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सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट किसानों को दे रहा दर्द
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Mon, 18 May 2015 01:15 AM IST
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बांगरमऊ/सफीपुर। सीएम अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे किसानों को दर्द दे रहा है। एक्सप्रेस वे निर्माण कार्य में लगे अधिकारी, कर्मचारी किसानों की बैनामे से ज्यादा भूमि पर कब्जा कर रहे हैं। ये ज्यादा भूमि किसानों से ‘फ्री’ में ले रहे हैं। इसका ही किसान विरोध कर रहे हैं। इसमें गौर करने वाली बात यह है कि प्रभावित किसानों ने तहसील से लेकर डीएम तक से इसकी शिकायत की लेकिन इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
आगरा एक्सप्रेस वे का शिलान्यास 23 नवंबर 2014 को लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने किया था। 300 किमी. लंबे इस एक्सप्रेस वे में जनपद का 65 किमी. से ज्यादा क्षेत्र आ रहा है। एक्सप्रेस वे के लिए जनपद की तीन तहसीलों हसनगंज, सफीपुर व बांगरमऊ के 50 गांवों की 661.3814 हेक्टेअर जमीन अधिग्रहीत की गई है। इसके अलावा 39 हेक्टेअर भूमि सरकारी है।
जानकारों की मानें तो अधिग्रहीत की गई जमीन का सर्किल रेट से चार गुना अधिक मुआवजा देने की बात कही जा रही है। दूसरी ओर बांगरमऊ तहसील क्षेत्र के रसूलपुर मझगवां में एक्सप्रेस वे निर्माण में लगे कर्मचारी किसानों की गैर बैनामे की जमीन को भी कब्जा करने में लगे हैं। गांव के लोग अधिग्रहीत की गई जमीन से अधिक पर कब्जा और मानक से ज्यादा मिट्टी खनन का आरोप लगा रहे हैं।
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बताया जाता है कि जिस कंपनी को निर्माण का ठेका मिला है उसने मिट्टी के भरान का काम छोटे-छोटे ठेकेदारों को दे रखा है। कंपनी ने एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए पहले पिलर गाड़े थे। अब वह उसे सीधा नाप रहे हैं इससे किसानों से जिस जमीन का बैनामा कराया गया है वह छूटती जा रही है। वहीं इसकी जद में गैर बैनामे की जमीन आ रही है। भूमि पर कब्जा करने में मनमानी की जा रही है। इसके अलावा मानक से ज्यादा मिट्टी खनन भी हो रहा है। इससे किसानों को हर तरफ से आर्थिक चोट लग रही है।
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आगरा एक्सप्रेस वे का शिलान्यास 23 नवंबर 2014 को लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने किया था। 300 किमी. लंबे इस एक्सप्रेस वे में जनपद का 65 किमी. से ज्यादा क्षेत्र आ रहा है। एक्सप्रेस वे के लिए जनपद की तीन तहसीलों हसनगंज, सफीपुर व बांगरमऊ के 50 गांवों की 661.3814 हेक्टेअर जमीन अधिग्रहीत की गई है। इसके अलावा 39 हेक्टेअर भूमि सरकारी है।
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जानकारों की मानें तो अधिग्रहीत की गई जमीन का सर्किल रेट से चार गुना अधिक मुआवजा देने की बात कही जा रही है। दूसरी ओर बांगरमऊ तहसील क्षेत्र के रसूलपुर मझगवां में एक्सप्रेस वे निर्माण में लगे कर्मचारी किसानों की गैर बैनामे की जमीन को भी कब्जा करने में लगे हैं। गांव के लोग अधिग्रहीत की गई जमीन से अधिक पर कब्जा और मानक से ज्यादा मिट्टी खनन का आरोप लगा रहे हैं।
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बताया जाता है कि जिस कंपनी को निर्माण का ठेका मिला है उसने मिट्टी के भरान का काम छोटे-छोटे ठेकेदारों को दे रखा है। कंपनी ने एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए पहले पिलर गाड़े थे। अब वह उसे सीधा नाप रहे हैं इससे किसानों से जिस जमीन का बैनामा कराया गया है वह छूटती जा रही है। वहीं इसकी जद में गैर बैनामे की जमीन आ रही है। भूमि पर कब्जा करने में मनमानी की जा रही है। इसके अलावा मानक से ज्यादा मिट्टी खनन भी हो रहा है। इससे किसानों को हर तरफ से आर्थिक चोट लग रही है।