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मिलावटी सामान बेचने पर अब और सख्त मिलेगी सजा
Updated Fri, 31 Aug 2018 12:32 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। खानपान की वस्तुओं में मिलावट पर अब उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने पूर्व में बनाए गए नियमों में संशोधन किया है। इसके तहत जुर्माने की धनराशि के साथ-साथ सजा भी बढ़ाई गई है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग बाजार में बिकने वाली खानपान की वस्तुओं पर निगरानी रखता है। विभाग में तैनात फूड इंस्पेक्टर समय-समय पर खाद्य पदार्थों की चेकिंग करके सैंपल भरते हैं। सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है। जांच रिपोर्ट आने पर यदि साधारण मिलावट की पुष्टि होती है तो एडीएम कोर्ट में वाद दायर किया जाता है।
अपर जिलाधिकारी मामले की सुनवाई करते हैं और मिलावट की गंभीरता पर आर्थिक जुर्माना लगाते हैं। वहीं जिन मामलों में ऐसी मिलावट पाई जाती है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं तो उन मामलों को सिविल कोर्ट में दायर किया जाता है। इन मामलों में मिलावटकर्ता को सजा और जुर्माना दोनों सुनाया जाता है। अभी तक साधारण मिलावट पाए जाने पर व्यवसाय की प्रकृति के अनुसार जुर्माना लगाया जाता है। अब आगे भविष्य में साधारण मिलावट पर भी 10 लाख तक का आर्थिक दंड मिलावटखोरों पर लगाया जाएगा।
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गंभीर मामलों में होगी छह साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा
मिलावट के गंभीर प्रकरणों पर पहले तीन साल की सजा होती थी। अब नए संशोधन में छह साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा सुनाई जा सकती है। इसके लिए खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 में संशोधन किया जा रहा है। जिला अभिहित अधिकारी डा. सुधीर कुमार ने बताया कि नए संशोधन का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। जल्द ही इसे लागू किया जा सकता है। इसके लागू होने के बाद मिलावट में काफी हद तक अंकुश लग सकेगा।
-खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर पूर्व के नियमों में किया संशोधन
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उन्नाव। खानपान की वस्तुओं में मिलावट पर अब उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने पूर्व में बनाए गए नियमों में संशोधन किया है। इसके तहत जुर्माने की धनराशि के साथ-साथ सजा भी बढ़ाई गई है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग बाजार में बिकने वाली खानपान की वस्तुओं पर निगरानी रखता है। विभाग में तैनात फूड इंस्पेक्टर समय-समय पर खाद्य पदार्थों की चेकिंग करके सैंपल भरते हैं। सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है। जांच रिपोर्ट आने पर यदि साधारण मिलावट की पुष्टि होती है तो एडीएम कोर्ट में वाद दायर किया जाता है।
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अपर जिलाधिकारी मामले की सुनवाई करते हैं और मिलावट की गंभीरता पर आर्थिक जुर्माना लगाते हैं। वहीं जिन मामलों में ऐसी मिलावट पाई जाती है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं तो उन मामलों को सिविल कोर्ट में दायर किया जाता है। इन मामलों में मिलावटकर्ता को सजा और जुर्माना दोनों सुनाया जाता है। अभी तक साधारण मिलावट पाए जाने पर व्यवसाय की प्रकृति के अनुसार जुर्माना लगाया जाता है। अब आगे भविष्य में साधारण मिलावट पर भी 10 लाख तक का आर्थिक दंड मिलावटखोरों पर लगाया जाएगा।
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गंभीर मामलों में होगी छह साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा
मिलावट के गंभीर प्रकरणों पर पहले तीन साल की सजा होती थी। अब नए संशोधन में छह साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा सुनाई जा सकती है। इसके लिए खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 में संशोधन किया जा रहा है। जिला अभिहित अधिकारी डा. सुधीर कुमार ने बताया कि नए संशोधन का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। जल्द ही इसे लागू किया जा सकता है। इसके लागू होने के बाद मिलावट में काफी हद तक अंकुश लग सकेगा।
-खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर पूर्व के नियमों में किया संशोधन