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नि:शक्तजन घिसटकर सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर

Wed, 03 Jun 2015 11:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव Updated Wed, 03 Jun 2015 11:54 PM IST
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Disability tax stairs forced Gist
उन्नाव। जिले में विकास भवन व रेलवे स्टेशन को छोड़कर अन्य किसी भी सरकारी भवन में विकलांगों के लिए रैंप नहीं बनवाया गया है। इससे निशक्तजन घिसट-घिसटकर सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर हैं। नियमानुसार सभी कार्यालयों में रैंप का निर्माण कराया जाना चाहिए ताकि नि:शक्तजनाें को भवन में चढ़ने उतरने में परेशानी न हो। इस बाबत केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से भवनों के निर्माण के साथ ही रैंप के लिए भी बजट जारी किया जाता है। वहीं, जो कार्यालय निजी भवनों में संचालित हो रहे हैं, उनमें केवल रैंप के लिए पैसा जारी किया जाता है।
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जिला विकलांग कल्याण कार्यालय में आठ हजार विकलांगों का पंजीकरण है। इनमें 50 फीसदी से अधिक ऐसे विकलांग हैं जो अपना काम कराने स्वयं कार्यालयों में जाते हैं। यदि सरकारी कार्यालय दूसरी या तीसरी मंजिल पर है तो रैंप न होने से इन विकलांगाें को सीढ़ियों पर घिसटकर चढ़ना पड़ता है। जिले के अधिकतर सरकारी कार्यालयों में रैंप न होने से इन्हें खासी परेशानी होती है।
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यहां तक कि डीएम कार्यालय में भी विकलांगों को दूसरी व तीसरी मंजिल पर चढ़ने के लिए रैंप उपलब्ध नहीं है। यही हाल जिला आपूर्ति विभाग व खाद्य एवं विपणन विभाग का है। ये कार्यालय भी दूसरी मंजिल पर संचालित हैं लेकिन विकलांगों के कार्यालय तक पहुंचने के लिए कोई सुविधा नहीं है। यही हाल जिले के अधिकतर बैंकों का है। शहर की बीचोबीच स्थित पंजाब नेशनल बैंक की मुख्य शाखा, बैंक आफ बड़ौदा में भी रैंप नहीं बने हैं। इन सरकारी कार्यालयों में खुलेआम केंद्र व राज्य सरकार के आदेशों की अवहेलना की जा रही है। पर इस ओर उच्चाधिकारियों का कोई ध्यान नहीं जा रहा है।
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जिला विकलांग कल्याण अधिकारी ओएन सिंह ने कहा कि नियमानुसार सभी विभागों में रैंप होना चाहिए। जो कार्यालय दूसरी व तीसरी मंजिल पर संचालित हैं, उनमें तो यह अति आवश्यक है। श्री सिंह ने बताया कि इसके लिए प्रदेश व केंद्र सरकार कार्यालय की शिफ्टिंग या नए भवन के निर्माण के साथ ही रैंप बनवाने के लिए अलग से बजट जारी करती है। लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते बिल्डर रैंप का पैसा पी जाते हैं।
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