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जिला सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक में सदस्यों ने उठाए सवाल
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Sat, 06 Jun 2015 11:45 PM IST
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उन्नाव। जिला सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक में अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों व सदस्यों को गुमराह करने का मुद्दा उठाया। सांसद व समिति अध्यक्ष ने भी इसे स्वीकार किया और सीडीओ से नलकूप, मनरेगा, जलनिगम, सिंचाई व समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जांच कराने को कहा।
शनिवार दोपहर 12 बजे जिला विकास भवन सभागार में जिला सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक सांसद हरि साक्षी महाराज की अध्यक्षता में शुरू हुई। बैठक में सबसे पहले नहरों में पानी न होने का मुद्दा उठा। अध्यक्ष ने सिंचाई विभाग के एक्सईएन से इस मामले पर सवाल किया।
एक्सईएन ने सीधे जवाब देने के बजाए सांसद को घुमाने का प्रयास किया। इस पर वहां मौजूद समिति सदस्य व पूर्व विधायक कृपाशंकर सिंह ने एक्सईएन को टोकते हुए कहा कि किस योजना में कितना धन मिला, इसकी जानकारी दी जाए। सांसद ने लोनी ड्रेन की सफाई के विषय में जानकारी ली तो अधिशासी अभियंता ने यहां भी शब्दों की बाजीगरी दिखाने का प्रयास किया। इस पर सांसद आक्रोशित हो उठे।
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उन्होंने कहा कि आपने सफाई वहां की जहां गंदगी नहीं थी। कृपाशंकर सिंह ने लोनी ड्रेन की सफाई की जांच कराने की मांग सदन में रखी। सांसद ने सीडीओ से कहा कि इसकी एक समिति बनाकर जांच कराई जाए। समिति में एक सदस्य उनका भी रखा जाए।
इसके बाद जलनिगम द्वारा संचालित योजनाओं के बारे में चर्चा शुरू हुई। असोहा ब्लॉक प्रमुख राजकुमार रावत ने एक्सईएन जलनिगम से सवाल किया कि तीन माह बीतने के बाद भी शेरसहाखेड़ा में पेयजल आपूर्ति क्यों नहीं शुरू हुई। इस पर एक्सईएन ने 15 दिन में आपूर्ति चालू होने की बात कही तो सांसद उखड़ गए। कहा कि पिछली बैठक में भी 15 दिन में आपूर्ति दुरुस्त कराने को कहा था। पानी के लिए लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं और आपने रीबोर तक नहीं कराया। सांसद ने कहा कि पैसा खाते में पड़ा है, इसके बाद भी काम नहीं करा रहे हैं। अध्यक्ष ने सीडीओ से कहा कि जलनिगम की योजनाओं की समीक्षा करें।
बैठक में सीडीओ संदीप कौर, परियोजना निदेशक डीआरडीए रामकृपाल चौधरी, डीडीओ एनबी सविता, एक्सईएन बिजली रामबुझारत समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
सदन में अधिकारियों की बेइज्ज्ती करा रहे हो!
सदन में नलकूप विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की चर्चा शुरू होते ही एक्सईएन नलकूप को आवाज दी गई। विभाग के एसडीओ जवाब देने के लिए खड़े हुए। सांसद ने कहा कि वर्ष 2014/15 में 6 नलकूपों का प्रस्ताव दिया गया था। उनमें से कितने बने हैं। इस पर एसडीओ नलकूप ने सीधा जवाब न देते हुए उल्टा अध्यक्ष व समिति सदस्यों को घुमाने का प्रयास किया। काफी देर तक यही मामला चलता रहा। इस पर सीडीओ नाराज हो गईं। उन्होंने एसडीओ को फटकारा और कहा कि तुम सदन में अधिकारियों की बेइज्जती करा रहे हो। सीधी जानकारी क्यों नहीं देते। इस दौरान एक्सईएन नलकूप के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास करने का मुद्दा उठा। सांसद ने कहा कि एक्सईएन गायब हैं। एसडीओ को पता नहीं है। यह नहीं चलेगा। सीडीओ से विभाग द्वारा लगाए गए नलकूपों की जांच कराने को कहा।
मनरेगा उपायुक्त पर भी कार्रवाई की उठी मांग
7 फरवरी 15 को आयोजित हुई बैठक में समिति सदस्य कृपाशंकर सिंह ने पुरवा के गांव गढ़ाकोला में अपात्रों के खातों में मनरेगा मजदूरी भेजने की शिकायत की थी। उस समय अध्यक्ष ने एक सप्ताह में जांच कर कार्रवाई के आदेश पीडी डीआरडीए को दिए थे। करीब चार माह बाद जब दुबारा मीटिंग का समय तय हुआ तो अपनी गर्दन बचाने के लिए एक जून को आनन-फानन मनरेगा उपायुक्त ने इसकी जांच कर शिकायत को झूठा सिद्ध कर दिया। शनिवार को दोबारा बैठक में सांसद ने कड़े शब्दों में कहा कि एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी गई थी लेकिन मामले की चार माह बाद जांच की गई। यह हमारे साथ मजाक है।
