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इमरजेंसी में ऑक्सीजन के लिए मारामारी
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उन्नाव। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती मरीजों में ऑक्सीजन को लेकर मारामारी मची है। तीमारदारों व स्टॉफ में विवाद से बचने के लिए सभी मरीजों को थोड़ी-थोड़ी देर के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है।
इमरजेंसी वार्ड में इस समय 28 मरीज भर्ती हैं। इसमें 20 मरीजों को सांस लेने में तकलीफ है और उन्हें लगातार ऑक्सीजन की जरूरत है। रविवार दोपहर तक इमरजेंसी में ऑक्सीजन के 21 सिलिंडर थे। शाम तक सात खाली हो चुके थे। 14 सिलिंडरों से ही मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है। आठ मरीजों का ऑक्सीजन लेवल बहुत ही कम हैं। इसलिए उन्हें चौबीस घंटे से जरूरत पड़ रही है। इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मियागंज ब्लॉक के गांव कनिगांव निवासी नन्हीं देवी व बारा सगवर की माया देवी को सांस लेने में तकलीफ है। इन मरीजों का ऑक्सीजन लेवल 70 से 80 चल रहा है। प्रभारी सीएमएस डॉ. आलोक पांडेय ने बताया कि ऑक्सीजन के लिए खाली सिलिंडर गाड़ियों से कानपुर भेजे जा रहे हैं। ऑक्सीजन मिलते ही मरीजों को लाभ दिलाया जाएगा।
जिला अस्पताल इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को स्ट्रेचर तक नहीं मिल रहा है। तीमारदार मरीज को कभी गोद तो कभी कंधों का सहारा देकर वार्ड व एंबुलेंस तक पहुंचा रहे हैं। कोरोना संक्रमण का दायरा बढ़ने के साथ ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसमें 90 फीसदी मरीज सांस लेने में तकलीफ वाले आ रहे हैं। ऐसे मरीजों को सबसे अधिक स्ट्रेचर की जरूरत पड़ रही है। उन्हें पैदल चलने में दिक्कत होती है। नियमानुसार इमरजेंसी वार्ड के बाहर और अंदर स्ट्रेेचर होने चाहिए लेकिन कहीं भी कोई स्ट्रेेचर नहीं मिल रहा है।
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इमरजेंसी वार्ड में इस समय 28 मरीज भर्ती हैं। इसमें 20 मरीजों को सांस लेने में तकलीफ है और उन्हें लगातार ऑक्सीजन की जरूरत है। रविवार दोपहर तक इमरजेंसी में ऑक्सीजन के 21 सिलिंडर थे। शाम तक सात खाली हो चुके थे। 14 सिलिंडरों से ही मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है। आठ मरीजों का ऑक्सीजन लेवल बहुत ही कम हैं। इसलिए उन्हें चौबीस घंटे से जरूरत पड़ रही है। इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मियागंज ब्लॉक के गांव कनिगांव निवासी नन्हीं देवी व बारा सगवर की माया देवी को सांस लेने में तकलीफ है। इन मरीजों का ऑक्सीजन लेवल 70 से 80 चल रहा है। प्रभारी सीएमएस डॉ. आलोक पांडेय ने बताया कि ऑक्सीजन के लिए खाली सिलिंडर गाड़ियों से कानपुर भेजे जा रहे हैं। ऑक्सीजन मिलते ही मरीजों को लाभ दिलाया जाएगा।
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जिला अस्पताल इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को स्ट्रेचर तक नहीं मिल रहा है। तीमारदार मरीज को कभी गोद तो कभी कंधों का सहारा देकर वार्ड व एंबुलेंस तक पहुंचा रहे हैं। कोरोना संक्रमण का दायरा बढ़ने के साथ ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसमें 90 फीसदी मरीज सांस लेने में तकलीफ वाले आ रहे हैं। ऐसे मरीजों को सबसे अधिक स्ट्रेचर की जरूरत पड़ रही है। उन्हें पैदल चलने में दिक्कत होती है। नियमानुसार इमरजेंसी वार्ड के बाहर और अंदर स्ट्रेेचर होने चाहिए लेकिन कहीं भी कोई स्ट्रेेचर नहीं मिल रहा है।
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