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न मिली पर्याप्त बिजली, न शुद्ध पानी

Wed, 30 Dec 2015 12:43 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव Updated Wed, 30 Dec 2015 12:43 AM IST
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Did not have enough power , not pure water

वर्ष 2015 के जाने में दो दिन शेष हैं। इस वर्ष जिलेवासियों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल सकी। साथ ही शुद्ध पेयजल के लिए लोग परेशान रहे। कई मोहल्लों में आज भी लोग बांस-बल्लियों के सहारे बिजली तार खींचकर बिजली जलाने को मजबूर हैं।

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वहीं कई मजरे इस साल भी विद्युतीकरण को तरस गए। पानी के लिए न तो शहरवासियों को शुद्ध पेयजल नसीब हो पाया। वहीं ग्रामीण इलाकों का हाल तो और भी बुरा रहा।


 
शहर को बांस-बल्लियों से निजात दिलाने को आरएपीडीआरपी योजना शुरू की गई थी। कार्यदाई संस्था को करोड़ों रुपये इसलिए दिए थे कि शहरी क्षेत्र में बिजली के खंभे, नए ट्रांसफार्मर व एबीसी लाइन दौड़ाकर सुचारु विद्युत आपूर्ति की जाए।
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मार्च 2015 में संस्था को कार्य समाप्त कर देना था, लेकिन समय पर काम पूरा न होने से संस्था को कुछ माह की मोहलत और दी गई। संस्था को लगातार समय मिलता गया, इसके बावजूद काम पूरा नहीं हो पाया।
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परिणाम स्वरूप शहर में अभी कई ऐसे मोहल्ले हैं, जहां बांस-बल्लियों पर बिजली के तार दौड़े हुए हैं। एबीसी लाइन डालने का काम भी अधूरा है। ट्रांसफार्मरों की क्षमतावृद्धि न होने से आए दिन ओवरलोड होने से यह फुंक जाते हैं। लोगों को सुचारु बिजली सप्लाई नहीं मिल पा रही है।


जिले के 80 ग्राम इस साल भी विद्युतीकरण की बांट जोहते रहे, इसमें तहसील पुरवा व उन्नाव के 30-30 और हसनगंज के 20 गांव शामिल हैं। आज भी इन गांवों के लोग लैंप की रोशनी में रहने को मजबूर हैं। मालूम हो कि इन गांवों का विद्युतीकरण राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (द्वितीय चरण) में होना है।
इंसेट-1
ठंडे बस्ते में गई बिजली उत्पादन परियोजना
औद्योगिक कचरे और सालिड वेस्ट से बिजली बनाने को स्थापित 10 मेगावाट क्षमता की विद्युत परियोजना के लिए प्रशासन 10 एकड़ भूमि उपलब्ध नहीं करा पाया। विद्युत परियोजना स्थापित करने वाली कंपनी ने जिस जमीन का चयन किया था, वह चारागाह की निकली थी। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। सूत्रों का कहना है कि गुजरात की प्लेटिनम बायोग्रीन एनर्जी कंपनी को विद्युत उत्पादन प्लांट स्थापित करना था, यदि सब कुछ ठीक रहता तो मार्च 2015 तक शहर में बिजली उत्पादन केंद्र काम करना शुरू कर देता, लेकिन साल बीतने को है, यह योजना फिलहाल ठप नजर आ रही है।
इंसेट-2
अधूरी रह गई शुद्ध पेयजल की उम्मीद
इस साल भी शहरवासियों की शुद्ध पेयजल की उम्मीद अधूरी रह गई है। मोहल्ला किला में बनी अंग्रेजों के जमाने में बनी जर्जर पानी की टंकियों के स्थान पर इस साल नई टंकियां बनना प्रस्तावित था, लेकिन साल बीतने को है, अभी तक इनका निर्माण शुरू नहीं हो सका है। अभी तक यहां सिर्फ एक ट्यूबवेल लगवाया जा सका है, जो कि विद्युत कनेक्शन न होने से बंद पड़ा है। वहीं शहर के मौहारी बाग मोहल्ले में स्थापित ट्यूबवेल ने जवाब दे दिया है। यहां नई बोरिंग का काम भी बीते एक माह से चल रहा ह,ै लेकिन यह अभी तक पूरा नहीं हो सका है। मोहल्ले में दो पानी की टंकियों के जर्जर होने के बाद पालिका आज भी हजारों लोगों को प्रदूषित पानी पिला रही है। बीते साल पालिका से इन टंकियों के स्थान पर दूसरी नई टंकियों का निर्माण साल 2015 में होना था, लेकिन अभी तक इसका निर्माण कार्य शुरू तक नहीं हो सका है।

वहीं मौहारीबाग स्थित पानी की टंकी के ट्यूबवेल की बोरिंग के जवाब देने के बाद 25 लाख की लागत से नई बोरिंग करवाने की तैयारी की गई है। इसका काम जलकल विभाग द्वारा शुरू करवा दिया गया, लेकिन पालिका प्रशासन द्वारा बोरिंग को आवश्यक संसाधन उपलब्ध न करवाने से काम लगातार लेट होता जा रहा है। हालांकि नपा के जलकल अभियंता प्रमोद कुमार जौहरी शहरवासियों को जल्द शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि जल्द ही पुरानी टंकियों को हटवाकर नई टंकी बनवाई जाएगी। वहीं मौहारी बाग की बोरिंग का काम लगभग पूरा हो चुका है, जल्द ही उससे सप्लाई शुरू हो जाएगी।

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