उन्होंने कहा कि अधिकारी पूरा समय एसी कमरों में सोए और बैठक का समय तय होने पर जांच समिति बनाकर आनन फानन जांच कर ली। सदस्य कृपाशंकर सिंह ने कहा कि यदि शिकायत झूठी है तो उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया जाए। यदि ऐसा नहीं है तो जांच करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। इस पर मनरेगा उपायुक्त राजेश मिश्र ने खुद खड़े होकर दोबारा जांच कर जल्द रिपोर्ट देने की बात कही।
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शनिवार दोपहर 12 बजे जिला विकास भवन सभागार में जिला सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक सांसद हरि साक्षी महाराज की अध्यक्षता में शुरू हुई। बैठक में सबसे पहले नहरों में पानी न होने का मुद्दा उठा। अध्यक्ष ने सिंचाई विभाग के एक्सईएन से इस मामले पर सवाल किया।
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एक्सईएन ने सीधे जवाब देने के बजाए सांसद को घुमाने का प्रयास किया। इस पर वहां मौजूद समिति सदस्य व पूर्व विधायक कृपाशंकर सिंह ने एक्सईएन को टोकते हुए कहा कि किस योजना में कितना धन मिला, इसकी जानकारी दी जाए। सांसद ने लोनी ड्रेन की सफाई के विषय में जानकारी ली तो अधिशासी अभियंता ने यहां भी शब्दों की बाजीगरी दिखाने का प्रयास किया। इस पर सांसद आक्रोशित हो उठे।
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उन्होंने कहा कि आपने सफाई वहां की जहां गंदगी नहीं थी। कृपाशंकर सिंह ने लोनी ड्रेन की सफाई की जांच कराने की मांग सदन में रखी। सांसद ने सीडीओ से कहा कि इसकी एक समिति बनाकर जांच कराई जाए। समिति में एक सदस्य उनका भी रखा जाए।
इसके बाद जलनिगम द्वारा संचालित योजनाओं के बारे में चर्चा शुरू हुई। असोहा ब्लॉक प्रमुख राजकुमार रावत ने एक्सईएन जलनिगम से सवाल किया कि तीन माह बीतने के बाद भी शेरसहाखेड़ा में पेयजल आपूर्ति क्यों नहीं शुरू हुई। इस पर एक्सईएन ने 15 दिन में आपूर्ति चालू होने की बात कही तो सांसद उखड़ गए। कहा कि पिछली बैठक में भी 15 दिन में आपूर्ति दुरुस्त कराने को कहा था। पानी के लिए लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं और आपने रीबोर तक नहीं कराया। सांसद ने कहा कि पैसा खाते में पड़ा है, इसके बाद भी काम नहीं करा रहे हैं। अध्यक्ष ने सीडीओ से कहा कि जलनिगम की योजनाओं की समीक्षा करें।
बैठक में सीडीओ संदीप कौर, परियोजना निदेशक डीआरडीए रामकृपाल चौधरी, डीडीओ एनबी सविता, एक्सईएन बिजली रामबुझारत समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
सदन में अधिकारियों की बेइज्ज्ती करा रहे हो!
सदन में नलकूप विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की चर्चा शुरू होते ही एक्सईएन नलकूप को आवाज दी गई। विभाग के एसडीओ जवाब देने के लिए खड़े हुए। सांसद ने कहा कि वर्ष 2014/15 में 6 नलकूपों का प्रस्ताव दिया गया था। उनमें से कितने बने हैं। इस पर एसडीओ नलकूप ने सीधा जवाब न देते हुए उल्टा अध्यक्ष व समिति सदस्यों को घुमाने का प्रयास किया। काफी देर तक यही मामला चलता रहा। इस पर सीडीओ नाराज हो गईं। उन्होंने एसडीओ को फटकारा और कहा कि तुम सदन में अधिकारियों की बेइज्जती करा रहे हो। सीधी जानकारी क्यों नहीं देते। इस दौरान एक्सईएन नलकूप के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास करने का मुद्दा उठा। सांसद ने कहा कि एक्सईएन गायब हैं। एसडीओ को पता नहीं है। यह नहीं चलेगा। सीडीओ से विभाग द्वारा लगाए गए नलकूपों की जांच कराने को कहा।
मनरेगा उपायुक्त पर भी कार्रवाई की उठी मांग
7 फरवरी 15 को आयोजित हुई बैठक में समिति सदस्य कृपाशंकर सिंह ने पुरवा के गांव गढ़ाकोला में अपात्रों के खातों में मनरेगा मजदूरी भेजने की शिकायत की थी। उस समय अध्यक्ष ने एक सप्ताह में जांच कर कार्रवाई के आदेश पीडी डीआरडीए को दिए थे। करीब चार माह बाद जब दुबारा मीटिंग का समय तय हुआ तो अपनी गर्दन बचाने के लिए एक जून को आनन-फानन मनरेगा उपायुक्त ने इसकी जांच कर शिकायत को झूठा सिद्ध कर दिया। शनिवार को दोबारा बैठक में सांसद ने कड़े शब्दों में कहा कि एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी गई थी लेकिन मामले की चार माह बाद जांच की गई। यह हमारे साथ मजाक है।
उन्होंने कहा कि अधिकारी पूरा समय एसी कमरों में सोए और बैठक का समय तय होने पर जांच समिति बनाकर आनन फानन जांच कर ली। सदस्य कृपाशंकर सिंह ने कहा कि यदि शिकायत झूठी है तो उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया जाए। यदि ऐसा नहीं है तो जांच करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। इस पर मनरेगा उपायुक्त राजेश मिश्र ने खुद खड़े होकर दोबारा जांच कर जल्द रिपोर्ट देने की बात कही।