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उन्नाव में डेंगू का कहर, सरकारी आंकड़ों में काबू में
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जिला अस्पताल में भर्ती बुखार से पीड़ित मरीज।
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। जिले में डेंगू का कहर जारी है। दो माह में डेंगू से 18 मौतें हो चुकी हैं जबकि 90 से अधिक लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग अब भी डेंगू को पूरी तरह से काबू में होने का दावा कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार तीन माह में सिर्फ 49 लोग डेंगू की चपेट में आए हैं। जबकि वह सिर्फ दो मौतों को ही स्वीकार कर रहा है। लगातार सामने आ रहे डेंगू के मामलों का सत्यापन भी नहीं कराया जा रहा है।
वर्ष 2018 में डेंगू के सिर्फ 40 मामले सामने आए थे। जबकि डेंगू से 5 लोगों की मौत हुई थी। इस साल डेंगू कहर बनकर टूटा है। प्राइवेट अस्पताल डेंगू के मरीजों से पटे पड़े हैं। प्राइवेट पैथोलॉजी में जांच कराने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। गंभीर मरीजों का कानपुर व लखनऊ के अस्पतालों में इलाज चल रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि डेंगू काबू में है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी प्राइवेट पैथोलॉजी की जांच में जिन लोगों में डेंगू की पुष्टि हो रही है उनका सत्यापन भी नहीं कर रहे। जिससे सरकारी आंकड़ों में डेंगू के मरीजों की संख्या सीमित है। जिला संक्रामक रोग विभाग के नोडल अधिकारी डा. आर एस मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2019 में अब तक सिर्फ डेंगू के 49 मामले सामने आए हैं। जबकि डेंगू से दो लोगों की ही मौत हुई है। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों में मैक एलाइजा टेस्ट से डेंगू की पुष्टि होती है उन्हें ही डेंगू से पीड़ित पाया जाता है।
तीन युवकों में हुई डेंगू की पुष्टि
शनिवार को तीन युवकों में डेंगू की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य विभाग के पास जब जांच रिपोर्ट पहुंची तो वह सत्यापन करने के लिए पीड़ितों के गांव पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग की संक्रामक रोग विभाग की टीम ने शनिवार को बिछिया के दरेहटा, बीघापुर के बेहटा गोपी और बिहार के राधागंज में डेंगू की चपेट में आए मरीजों का सत्यापन किया।
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बुखार से बच्चे की मौत
शहर के तालिब सरायं निवासी अली (8) की शनिवार सुबह जिला अस्पताल में मौत हो गई। वह तेज बुखार से पीड़ित था। परिजनों ने शनिवार सुबह हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। वहीं बुखार से पीड़ित 11 अन्य लोगों को शुक्रवार रात से शनिवार सुबह के बीच में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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वर्ष 2018 में डेंगू के सिर्फ 40 मामले सामने आए थे। जबकि डेंगू से 5 लोगों की मौत हुई थी। इस साल डेंगू कहर बनकर टूटा है। प्राइवेट अस्पताल डेंगू के मरीजों से पटे पड़े हैं। प्राइवेट पैथोलॉजी में जांच कराने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। गंभीर मरीजों का कानपुर व लखनऊ के अस्पतालों में इलाज चल रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि डेंगू काबू में है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी प्राइवेट पैथोलॉजी की जांच में जिन लोगों में डेंगू की पुष्टि हो रही है उनका सत्यापन भी नहीं कर रहे। जिससे सरकारी आंकड़ों में डेंगू के मरीजों की संख्या सीमित है। जिला संक्रामक रोग विभाग के नोडल अधिकारी डा. आर एस मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2019 में अब तक सिर्फ डेंगू के 49 मामले सामने आए हैं। जबकि डेंगू से दो लोगों की ही मौत हुई है। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों में मैक एलाइजा टेस्ट से डेंगू की पुष्टि होती है उन्हें ही डेंगू से पीड़ित पाया जाता है।
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तीन युवकों में हुई डेंगू की पुष्टि
शनिवार को तीन युवकों में डेंगू की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य विभाग के पास जब जांच रिपोर्ट पहुंची तो वह सत्यापन करने के लिए पीड़ितों के गांव पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग की संक्रामक रोग विभाग की टीम ने शनिवार को बिछिया के दरेहटा, बीघापुर के बेहटा गोपी और बिहार के राधागंज में डेंगू की चपेट में आए मरीजों का सत्यापन किया।
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बुखार से बच्चे की मौत
शहर के तालिब सरायं निवासी अली (8) की शनिवार सुबह जिला अस्पताल में मौत हो गई। वह तेज बुखार से पीड़ित था। परिजनों ने शनिवार सुबह हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। वहीं बुखार से पीड़ित 11 अन्य लोगों को शुक्रवार रात से शनिवार सुबह के बीच में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।