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कंस वध होते ही जय श्रीकृष्ण के जयकारे
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श्रीकृष्ण लीला महोत्सव में कंस का वध लीला का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : UNNAO
गंजमुरादाबाद। ग्राम महोलिया में चल रहे श्रीकृष्ण लीला महोत्सव के सातवें दिन बाल कलाकारों ने कंस वध का प्रसंग दिखाया। कंस वध का मंचन देखकर पांडाल में जयकारे गूंजने लगते हैं।
बाल कलाकारों ने कंस वध का मार्मिक चित्रण करते हुए दिखाया कि द्वापर युग में मथुरा के राजा कंस का अत्याचार चरम पर पहुंच गया था। प्रजा ही नहीं ऋ षि मुनि कंस के आतंक से आहत थे और उसके आतंक से मुक्ति चाहते थे। तभी मां देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण जन्म लेते हैं।
मथुरा का राजा कंस अपने भांजे भगवान श्रीकृष्ण को अपना शत्रु मानता था। जिसको मार डालने के लिए कंस कागासुर, बकासुर, नागासुर, बगुलासुर आदि राक्षसों को भेजता है लेकिन श्रीकृष्ण सभी को मारकर स्वधाम भेज देते हैं। युवा होने पर श्रीकृष्ण को एक दिन राजा कंस ने अपने महल बुलाया और मार डालने के लिए ऐरावत हाथी लगाया लेकिन वह भी मारा गया। उसके बाद मल्ल युद्ध हुआ उसमें भी श्रीकृष्ण को खरोंच तक नहीं आई। आखिर में भगवान श्रीकृष्ण कंस का वध करते हैं। कंस वध होते ही पंडाल में जय कन्हैया लाल की के जयकारे गुंजायमान होने लगते हैं।
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इनसेट---
कलश यात्रा के साथ कथा शुरू
फतेहपुर चौरासी। ग्राम झूलूमऊ स्थित देवी माता फूलमती के वार्षिकोत्सव पर हनुमत महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ पर भक्तों ने कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा माता के मंदिर से प्रारंभ होकर गंगा नदी के सरैइयाघाट तक गई। यज्ञाचार्य अरविंद द्विवेदी ने बताया कि 16 फरवरी को सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार होंगे। कलश यात्रा में आयोजक फलाहारी बाबा, यज्ञाचार्य शिवम द्विवेदी, कथा व्यास नीरज स्वरूप ब्रह्मचारी, कृपाशंकर अवस्थी, विनीत व हरिकिशोर आदि भक्तजन मौजूद रहे। (संवाद)
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बाल कलाकारों ने कंस वध का मार्मिक चित्रण करते हुए दिखाया कि द्वापर युग में मथुरा के राजा कंस का अत्याचार चरम पर पहुंच गया था। प्रजा ही नहीं ऋ षि मुनि कंस के आतंक से आहत थे और उसके आतंक से मुक्ति चाहते थे। तभी मां देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण जन्म लेते हैं।
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मथुरा का राजा कंस अपने भांजे भगवान श्रीकृष्ण को अपना शत्रु मानता था। जिसको मार डालने के लिए कंस कागासुर, बकासुर, नागासुर, बगुलासुर आदि राक्षसों को भेजता है लेकिन श्रीकृष्ण सभी को मारकर स्वधाम भेज देते हैं। युवा होने पर श्रीकृष्ण को एक दिन राजा कंस ने अपने महल बुलाया और मार डालने के लिए ऐरावत हाथी लगाया लेकिन वह भी मारा गया। उसके बाद मल्ल युद्ध हुआ उसमें भी श्रीकृष्ण को खरोंच तक नहीं आई। आखिर में भगवान श्रीकृष्ण कंस का वध करते हैं। कंस वध होते ही पंडाल में जय कन्हैया लाल की के जयकारे गुंजायमान होने लगते हैं।
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कलश यात्रा के साथ कथा शुरू
फतेहपुर चौरासी। ग्राम झूलूमऊ स्थित देवी माता फूलमती के वार्षिकोत्सव पर हनुमत महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ पर भक्तों ने कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा माता के मंदिर से प्रारंभ होकर गंगा नदी के सरैइयाघाट तक गई। यज्ञाचार्य अरविंद द्विवेदी ने बताया कि 16 फरवरी को सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार होंगे। कलश यात्रा में आयोजक फलाहारी बाबा, यज्ञाचार्य शिवम द्विवेदी, कथा व्यास नीरज स्वरूप ब्रह्मचारी, कृपाशंकर अवस्थी, विनीत व हरिकिशोर आदि भक्तजन मौजूद रहे। (संवाद)