव गृह से हलफ नामा मांगा कि 16 नवंबर तक यह बताएं कि इस मामले में अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। पूछा है कि पहली जनहित व अवमानना याचिका में पारित आदेशों के आधार पर क्यों न अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी जाए। अब इसकी अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
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ग्राम इस्माइलपुर आंबापारा निवासी उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और यश भारती सम्मान से सम्मानित फ ारुक अहमद ने आठ फ रवरी 2014 को मुख्यमंत्री को एक प्रार्थनापत्र देकर तहसील क्षेत्र के ग्राम बेहटा मुजावर में पुलिस चौकी को उच्चीकृत कर थाना बनाए जाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने पुलिस उप महानिरीक्षक लखनऊ से प्रस्ताव मांगा था। चार जून 2014 को उप महानिरीक्षक ने थाना बनाए जाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा। इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 15 सितंबर 2014 को फ ारुक अहमद ने एक जनहित याचिका दायर कर दी। 14 मार्च 2016 को निस्तारित करते हुए उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देशित किया था कि दो महीने में पुलिस उप महानिरीक्षक द्वारा दिए गए प्रस्ताव के आधार पर बेहटा मुजावर की पुलिस चौकी को उच्चीकृत कर थाना बनाने के संबंध में निर्णय लें। कोई कार्रवाई न होने पर 28 मई 2016 को फ ारुक अहमद ने एक अवमानना याचिका दायर कर दी। कोर्ट से अवमानना नोटिस प्रमुख सचिव गृह को जारी हुआ था। 13 सितंबर 2017 को मुख्यमंत्री ने चौकी बेहटा मुजावर को उच्चीकृत कर थाना बनाए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर 20 लाख रुपये बजट का आवंटन भी कर दिया। 25 सितंबर 2017 को पुलिस मुख्यालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भी भेज दिया। कोर्ट ने सरकार के निर्णय के आधार पर आठ दिसंबर 2017 को अवमानना याचिका को निस्तारित कर दिया था। हालांकि फिर इस पर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई तो फारुक अहमद ने 21 मार्च 2018 को पुन: दूसरी जनहित याचिका दायर कर दी। इसके बाद तत्कालीन सीओ बांगरमऊ अंबरीष सिंह भदौरिया ने अपना जवाबी हलफ नामा उच्च न्यायालय में दाखिल किया। इसमें यह स्वीकार किया कि चौकी को थाना बनाए जाने का निर्णय लिया जा चुका है। जल्द कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। 11 नवंबर को जनहित याचिका पर सुनाई करते हुए न्यायधीश गोविंद माथुर व न्यायमूर्ति आलोक माथुर ने प्रमुख सचिव गृह से हलफ नामा मांगा कि 16 नवंबर तक यह बताएं कि इस मामले में अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। पूछा है कि पहली जनहित व अवमानना याचिका में पारित आदेशों के आधार पर क्यों न अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी जाए। अब इसकी अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
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